हिंदी खातिर मैडम से विवाद


एक मैडम से विवाद हो गया,

थोड़ा नहीं, बेहिसाब हो गया।

उसने कहा—“हाउ आर यू?”

मैंने कहा—“ठीक हूं।”


उसने कहा—“इंग्लिश नहीं आती है क्या?”

मैंने कहा—“ऐसा नहीं कि मुझे इंग्लिश आती नहीं है,

सच कहूं तो मुझे तुम्हारी ये इंग्लिश भाती नहीं है।”


हम बड़े को कहते हैं ‘आप’ और छोटे को ‘तू’,

तुम शिष्टाचार भूल बड़े-छोटे सबको कहती हो ‘यू’।

अरे, जाओ! पहले अपनी भाषा को शिष्टाचार सिखाओ,

दादी-नानी के लिए अलग-अलग शब्द तो लाओ।


‘K’ और ‘C’—दोनों से “क” 

‘J’ या ‘Z’—किससे होगा “ज”

मैडम! पहले ये शब्दकोश और व्याकरण समझाओ,

फिर हमको इंग्लिश का ज्ञान सिखाओ।


बात बढ़ी तो मैडम भी मुस्काई,

हिंदी की कुछ बातें समझ में आईं।

अब हमसे विवाद करके पछता रही हैं,

हिंदी में ही बातें किए जा रही हैं।


मैंने कहा— "मैडम, यही तो है हिंदी की शान,

दिल से निकले तो बन जाती है अपनी जुबान।

दुनिया की भाषाएं सीखो, ज्ञान बढ़ाओ,

पर अपनी हिंदी को कभी मत भुलाओ।"


आओ मिलकर हिंदी अपनाएं,

हिंदी का गौरव विश्व में फैलाएं। 

मातृभाषा का मान बढ़ाएं,

हिंदी को जन-जन की भाषा बनाएं।


तुलसी सोनी ✍️

(शोधार्थी, हिंदी विभाग)

जननायक चंद्रशेखर विश्वविद्यालय, बलिया।