*विश्व प्रकृति संरक्षण दिवस*
28 जुलाई :- वर्तमान परिपेक्ष्य में कई प्रजाति के जीव जंतु एवं वनस्पति विलुप्त हो रहे हैं। विलुप्त होते जीव जंतु और वनस्पति की रक्षा का विश्व प्रकृति संरक्षण दिवस पर संकल्प लेना ही इसका उद्देश्य है। जल, जंगल और जमीन, इन तीन तत्वों के बिना प्रकृति अधूरी है। विश्व में सबसे समृद्ध देश वही हुए हैं, जह…
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प्रकृति संरक्षण : मानव एवं प्रकृति एक दूसरे के पूरक, परस्पर समायोजन ही एकमात्र विकल्प : डा०गणेश
आज विश्व प्रकृति संरक्षण दिवस पर विशेष- आज विश्व प्रकृति संरक्षण दिवस के अवसर पर अमरनाथ मिश्र स्नातकोत्तर महाविद्यालय दूबेछपरा, बलिया के पूर्व प्राचार्य एवं सम्प्रति जननायक चन्द्रशेखर विश्वविद्यालय बलिया उ० प्र० के शैक्षणिक निदेशक पर्यावरणविद् डा० गणेशकुमार पाठक ने एक भेंटवार्ता में बताया कि मानव ए…
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सम्पूर्ण विश्व में विश्व गुरु के नाम से विख्यात भारत में क्षीण होता गुरुओं का गुरूत्व : मनोज कुमार सिंह
एक माँ अपने बच्चे को कलेजे का टुकडा मानतीं हैं उसके ऊपर जान छिडकती हैं परन्तु वही बच्चा जब हद से ज्यादा शरारत करने लगता है तो वही माॅ अपने बच्चे को नालायक, निट्ठल्ला, निकम्मा और कुवंशी जैसे-शब्दों से कोसती है। यह सर्वविदित तथ्य है कि-आज भी उस माँ के कलेजे के टुकड़े को जिसको वह नालायक बनाती हैं उसे ल…
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जिस पर जीवन का हर खेल टिका है उसी ऑक्सीजन के साथ जमकर हो रहा है सियासी खेल : मनोज कुमार सिंह
भूवैज्ञानिकों के अनुसार आज से लगभग साढे चार अरब वर्ष पूर्व उत्पन्न और सूर्य से उत्तम दूरी पर स्थित पृथ्वी पर ही केवल जीवन पाया जाता है। सौरमण्डल के सभी ग्रहों में केवल पृथ्वी पर जीवन पाए जाने का सबसे बड़ा कारण समुचित और संतुलित मात्रा में ऑक्सीजन की उपलब्धता हैं। प्राचीन और अर्वाचीन वैज्ञानिकों के अ…
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हमें मानव का शरीर एकमात्र अपनी ‘आत्मा के विकास’ के लिए परमात्मा ने दिया है!
परमात्मा ने दो तरह की योनियाँ बनायी हैं - पहला पशु योनियाँ तथा दूसरा मानव योनि। हिन्दू शास्त्रों के अनुसार 84 लाख पशु योनियों में अगिनत वर्षों तक अत्यन्त कष्टदायी तथा दुःखदायी जीवन बिताने के बाद मानव योनि में जन्म दयालु परमात्मा की कृपा से बड़े सौभाग्य से मिलता है। इस मानव योनि में ही मनुष्य अपनी …
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बौद्धिक वर्ग की निरंतर सिकुड़ती राजनीतिक और सामाजिक भूमिका : मनोज कुमार सिंह
विश्व में होने वाली विविध क्रांतिओं और समय-समय पर होने वाले सामाजिक और राजनीतिक परिवर्तन और सामाजिक सुधारों की सफलता में उस समाज के बौद्धिक वर्ग की अग्रणी भूमिका रही है। दुनिया में समय-समय पर होने वाले इन समस्त सामाजिक परिवर्तनों, सामाजिक सुधारों और सुप्रसिद्ध क्रांतिओ का कुशलता पूर्वक मार्गदर्शन ब…
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जल संकट का संकेत है निरन्तर घटता भू- जल स्तर : डा० गणेश पाठक
भू-जल संरक्षण सप्ताह 16 - 22 जुलाई पर विशेष :-     बलिया। भू-जल संरक्षण सप्ताह 16-22 जुलाई के अवसर पर अमरनाथ मिश्र स्नातकोत्तर महाविद्यालय दूबेछपरा के पूर्व प्राचार्य एवं समग्र विकास शोध संस्थान के सचिव पर्यावरणविद् डा० गणेश पाठक ने एक भेंटवार्ता में बताया कि पृथ्वी तल के नीचे स्थित किसी भू-गर्भिक …
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भूगर्भ जल का घटता स्तर : घोर जलसंकट का संकेत : अभिनव पाठक, पर्यावरण सेवक
