प्यारे गुरु की महानता
गहन तिमिर को दूर कर, ले जाते हैं प्रकाश-पुंज की ओर गुरु। भटके हुए शिष्य की अंगुली पकड़, शूल पर चलना सिखाते हैं गुरु। शिष्य के अज्ञानता को, ज्ञानवर्धक बना देते हैं गुरु। ज्ञान से जड़ चेतन को मजबूत बना, भविष्य को सुनहरा बनाते हैं मात- पिता व गुरु। चुनौतीयों से भरे जीवन को, उज्ज्वल भविष्य का मार्ग दिखात…
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अब झंडे में नहीं झलकता जनता का दर्द.....
हजारों पंजीकृत राजनीतिक दल, और जितने तरह के राजनीतिक दल  उतने तरह के लाल, पीले, नीले, हरे  एक रंगी, द्विरंगी और बहुरंगी झंडे  पर किसी झंडे में, न तो जनता का दर्द दिखाई देता है,  न आम जनमानस की आम समस्याएं।  आज हर झंडे बबहुराष्ट्रीय कम्पनियो के विज्ञापन की तरह हो गये हैं, आज झंडे में झलकने लगी हैं…
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मेरे प्यारे प्रियतम !
मैंने टूट-टूट कर किया है, तुम रूठे हो! तुम्हारी मर्जी, पर प्यार मैंने तुमसे अटूट किया है। दिल तडपता ही रहता हैं, बिना थके और बिना हारे  तुम्हारी बेरूखी, बेरहमी तुम्हारी बेदर्दी और तुम्हारी बेवफाई की कोख़ से उपजे   हर जख्म, हर दर्द और कभी-कभी खुशी के हसींन लम्हे  मैंने अपने दिल की खूबसूरत अलमारियो…
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छिलका की व्यथा कथा--
मैं छिलका हूँ  कभी जाना है आपने, मेरी व्यथा कथा, मेरी पीड़ा, मेरा दुःख दर्द, सेव हो, अनार हो, आम हो, संतरा हो  या चिनिया बादाम के नाम से मशहूर  मूंगफली हो, या और कोई मौसमी फल, छिलकर या दाॅत से चिचोडकर, फेंक दी जाती हूँ कूड़ेदान में। तथाकथित सभ्य, सुसंस्कृत  रसूखदार ओहदेदार, और शहरी मिज़ाज के लोग  मु…
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ओढ़कर धानी चुनरिया
ओढ़कर धानी चुनरिया वर्षा  की  बूंदों  ने, धरा  का  किया  श्रृंगार । ओढ़कर धानी चुनरिया, धरा हुई खुशहाल। रिमझिम रिमझिम बरखा से, धरा में उठी उमंग। वन उपवन भी महक उठे, हरियाली के संग। चाहूँ ओर लहरा रहे, खेत और खलियान। मानो ऐसा लग रहा, मिली पिया से आज। अम्बर कलेजा चीर कर, बरसाये प्यार की बौछार। सावन की ऋ…
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सुमन हिय के खिल गए
सावन की रिमझिम झड़ी लगी है, हरी चुनरिया ओढे खड़ी है। सुमन हिय के खिल गए हैं, मानो तन मन को महका रही है। हाथों में चूड़ी खनक रही है, माथे पे बिंदिया चमक रही है। लगाके देखो प्रेम की मेहंदी, पिया के नेह की रच रही है। सिन्दारों की झड़ी लगी  है, घेवर, गुंझिया, खूब सजी हैं। तीजों के दिन मेलों में, नारी की दे…
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मै गुठली हूँ पर मैं भी जीता जागता जिन्दा जीव हूँ।
मै गुठली हूँ पर मै भी जीता जागता जिन्दा जीव हूँ, आम,आंवला, इमली या जामुन की हो  या बेशकीमती छुहारा की हो, चूस कर, चबाकर और खा-पचाकर   फेंक दी जाती हूँ,   वह भी बेमुरूव्वत बेगैरत बडी हिकारत से, हर कोई बडी बेवफाई से, बडे तिरस्कृत भाव से, आने-कोने-अतडे या  फिर कूडेदान में, या कोई गन्दी जगह देखकर,  या …
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समय की धारा
