बरसात की रात !
सावन भादो की अंधेरी रात !! कही मेघा बोल रहे हैं टर टर  कही  झिंगुर  सन सन !! गाँव की गलियों में कुत्ते भौक रहे !! और झाड़ियों में लोमड़ी के भयानक आवाज !! सड़कों पर वही दिख रहे !! जिनको करना है सुबह की रोटी का इंतजाम !! जिनके घर पक्के हैं !! वो सो रहे सुकून की नींद !! जिनके घर घर कच्चे हैं !! ओ जाग …
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“दुनिया"
एक दौर आएगा कल नहीं सही तो कुछ देर आएगा,  एक दौर आएगा कल नहीं सही तो कुछ देर आएगा। लोग जमाने के जो आज लगते अफ़साने से है, अफ़सोस ही होगा उनको मुझसे दूर तलक जाने से। बाते ये मीठी नहीं थोड़ी सी कड़वी है, आपकी भी लगती है पर बताता नहीं हूं, दर्द-ए-दिल बहुत है पर जताता नहीं हूं, चाहत तो बहुत है पर चाहने…
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*माँ सच में हम अब आजाद हैं !!*
हर तरफ खुशियों का माहौल था !! सब खुशियाँ मना रहे थे !! स्वतंत्रता दिवस की बधाईयाँ दे रहे थे !! मिठाईयां बाटी जा रही थी !! हर घर पर तिरंगा सजे थे !! हर गली चौराहा सज रहा था !! एक छोटी सी बच्ची करीब 7 साल की थी !! दरवाजे के पीछे खड़ी सिर बाहर निकाल कर !! माँ के हाथ पकड़े !! माँ से मासुम सा सवाल पुछ…
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*मरना है तो मरो वतन के लिए*
क्यों मरते हो यारों सनम के लिए !! ना देगी दुपट्टा कफ़न के लिए !! मारना है तो मरो “वतन” के लिए  !! तिरंगा” तो मिले कफन के लिए !! धरती पुत्रों की जरुरत है !! भारत देश के शान के लिए !! देना हैं बलिदान तो देना अपने देश के लिए !! मत लगने देना दाग किसी अनजान के लिए !! तुम बैठे हो सरहद पर हमारे लिए !! ह…
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लोग वादें तो हजारों करते है, पर निभाते एक भी नहीं !!
वो शख्स इतना भी अच्छा नहीं था,!! जितना मैंने उसको समझ लिया था !! ये संगदिल लोगों की दुनिया है!!  जरा संभलकर चलना,!! यहाँ पलकों पर बिठाया जाता है!!  नजरों से गिराने के लिए !! कोई नहीं है दुश्मन अपना फिर भी परेशान हूँ मैं,!! अपने ही क्यूँ दे रहे है जख्म इस बात से हैरान हूँ मैं !! मेरी आँखे खुली है और…
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कहाँ डूब गई कश्ती मेरी वफाओं की, क्यूँ मेरी चाहत को कोई किनारा ना मिला.....
उससे ताल्लुक ही कुछ ऐसा रहा है मेरा, की जब भी सोचा उसे तो आँखें भर आयी !! एक बार दीदार कर लो मेरा मेरे चेहरे से कफ़न हटा कर,!! वो आँखे बंद हो गयी है जिन्हे तुम रुलाया करते थे !! कहाँ डूब गई कश्ती मेरी वफाओं की !! क्यूँ मेरी चाहत को कोई किनारा ना मिला !! एक वक्त था जब बातें ही खत्म नहीं होती थी !! आ…
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तू तो रहम कर इस दर्दे दिल पर, बड़ा बेरहम हैं तू भी औरो की तरह.....
ऐ बादल मेरी आँखे तुम ही रख लो...  कसम सें बड़ी माहिर हैं बरसने में.. तुझे लगता है कि तु बहुत बरसता  हैं!! तुझसे ज्यादा मेरी आँखें रोज बरसती हैं !! ना बिजली चमकती है ना बादल गरजता है !! फिर भी लेकिन रोज बरसती हैं !! तु तो बरसात के मौसम में बरसता है !! मेरी आँखो के बरसने का कोई मौसम नहीं !! तु बरसने स…
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कमबख्त दिल तैयार ही नहीं होता उसे भूलने के लिए....
