लंका पर विजय के विश्वव्यापी संदेश
आज भी विश्व के शक्तिशाली देशों में साम्राज्यवादी महत्वाकांक्षाऐं रह-रह कर हिलोरे लेती रहती हैं। हर शक्तिशाली देश अपनी भौगोलिक सीमाओं को विस्तार देने के लिए आज भी प्रयासरत हैं। पश्चिमी दुनिया के विकसित देशों की गिद्ध दृष्टि तीसरी दुनिया के पिछड़े देशो की प्राकृतिक सम्पदा पर आज भी गड़ी रहती हैं। ऐस…
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जिन्दगी एक भोर है सूरज की तरह प्रकाश बिखेरते रहे!
(1) सूरज की तरह प्रकाश बिखेरते रहे :- होके मायूस ना यूँ शाम की तरह ढलते रहिए, जिन्दगी एक भोर है सूरज की तरह प्रकाश बिखेरते रहे। ठहरोगे एक पाँव पर तो थक जाओगे, धीरे-धीरे ही बेशक, सही राह पर चलते रहिए। कर्म करने से हार या जीत कुछ भी मिल सकती हैं, लेकिन कर्म न करने से केवल हार ही मिलती है। क्यों डरे…
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भारतीय समाजवाद के प्रखर राजनेता, प्रचारक तथा प्रवक्ता थे जय प्रकाश नारायण
11 अक्तूबर 1902 को सिताबदियरा में पैदा हुए लोकनायक जयप्रकाश ने अपना राजनीतिक जीवन गाँधीवादी असहयोगी और भगवत गीता के दर्शन के ईमानदार विद्यार्थी और अनुयायी के रूप में किया। हालांकि कैलीफोर्निया विश्वविद्यालय अमेरिका  में अध्ययन के दौरान उनका सम्पर्क पूर्वी यूरोप के बुद्धिजीवियों से हुआ और उनके प्रभा…
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*विश्व प्रकृति दिवस*
विश्व प्रकृति दिवस आज है. विलुप्त होते जीव जंतु और वनस्पति की रक्षा का विश्व प्रकृति दिवस पर संकल्प लेना ही इसका उद्देश्य है. जल, जंगल और जमीन, इन तीन तत्वों के बिना प्रकृति अधूरी है. विश्व में सबसे समृद्ध देश वही हुए हैं, जहाँ यह तीनों तत्व प्रचुर मात्रा में हों. भारत देश जंगल, वन्य जीवों के लि…
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कोई भी देश आत्मसम्मान के साथ तभी खड़ा हो सकता जब उसका कृषि तथा खाद्यान उत्पादन में आत्मनिर्भरता हो : लालबहादुर शास्त्री जी
! ! कृषि आत्मनिर्भरता औऱ कृषि विकास"!!       !!योगदान एवं आत्मसम्मान " डॉ. शास्त्री जी।!!  प्रस्तावना :- कृषि जीवन का आधार हैं। अर्थात कृषि के बिना जीवन की सफल कल्पना मात्र नही की जा सकती हैं। भारत देश प्राचीन काल से ही ऋषि औऱ कृषि परंपरा का देश माना जाता हैं। कृषि का आधार हमारे प्र…
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महात्मा बुद्ध के आधुनिक अवतार थे महात्मा गाँधी
भारत में प्रथम सामाजिक क्रांति के प्रणेता महात्मा बुद्ध द्वारा प्रदीप्त सत्य अहिंसा और करूणा के विचार को आधुनिक काल में ईमानदारी और पूरी निष्ठा के साथ महात्मा गांधी ने स्थापित और जन-जन के हृदय समाहित करने का श्लाघनीय प्रयास किया। निष्ठुर, निर्दयी, निर्मम और अत्याधुनिक अस्त्र-शस्त्र से सुसज्जित ब्रि…
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वर्तमान संदर्भ में और अधिक प्रासंगिक हो गया है गाँधी जी के पर्यावरण संरक्षण संबंधी विचार : डॉ0 गणेश पाठक
गाँधी जयन्ती 2 अक्टूबर पर विशेष-            बलिया। अमरनाथ मिश्र स्नातकोत्तर महाविद्यालय दूबेछपरा, बलिया के पूर्व प्राचार्य एवं वर्तमान में जननायक चन्द्रशेखर विश्वविद्यालय बलिया के शैक्षणिक निदेशक पर्यावरणविद् डा० गणेश पाठक ने एक भेंटवार्ता में बताया कि वर्तमान समय में महात्मा गाँधी के पर्यावरण संरक…
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आधुनिक दौर में टोडरमल की तरह याद किए जाते हैं डॉ. मनमोहन सिंह
26 सितम्बर जन्मदिन की बहुत बहुत बधाई :- जिस तरह अकबर के नवरत्नो में से एक राजा टोडरमल ने बडी विषम परिस्थितियों में अपने जीवन की शुरुआत एक लेखक के रूप मे की  बाद मे शेरशाह सूरी और सम्राट अकबर के शासनकाल में विभिन्न पदो पर कार्य करते हुए अपनी सेवाएं दी। उसी तरह डाक्टर मनमोहन सिंह ने बड़ी विषम परिस्…
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बलिया में पर्यटन विकास हेतु विद्यमान हैं पर्याप्त सम्भावनाएँ : डा० गणेश पाठक (पर्यावरणविद्)
विश्व पर्यटन दिवस पर विशेष :- बलिया। अमरनाथ मिश्र स्नातकोत्तर  महाविद्यालय दुबेछपरा के पूर्व प्राचार्य एवं वर्तमान में जननायक चन्द्रशेखर विश्वविद्यालय बलिया के शैक्षणिक निदेशक  पर्यावरणविद् डा० गणेश कुमार पाठक ने एक भेंटवार्ता में बताया कि जनपद बलिया विविधताओं एवं विभिन्नताओं से भरा पड़ा है। खनिज सं…
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विश्व नदी संरक्षण दिवस पर विशेष.....