समय की धारा बह रही है हर पल, कुछ बीत गया, कुछ आने वाला है कल। फिसल रही है रेत सी यूँ जिंदगी, बदरंग हो चली  है सारी जमीं। छूट रहा है वो समां जाने किधर, समय की धारा बह रही है हर पल। पल दो पल चल रही यूँ जिंदगी, तीव्र हो रही है समय की गति। छूट रहा है वो समां जाने किधर, समय की धारा बह रही है हर पल। मोल …
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कब बरसोगे मेघा प्यारे
उमड़ घुमड़ कर बदरा आये, धरा तुम्हे पुकारे। रिमझिम वर्षा की बूंदों से, धरा की प्यास बुझा रे। चहुँ ओर घटा हैं छाये, अब  ना यूँ तरसा रे। सूख गए हैं ताल, तालिया, हम तेरी राह निहारे। तुम बिन खेत खलियान हैं सूखे, कृषक की आस तिहारे। भूख प्यास से हो रहे व्याकुल, अब ना तू तरसा रे। सूरज देव आग का गोला, झुलस गए…
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मरना मेरी नियति नहीं है।
युगो युगो का अमर पथिक हूँ,  मरना मेरी नियति नहीं है । कुरूक्षेत्र का अर्जुन हूँ मैं, हल्दीघाटी का राणा हूँ, रख शीश हथेली पर निकला हूँ, शीश झुकाना नियति है । मरना मेरी नियति नहीं है।  अमर कोख का अमर पुत्र हूँ, परमपिता का चरम सुत्र हूँ, तपोभूमि की तपश्चर्या का ताप लिए, जलते अंगारों पर तपकर निकला हू…
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हम रोज जहर पीते हैं फिर भी नीले नहीं होते.....
एकबार विष पीकर नीलकंठ हो गये थे शिव, हम रोज़ जहर पीते हैं फिर भी नीले नहीं होते। अब नहीं बरसती हैं उसकी जुल्फ़े घटा बनकर, इसलिए बारिश की बूँदों से भी हम गीले नहीं होते। उसके दिए जख्मों को बहुत सहेज कर रक्खा है, हर दिल की किस्मत में हर मौसम रंगीले नहीं होते।  चलेंगे साथ हर सफ़र में तोता-मैने की तरह…
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खुशियों के पल
यदि चाहते हो खुशी के पलों को तो  वो तुमको खुद ही अंतर्मन में तलाशने होंगे कभी बेवजह मुस्कुरा कर के देखो खुशी के पल हर पल संग होंगे कभी भूखे को रोटी खिला कर के देखो खुशियों की महक से महक हम उठेंगे  कभी बेवजह .... कभी रोते बच्चे को हंसा करके देखो इंद्रधनुष से सतरंगी सपने संग होंगे कभी बेवजह.... कभी…
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बरसो मेघा प्यारे
आओ रे ..बरसो मेघा प्यारे, घुमड़ घुमड़ कर बदरा कारे। धरा तपिश से हो रही व्याकुल, वन उपवन वर्षा को आतुर। ठंडी ठंडी वर्षा की बूंदों से, भूमि को तुम शीतल कर दो। आओ रे .... तुम बिन खेत खलियान हैं सूखे, क्यों तुम हो कृषक से रूठे?? ढूंढ रही हैं प्यासी अखियाँ, इन अखियों की प्यास बुझा दो। आओ रे ..... चातक, पक…
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प्रतिज्ञा
दृढ़ निश्चय बस यही है मेरा, प्रतिज्ञा लेती हूँ आज। सत्य मार्ग पर चलकर, मरते दम तक दूँ मैं साथ। माना सत्य मार्ग पर चलना इतना नही आसान। जब मन में मैंने ठान लिया है, हमेशा करूंगी सम्मान। अन्याय नही होने दूँगी, इसका भी है भान। बहन बेटियों के दामन में, लगने नही दूँगी दाग। मात पिता की सेवा से निःस्वार्थ र…
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मंथन
इतने कठिन समय मे मुझसे प्रेम गढ़ा ना जायेगा, ना ही प्रेम की बातें होंगी ना ही प्रेम बुना यूं  जायेगा। कोई प्रेम की बातें जो करे अच्छी नहीं लगती इस पल, प्रेम भी जब लगता अच्छा जब अपने सभी खुशी से हो। ये ना हो कोई जिये दर्द में कोई अपनी मस्ती में पागल हो, दर्द सभी के मिट जाये जो धरा पर सुकून बयार हो…
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