वो अक्सर मुझसे पूछते है !! तुम शायर कैसे बने !! मैं कहती हूँ कुछ आँसू कागज़ पर गिरे और छप गए !! मैं अभी तक समझ ना सकी  तेरे इन फैसलो को ऐ खुदा !! उसके हक़दार हम नहीं या हमारी दुआओ में दम नहीं !! सब कुछ बदला बदला था जब बरसो बाद मिले !! हाथ भी  मीला ना सके वो इतने पराये से लगे !! कमबख्त दिल तैयार ही न…
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*मेरी माटी के अमर लाल*
मेरी माटी के अमर लाल,  तू ही तो है वो कल्पनाथ ! तू ही हो जनक अपने मऊ के। दूरभाष और चपला का जाल विछाया, आलोकित और सूत्रबद्ध किया प्रतिगत पूर्वांचल को। शिक्षालय और आवागमन का भी रखा ध्यान। रोजगार और विकास को तूने अपना लक्ष्य बनाया, बेरोजगारों को हुनर सिखाया। मिलों और अनुसंधान का भी रखा ध्यान। जिससे …
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🔶कहाँ गयी हमारी संस्कृति🔶
पढ़ लिख कर शिक्षित बनने के बजाय और भी गंदगी  फैलता जा रहा हैं समाज में !! माँ बाप अपने बच्चों को पढ़ने के लिए आजकल दुसरे बड़े शहरो में भेज देते हैं !! ऐ सोच कर की हमारे बच्चे पढ़ लिख कर एक काबिल इंसान बनेगें !! एक-एक पैसा जोड़ कर उन्हें भेजते हैं !! खुद भले ही कोई कमी कर लेंगे लेकिन बच्चों की हर ख्…
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कमबख्त दिल तैयार ही नहीं होता उसे भूलने के लिए.....
वो अक्सर मुझसे पूछते है !! तुम शायर कैसे बने !! मैं कहती हूँ कुछ आँसू कागज़ पर गिरे और छप गए !! मैं अभी तक समझ ना सकी तेरे इन फैसलो को ऐ खुदा !! उसके हक़दार हम नहीं या हमारी दुआओ में दम नहीं !! सब कुछ बदला बदला था जब बरसो बाद मिले !! हाथ भी मीला ना सके वो इतने पराये से लगे !! कमबख्त दिल तैयार ही नही…
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पितृ-दिवस..…
दिया रूप, आकार, और आधार, धरा-पावन पर। बुद्धि, रिद्धि-सिद्धि, संयुत, कर के, खड़ा किया, पावन पर  पी मेरे संताप और परिताप, सकल जीवन का। किया न पश्चाताप, मान अभिशाप, दग्ध-जीवन का। आज समृद्धि, समाज-साज, सुख-साज भरा, यह जीवन। नहीं कहीं अवसाद, मुरादें पूरित पिये सजीवन।  किया असंभव संभव जिसने, पूज्य पिता ह…
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पत्नी और आधुनिक प्रेमिका में अंतर...…
पत्नी है  जहां, संगठन है, प्रियतमा जहां, विघटन होगा। खिलते परिवार, पत्नियों संग, प्रेमिका, न चैन, घुटन होगा। चलनी के, छेद हजारों में, पत्नी पाती, पति परमेश्वर। निज बेटी-बेटा, सास-ससुर, में रमी, पा रही जगदीश्वर। वैज्ञानिक बेटा, बना रही, बेटी बन रही, किरण बेदी। पति सत्यवान को छुड़ा रही, जो जा पहुंच…
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🔶 *खून का रंग सफेद* 🔶
कैसे खून का रंग सफेद हो गया रिस्तो में !! गैरो की तो बात छोड़ो आजकल तो अपनो में  !! पैसा क्यों इतना जरुरी हो गया !! हर रिस्ते को निगल गया !! माँ बाप भाई बहन खुन के रिस्ते हल्के हो गये !! सब पर भारी हो गया धन दौलत और पैसे !! वृद्धआश्रम बनाने वालों ने अच्छा किया !! वरना जानवरों की तरह जाने कितने माँ …
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हम लड़ेंगे हर सुनहरे सपनों के लिए
हम लडेंगे हर उदास, ऊचाॅट, मनहूस और मुर्दापरस्त मौसम के खिलाफ, अपने हसीन रंगीन ख़्वाबों, ख़्वाहिशों, और हर सुनहरे सपनों के लिए।  हम लडेंगे हर काले, घने, गहरे, घुप्प गर्दो-गुबार से सने हर अंधेरे के खिलाफ, एक-एक कतरे उजालों और अपनी सूरमयी, सुहावनी और  सिन्दूरी सुबहों के लिए।  हम लडेंगे हर नफरती, बदबूॅ…
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सोचा बहुत
फ़िर सोचा की लौट आऊं दुनिया की तरफ  या  खुदा ये क्या गुनाह सोचा हमने ??? ख्वाबों के संघर्षो की भूमि से  रिश्तों की  बंजर भूमि पर  फ़िर.. लौट आने को आखिर सोचा भी कैसे ? ये रंगीन जो दिखती है दुनिया  कितनी बेरंग है भीतर से  हँस दूँ खुल के  गर मैं ...... महफिल में तो  जाने कितने तौहमते लगाती है ? और कहती…
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