बलिया। अमरनाथ मिश्र स्नातकोत्तर महाविद्यालय दूबेछपरा, बलिया के पूर्व प्राचार्य एवं वर्तमान में जननायक चन्द्रशेखर विश्वविद्यालय बलिया के शैक्षणिक निदेशक पर्यावरणविद् डा० गणेश कुमार पाठक ने एक भेंटवार्ता में बताया कि गंगा मात्र जल स्रोत के रूप में हमारे लिए जल संसाधन ही नहीं है, बल्कि गंगा हमारी मा…
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धीरे-धीरे विलुप्त होती जा रही है संसदीय जनतंत्र की स्वस्थ्य और गौरवशाली परम्पराएं : मनोज कुमार सिंह
आज से ढाई हजार साल पहले यूनानी दार्शनिक सुकरात के सबसे प्रिय और सर्वश्रेष्ठ शिष्य प्लेटो ने आदर्श राज्य की अवधारणा प्रस्तुत करते हुए कहा था कि-"राजा को दार्शनिक होना चाहिए या दार्शनिक को राजा होना चाहिए "। प्लेटो के इस दार्शनिक राजा के सिद्धांत को उसके शिष्य अरस्तू ने ही पूरी तरह खंडित-वि…
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अनाज की असली जगह गोदाम और कोठार नहीं बल्कि भूखे पेट होते हैं---
राष्ट्रीय पोषण जागरूकता माह-सितंबर  :- अनाज की असली जगह गोदाम, कोठार और बेयर हाउस नहीं होते हैं बल्कि भूखे पेट होते हैं। हमारे नीति नियंताओं के अंदर यह समझदारी विकसित होने में लगभग 66 वर्ष लग गए। देर से ही सही सर्वोच्च न्यायालय की बार-बार डॉट फटकार के बाद वर्ष 2013 मे हर पेट को भूख से आजादी दिलाने …
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महादेवी वर्मा हिन्दी साहित्य की अद्वितीय श्रृंगारिका ने अपने श्रृंगार के लिए कभी आइना नहीं देखा---
पुण्यतिथि पर पुण्य स्मरण - आधुनिक दौर के साहित्यिक जगत में  मीराबाई के नाम से विख्यात, महाप्राण सूर्यकांत त्रिपाठी निराला, जयशंकर प्रसाद और प्रकृति के सुकुमार कवि कहे जाने वाले सुमित्रानंदन पंत के साथ हिन्दी साहित्य की छायावादी परम्परा के चार प्रमुख स्तम्भों में से एक, महाकवि निराला के शब्दों में &…
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निजीकरण व्यवस्था नहीं रियासतीकरण है
संविधान में आर्टिकल 21, 37, 38, 39 और 300 के रहते केन्द्र सरकार निजीकरण नहीं कर सकती और न ही निजीकरण पर कोई कानून बना सकती। यदि सरकार संविधान का उलंघन कर निजीकरण के लिए मनमाना कानून बनाती है तो सरकार अदालतों में टिक नहीं सकती वसरते न्यायालय सही न्याय करे तो संविधान का उलंघन देश द्रोह का अपराध है …
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तालिबान सरकार की मान्यता पर संकट
ग्यारह सितम्बर का नाम आते ही अमरीकी ट्विन टॉवर जो कभी विश्व व्यापार संगठन का मुख्यालय हुआ करता था, के ऊपर 11.09.2001 को हुए आतंकबादी हमले की याद ताज़ा हो जाती है। अज़ीब संयोग है कि उसी के बाद अफगानिस्तान में नाटो के नेतृत्व में अमेरिकी हस्तक्षेप ने जिस तालिबानी सरकार के प्रथम युग का अंत किया वही तालि…
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