"जल है तभी हमारा कल है"
घटते जल स्रोतों, शुद्ध पेय जल की बढ़ती किल्लतें, बढ़ते जल प्रदूषण और उनके दुष्प्रभाव, जल संरक्षण पर जन जागरूकता हेतु एक विशेष काव्य प्रस्तुति :-              1. जल है तभी सजीव सृष्टि है    जल ही जीवन का आधार    जल है तभी हमारा कल है    करो सुरक्षित जल भंडार ।। 2. जल है तभी सुवाहित नदियां    झरनों म…
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चुनावी पंक्तियां
भाषण का बादल लगा है वादों की बरसात देखो। शह-मात का खेल सजा है कैसी बिछी बिसात देखो। आरोपों-प्रत्यारोपों का मौसम बड़ा सुहाना है समय बताए कौन परे है कौन किसके साथ देखो। डॉ. नवचंद्र तिवारी बलिया (उ.प्र.)
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"वृक्ष हमारे जीवन दाता"
पेड़ पौधों वनों की अंधाधुंध कटाई के नुकसान, वृक्षों के महत्त्व और वृक्षों के संवर्धन, संरक्षण के प्रति जनमानस के जागरूकता हेतु एक विशेष काव्य प्रस्तुति :-             1. ऐसे न काटो वृक्षों को   वृक्ष हमारे जीवन दाता   इनसे ही संसार है जिंदा   ये संसार के भाग्य विधाता। 2. वृक्षों से सुख शांति है मिल…
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एक एक मत बहुत जरूरी
मतदाता जागरूकता एवं मतदान के महत्व विषय पर एक विशेष काव्य प्रस्तुति :-             1. एक एक मत बहुत जरूरी    इससे न करना इनकार    एक एक मत से ही समझो    बन सकती है तेरी सरकार 2. है मतदान महान कार्य   बढ़ जाता है सबका सम्मान   सबके एक एक मत से ही    लोक तंत्र में आती जान।   कर मतदान दिखा दो सबको   आ…
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चुनावी पंक्तियां
रैली पे रैली देखो सुनो वादों का दौर। बाहर से कुछ और दिखते अंदर से कुछ और। अंदर से कुछ और देव से दिखते नेताजी। जनता समझ रही है कोई क्या देता क्या लेता जी। भरोसा किस पर हम करें कैसे हो विश्वास। शराब है वही नवचंद्र बस बदल गया गिलास। डॉ0 नवचंद्र तिवारी  ✍️ बलिया (उ.प्र.)
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"बढ़ गई तपिश अधिक"
भीषण तपिश और लू पर जनजागरूकता हेतु विशेष प्रस्तुति :-              1.  बढ़ गई तपिश अधिक      संभालो अपने आपको      कट रहे जो वृक्ष, वन       बढ़ाते सूर्य ताप को ।। 2.  उजाड़ते हो जंगलों को      नग्न हो रही धरा      बढ़ रही है लू, तपिश      संसार होता अध मरा।। 3.  हवाएं भी दूषित हुई      फिजाएं भी ब…
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प्रेम की खिचड़ी
बड़ा ही अद्भुत पर्व है ये दिखे सूरज की लाली। स्नान, दान, और पूजा से तो सज जाती है थाली। दही, चूरा, गुड, तिलवा, तिलकुट सबके मन को भाये पतंग उड़ाते नभ में बच्चे स्वागत करती ताली। लोहड़ी, पोंगल, पीहू, उत्तरायन, बिहू, संक्रांति नाम प्रेम की खिचड़ी जन-जन खाएं कोई बचे न खाली। दमके प्रभु सद्भाव का मौसम …
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बेटियों को विरासत नही चाहिए !!
शादी के बाद हर लड़की चाहती है !! की उसके पिठ पीछे मायके की एक मजबूत दीवार हो !! कुछ ना भी मिले फिर भी !! ऐ एहसास हो मेरे मायके वाले मेरे साथ हैं !! तीज त्योहार पर मायके से कोई आये !! साड़ी कपड़े मिठाईयों के साथ !! ससुराल में गर्व से बोलती हैं !! मेरे मायके से आया है !! मायके से एक बटोहिया भी आ जा…
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🌹धरती के श्रृंगार वृक्ष हैं।🌲
वृक्षों के महत्व और इन्हे लगाने, संरक्षित करने आदि पर जन जागरूकता पर एक विशेष प्रस्तुति :-              धरती के श्रृंगार वृक्ष हैं जीवन के आधार वृक्ष हैं यही हमे फल फूल हैं देते रोग व्याधियों को हर लेते इन्हे लगाओ, इन्हे बचाओ रोग दोष संताप मिटाओ।। प्राण वायु हम सबको देते बदले में हमसे क्या लेते इन्…
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*प्रकृति पर संकट*
1.  आज प्रकृति मायूस खड़ी है,       विपदा भरी आन पड़ी है।। 2.  जल जमीन जीवन का नाश,       जीव जंतु खग विहग निराश।। 3.  कूड़ो से पट रही जमीन,      चारों तरफ है पालीथीन।। 4.  कूड़ा कचरा यत्र तत्र है,      शीशा प्लास्टिक सर्वत्र है।। 5.  मिट्टी से घट रही उर्वरा,      बंजर बन जा रही वसुंधरा।। 6.  अंधाध…
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