आज विश्व भू-गर्भ जल दिवस पर विशेष :- बलिया। आज विश्व भूगर्भ जल दिवस के अवसर पर एक भेंटवार्ता में श्री गणेशा सोशल वेलफेयर ट्रस्ट के न्यासी एवं पर्यावरण सेवक अभिनव पाठक ने बताया कि पृथ्वी तल के नीचे स्थित किसी भू-गर्भिक स्तर की सभी रिक्तियों में विद्यमान जल को भू- गर्भ जल कहा जाता है। अपने देश में लग…
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इंसानियत जिन्दा हैं और जिन्दा रहेंगी
इंसानियत जिन्दा हैं और जिन्दा रहेंगी, एक दूसरे की जान बचाने के लिए, अस्पतालों में खून देने का चलन-कलन जब तक जिन्दा हैं, सरहदें हो या महामारियों का संकट, जान बचाने के लिए जान गवांने का जूनून, जज्बा और जोश जबतक जिन्दा हैं, नफरती और खुराफातीं हवाऐं  इस दौर में बहुत तेज चलती हैं, पर एक दूसरे से गले मिल…
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जनसंख्या वृद्धि से उत्पन्न हो रही हैं सामाजिक, आर्थिक एवं पर्यावरणीय समस्यिएँ : डा० गणेश पाठक
बलिया। विश्व जनसंख्या दिवस के अवसर पर अमरनाथ मिश्र स्नातकोत्तर महाविद्यालय दूबेछपरा, बलिया के पूर्व प्राचार्य एवं समग्र विकास शोध संस्थान बलिया के सचिव पर्यावरणविद् डॉ. गणेश कुमार पाठक ने बताया जनसंख्या वृद्धि भौतिक एवं सामाजिक पर्यावरण पर विशेष प्रभाव डालता है. किसी भी क्षेत्र की जनसंख्या वृद्धि उ…
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अपने कमाल, करतब और करिश्मे से बेटियां ही कर सकती हैं दहेज का अंतिम संस्कार : गीता पाण्डेय
आदिम, असभ्य, बर्बर और अनपढ़ जीवन से सभ्य, सुसंस्कृत और सुशिक्षित जीवन के विकासक्रम में और चरण-दर-चरण सभ्यता की ओर उत्तरोत्तर डग भरते हुए मनुष्य ने किसी पंडाॅव पर यौन अराजकता को रोकने और स्त्री-पुरुष संबंधों में स्थिरता, सुनिश्चितता, स्थायित्व और अनुशासन लाने तथा सुनिश्चित दंपत्तियों द्वारा उत्पन्न स…
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कोरोना लहर : लचर शिक्षा व्यवस्था अधर में परीक्षा और बीच भँवर में कर्णधार : मनोज कुमार सिंह
वैश्विक महामारी कोरोना ने वैसे तो हमारे जन-जीवन के सभी क्षेत्रों को प्रभावित किया परन्तु इसका सर्वाधिक प्रभाव हमारी शिक्षा व्यवस्था, सामान्य अकादमिक परीक्षाओं सहित विविध प्रतियोगिता परीक्षाओं और देश के कर्णधारो के भविष्य पर पडा है। प्राथमिक विद्यालयों से लेकर उच्च शिक्षा से जुड़े सभी शिक्षण संस्थानो…
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लोकतंत्र के चार स्तम्भों में से कमजोर होता एक स्तम्भ "पत्रकारिता" : परवेज अख्तर
*कार्यपालिका*   *न्यायपालिका*   *विधायिका*  लोक तंत्र के इन *तीन स्तम्भ* पर नज़र रखने और लोगों को इनकी बातों व हरकतों  से निष्पक्ष तरीके से रूबुरू कराने के लिये ही   *चौथा स्तम्भ* यानी *पत्रकारिता* मौजूद है पर अब इस चौथे स्तम्भ पर भी ज़बरदस्त खतरा मन्डराने लगा है! पत्रकारों को धमकी, उन पर हमले …
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सर्वोच्च मानवतावादी मूल्यों, मान्यताओं और आदर्शों को हर हृदय में स्थापित करना ही धर्म का वास्तविक उद्देश्य : मनोज कुमार सिंह
धर्म का वास्तविक उद्देश्य सामाजिक जीवन में सर्वोच्च, सर्वोत्तम और सर्वोत्कृष्ट मानवतावादी मूल्यों, मान्यताओं और आदर्शों को स्थापित करना हैं। इन मूल्यों, मान्यताओं और आदर्शों से निरंतर अनुप्राणित, अनुरंजित और अनुशासित होते हुए मनुष्य अपने श्रेष्ठ नैतिक और चारित्रिक गुणों का विकास करता है और विकास कर…
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