भविष्य में आने वाला है घोर जल संकट, करने होंगें संरक्षण के उपाय : डाॅ0 गणेश पाठक
10 जून, विश्व भू-गर्भ जल दिवस पर विशेष :-   पृथ्वी तल के नीचे स्थित किसी भू-गर्भिक स्तर की सभी रिक्तियों में विद्यमान जल को भू-गर्भ जल कहा जाता है। अपने देश में लगभग 300 लाख हेक्टोमीटर भू-गर्भ जल उपलब्ध है। इसका 80 प्रतिशत तक हम उपयोग कर चुके हैं।यदि भू-जल विकास स्तर की दृष्टि से देखा जाय तो अपना द…
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“मेरा वोट–मेरी आवाज–मेरा लोकतंत्र”
18वीं लोकसभा का आगाज निर्वाचन आयोग के द्वारा अधिसूचना जारी होने के बाद चुनावी रणभूमि में राजनीतिक पार्टिया पूरी तरह से उतर गयी है। चुनावी शंखनाद राजनीतिक युद्ध के मैदान मे हो चुका है, दुदुंभी बज रही है जिसमे राजनीतिक पार्टी के सेनापति तथा सेनाये परस्पर एक-दूसरे के सामने चुनावी एंव शब्द भेदी एंव तीख…
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वीरांगना दुर्गावती की आत्म उत्सर्ग गाथा
प्रत्येक राज सत्ता कि व्यवस्था, राजा-रानी की चरित्र का वर्णन करने कि संकलन करना एक जटिल समस्या होती है और इतिहासविद राज सत्ता कि विभिन्न घटना कम को अपनी जानकारी के आधार पर सारे तथ्यों को संकलित करके वृतान्त लिखते है। कभी-कभी इतिहासविद किसी राज्य सत्ता के शासकों की वृतान्त को लिखने से वंचित हो जाते …
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बलिया : पहली बार जब बागी बलिया ने आजादी हासिल की : डॉ नवचंद्र तिवारी
भारत के राष्ट्रीय पटल पर भृगु मुनि की पावन धरा पर अवस्थित बागी बलिया का इतिहास में 19 अगस्त  स्वर्णाक्षरों में अंकित है। यह क्रांति का वह चरमोत्कर्ष वाला दिवस था। महात्मा गांधी के मुंबई में गिरफ्तारी के फल स्वरुप संपूर्ण बलिया ब्रिटिश शासन के विरोध में सुलग उठा था। 9 अगस्त 1942 से 19 अगस्त 1942 तक …
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खान अब्दुल गफ्फार खान (सरहदी गाँधी) की याद में.....
बात उन दिनों की है, महात्मा गाँधी को दक्षिण अफ्रीका से लौटे अभी चंद वर्ष ही बीते थे। जल्द ही उनके द्वारा चलाये जा रहे अहिंसक, सत्यग्रह की चर्चा चारो तरफ होने लगी थी। सैकड़ों मील दूर अफगानिस्तान की सरहद पर पशतून पठान कबीले तक भी यह बात पहुंची। इसी कबीले के एक पढे लिखे नौजवान को सत्य, अहिंसा पर आधार…
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बलिया के लिए बरदान हैं आर्द्रभूमियां : डॉ0 गणेश पाठक
बलिया। अमरनाथ मिश्र स्नातकोत्तर महाविद्यालय दूबेछपरा, बलिया के पूर्व प्राचार्य एवं जननायक चन्द्रशेखर विश्वविद्यालय बलिया के पूर्व शैक्षिक निदेशक पर्यावरणविद् डा०गणेश कुमार पाठक ने एक भेंटवार्ता में बताया कि "आर्द्र भूमि वह भूमि होती है जो जलीय पारिस्थितिक प्रणाली में, जहां जल का तल प्रायः जमीन…
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वैदिक वाङ्मय का पुनर्जन्म का सिद्धांत मिथक नहीं अपितु यथार्थ : डॉ0 विद्यासागर उपाध्याय
वैदिक वाङ्मय को चार भागों में बाँटा गया है :-   1- वेद संहिता। 2- ब्राह्मण ग्रन्थ। 3- आरण्यक ग्रन्थ।  4- उपनिषद्। वर्तमान समय में वैदिक वाङ्मय ही हिन्दू धर्म के प्राचीनतम स्वरूप पर प्रकाश डालने  वाले विश्व के प्राचीनतम् स्रोत है।पुनर्जन्म की जो व्याख्या सनातन वैदिक वाङ्मय में उपलब्ध है उस पर पाश्…
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क्या हाउसिंग सोसायटी अविवाहित लोगों को घर किराए पर लेने से रोक सकता है?
कई मकान मालिकों का कुंवारे या अकेले रह रहे लोगों को घर किराये पर देने का अनुभव अच्छा होता है. साथ ही, कुंवारे लोगों को किराए पर लेना फ्लैट मालिक के लिए अधिक फायदेमंद होता है क्योंकि वे आपस में खर्चों को विभाजित करके अधिक भुगतान करने को तैयार होते हैं। लेकिन शहरों में हाउसिंग सोसाइटी अक्सर यह नियम ब…
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विज्ञान और धर्म अलग नहीं, बल्कि एक ही सिक्के के दो पहलू हैं! : डॉ. जगदीश गाँधी
विज्ञान व धर्म मिलकर समाज की बेहतर सेवा कर सकते हैं। विज्ञान और धर्म अलग नहीं, बल्कि एक ही सिक्के के दो पहलू हैं। यह धारणा गलत है कि विज्ञान व धर्म साथ-साथ नहीं चल सकते हैं। विज्ञान प्रत्यक्षवाद और धर्म परोक्षवाद पर विश्वास करता है। प्रत्यक्ष व परोक्ष मिलकर एक होते हैं। दुर्भाग्य यह है कि वैज्ञानिक…
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इस प्यारी पृथ्वी को बचाने के लिए ‘विश्व संसद’ जरूरी! : डॉ. जगदीश गाँधी
(विश्व पृथ्वी दिवस (22 अप्रैल) पर विशेष लेख) (1) पृथ्वी के बिना हम जीवन की परिकल्पना भी नहीं कर सकते :- पृथ्वी के बिना हम जीवन की परिकल्पना भी नहीं कर सकते। पृथ्वी पर ही हमें जीवित रहने के लिए अन्न, जल इत्यादि मिलता है। वास्तव में सौर मंडल के नौ ग्रहों में से, पृथ्वी ही एकमात्र ऐसा ग्रह है, जहां जी…
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