उत्तर प्रदेश स्थापना दिवस : भारतीय संस्कृति, संघर्ष और समृद्धि की अमर भूमि


उत्तर प्रदेश स्थापना दिवस हर वर्ष हमें उस ऐतिहासिक क्षण की याद दिलाता है, जब भारत के हृदयस्थल कहे जाने वाले इस महान प्रदेश को एक स्वतंत्र प्रशासनिक पहचान प्राप्त हुई। यह दिन केवल एक राज्य के गठन का उत्सव नहीं है, बल्कि उस सांस्कृतिक, सामाजिक और ऐतिहासिक विरासत का सम्मान है, जिसने सदियों से भारत की आत्मा को दिशा दी है। उत्तर प्रदेश ने अपनी धरती पर धर्म, दर्शन, राजनीति और राष्ट्रनिर्माण की अनगिनत गाथाओं को जन्म दिया है।

स्वतंत्रता के बाद भारत को एक मजबूत संघीय ढांचे में ढालने की प्रक्रिया शुरू हुई। इसी क्रम में 24 जनवरी 1950 को तत्कालीन संयुक्त प्रांत को नया नाम उत्तर प्रदेश दिया गया। यह नाम देश के उत्तरी भूभाग में स्थित इस विशाल क्षेत्र की भौगोलिक और सांस्कृतिक पहचान का प्रतीक बना। इसके साथ ही उत्तर प्रदेश भारतीय गणराज्य के एक महत्वपूर्ण स्तंभ के रूप में स्थापित हुआ।

उत्तर प्रदेश की पहचान उसकी आध्यात्मिक और सांस्कृतिक विरासत से जुड़ी है। अयोध्या में भगवान श्रीराम की जन्मभूमि, मथुरा में श्रीकृष्ण की लीला भूमि, काशी में भगवान शिव की नगरी और प्रयागराज में त्रिवेणी संगम—ये सभी स्थल न केवल धार्मिक आस्था के केंद्र हैं, बल्कि भारतीय सभ्यता की जीवंत धरोहर भी हैं। बुद्ध की शिक्षाओं की भूमि सारनाथ ने विश्व को अहिंसा और करुणा का संदेश दिया।

स्वतंत्रता संग्राम में उत्तर प्रदेश की भूमिका अतुलनीय रही है। मंगल पांडेय से लेकर चंद्रशेखर आज़ाद तक, पंडित मदन मोहन मालवीय, जवाहरलाल नेहरू और लाल बहादुर शास्त्री जैसे महान नेताओं ने इसी धरती से देश को नई दिशा दी। आज़ादी की लड़ाई में यहाँ के जन-जन ने त्याग, बलिदान और संघर्ष की अद्भुत मिसाल पेश की।

लोकतांत्रिक दृष्टि से उत्तर प्रदेश भारत का सबसे प्रभावशाली राज्य रहा है। संसद में सर्वाधिक प्रतिनिधित्व, देश को सबसे अधिक प्रधानमंत्री देने का गौरव और सक्रिय राजनीतिक चेतना इस प्रदेश की पहचान है। यहाँ की सामाजिक विविधता और लोकतांत्रिक सहभागिता भारतीय लोकतंत्र को मजबूती प्रदान करती है।

कृषि के क्षेत्र में उत्तर प्रदेश देश के अग्रणी राज्यों में शामिल है। गंगा-यमुना के उपजाऊ मैदानों ने इसे अन्न का भंडार बनाया है। साथ ही शिक्षा, साहित्य, कला, संगीत और शिल्प की समृद्ध परंपरा ने प्रदेश को सांस्कृतिक रूप से सशक्त किया है। लखनऊ की तहज़ीब, बनारस की विद्वत्ता और ब्रज की लोकसंस्कृति इसकी पहचान को और गहराई देती हैं।

उत्तर प्रदेश स्थापना दिवस हमें अतीत पर गर्व करने के साथ-साथ भविष्य के प्रति उत्तरदायित्व का बोध भी कराता है। एक ऐसे प्रदेश के निर्माण का संकल्प, जो विकास, सुशासन, सामाजिक न्याय और सांस्कृतिक मूल्यों के साथ आगे बढ़े। आज का उत्तर प्रदेश आधुनिकता और परंपरा के संतुलन के साथ नए भारत के निर्माण में अपनी निर्णायक भूमिका निभा रहा है।

स्थापना दिवस के इस पावन अवसर पर उत्तर प्रदेश की गौरवशाली विरासत को नमन करते हुए उसके उज्ज्वल, समृद्ध और सशक्त भविष्य की कामना करना ही इस दिवस का वास्तविक संदेश है।


डॉ. निर्भय नारायण सिंह, एडवोकेट✍️ 

पूर्व अध्यक्ष, फौजदारी अधिवक्ता संघ, बलिया (उ.प्र.)








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