बलिया। जिला चिकित्सालय बलिया के वरिष्ठ हड्डी रोग विशेषज्ञ डॉ. कर्ण सिंह चौहान (के. एस. चौहान) ने एक विशेष भेंटवार्ता में बातचीत करते हुए कहा कि वर्तमान समय में हड्डियों और जोड़ों से जुड़ी समस्याएं तेजी से बढ़ रही हैं। पहले जहां इन रोगों को बढ़ती उम्र से जोड़कर देखा जाता था, वहीं अब युवा वर्ग भी हड्डी, जोड़ों, रीढ़ और खेल संबंधी चोटों की समस्याओं से प्रभावित हो रहा है।
डॉ. चौहान ने बताया कि हड्डी टूटना, घुटनों का दर्द, कमर और गर्दन की समस्या, कंधे और कूल्हे के जोड़ों में दर्द, रीढ़ (स्पाइन) संबंधी विकार, खेल के दौरान लगने वाली चोटें, लिगामेंट और टेंडन की क्षति तथा ऑस्टियोपोरोसिस जैसी बीमारियां आज आम होती जा रही हैं। इसके पीछे अनियमित जीवनशैली, शारीरिक श्रम की कमी, पौष्टिक भोजन का अभाव, मोटापा और लंबे समय तक एक ही स्थिति में बैठे रहने की आदत प्रमुख कारण हैं।
उन्होंने कहा कि बढ़ती उम्र के साथ शरीर की हड्डियों का घनत्व कम होने लगता है, जिससे हड्डियां कमजोर हो जाती हैं और मामूली चोट लगने पर भी फ्रैक्चर की संभावना बढ़ जाती है। विशेष रूप से महिलाओं में रजोनिवृत्ति के बाद कैल्शियम की कमी के कारण हड्डियों की कमजोरी अधिक देखने को मिलती है।
डॉ. चौहान के अनुसार घुटनों और कमर के दर्द को सामान्य समझकर नजरअंदाज करना उचित नहीं है। कई बार शुरुआती दर्द भविष्य में गंभीर बीमारी का संकेत हो सकता है। यदि दर्द लगातार बना रहे, चलने-फिरने में कठिनाई हो, सूजन आए या शरीर के किसी अंग की गतिविधि प्रभावित हो रही हो तो तत्काल विशेषज्ञ चिकित्सक से परामर्श लेना चाहिए।
उन्होंने बताया कि खेलकूद के दौरान होने वाली चोटों में लिगामेंट और टेंडन की समस्या सबसे अधिक देखने को मिलती है। ऐसी स्थिति में बिना चिकित्सकीय सलाह के मालिश या घरेलू उपचार करने से बचना चाहिए। उचित जांच और समय पर उपचार से रोगी शीघ्र स्वस्थ हो सकता है तथा भविष्य में होने वाली जटिलताओं से बच सकता है।
सावधानियों पर विशेष जोर देते हुए डॉ. चौहान ने कहा कि :-
- प्रतिदिन कम से कम 30 मिनट नियमित व्यायाम करें।
- कैल्शियम और विटामिन-डी युक्त संतुलित आहार लें।
- धूप का सेवन करें, जिससे शरीर में विटामिन-डी की पूर्ति हो सके।
- अत्यधिक वजन बढ़ने से बचें।
- लंबे समय तक एक ही मुद्रा में बैठकर कार्य न करें।
- चलते समय सही शारीरिक मुद्रा बनाए रखें।
- धूम्रपान और नशे से दूर रहें।
- खेलकूद के दौरान सुरक्षा उपकरणों का उपयोग करें।
- बुजुर्ग लोग घर में फिसलन और गिरने से बचाव के उपाय अवश्य करें।
उन्होंने कहा कि स्वस्थ हड्डियां ही स्वस्थ जीवन की आधारशिला हैं। यदि लोग समय रहते अपने स्वास्थ्य के प्रति जागरूक हो जाएं और चिकित्सकीय सलाह का पालन करें तो हड्डी एवं जोड़ों से संबंधित अधिकांश समस्याओं से बचा जा सकता है।
अंत में डॉ. के. एस. चौहान ने जनपदवासियों से अपील की कि हड्डी, जोड़ों या रीढ़ से जुड़ी किसी भी समस्या को हल्के में न लें और समय पर विशेषज्ञ चिकित्सक से परामर्श लेकर उचित उपचार कराएं। जागरूकता, संतुलित आहार, नियमित व्यायाम और समय पर चिकित्सा ही स्वस्थ एवं सक्रिय जीवन का मूल मंत्र है।

