यूपी के बंटवारे की चर्चा फिर तेज, पूर्वांचल राज्य की मांग ने पकड़ा जोर


*28 जिलों वाला नया राज्य! पूर्वांचल को अलग करने की मांग ने पकड़ा जोर*

उत्तर प्रदेश के बंटवारे की सुगबुगाहट एक बार फिर राजनीतिक गलियारों में तेज हो गई है। पूर्वांचल को अलग राज्य बनाए जाने की मांग तब और मजबूत हो गई, जब भारतीय जनता पार्टी के दो दिग्गज नेताओं ने खुले मंच से इस विषय पर अपनी स्पष्ट राय रखी। अमेठी में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान पूर्व केंद्रीय मंत्री डॉ. संजय सिंह और पूर्व मंत्री डॉ. अमीता सिंह ने उत्तर प्रदेश के विभाजन की आवश्यकता पर जोर देते हुए पूर्वांचल को अलग राज्य का दर्जा देने की वकालत की।

नेताओं का तर्क है कि उत्तर प्रदेश देश का सबसे अधिक आबादी वाला और भौगोलिक रूप से अत्यंत विशाल राज्य है, जिसे एक ही प्रशासनिक ढांचे से प्रभावी ढंग से संचालित करना बेहद चुनौतीपूर्ण हो गया है। डॉ. संजय सिंह के अनुसार, इतने बड़े प्रदेश में शासन-प्रशासन आम जनता से दूर हो जाता है, जिससे विकास योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक नहीं पहुंच पाता। छोटे राज्य होने से प्रशासन अधिक संवेदनशील और जवाबदेह बनता है तथा विकास कार्यों की निगरानी भी बेहतर तरीके से हो पाती है।

डॉ. अमीता सिंह ने कहा कि पूर्वांचल संसाधनों के मामले में किसी भी तरह से कमजोर नहीं है। यहां उपजाऊ कृषि भूमि, बिजली उत्पादन की पर्याप्त संभावनाएं और अयोध्या व काशी जैसे विश्वविख्यात धार्मिक एवं पर्यटन स्थल मौजूद हैं। इसके बावजूद यह क्षेत्र पलायन, बाढ़, शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी जैसी गंभीर समस्याओं से जूझ रहा है। उनका मानना है कि अलग राज्य बनने से इन स्थानीय मुद्दों का समाधान प्राथमिकता के आधार पर संभव हो सकेगा।

पूर्वांचल राज्य के प्रस्तावित स्वरूप में उत्तर प्रदेश के कुल 8 मंडलों के 28 जिलों को शामिल करने की बात कही जा रही है। इसमें वाराणसी मंडल के वाराणसी, चंदौली, जौनपुर और गाजीपुर; आजमगढ़ मंडल के आजमगढ़, मऊ और बलिया; प्रयागराज मंडल के प्रयागराज, कौशाम्बी और प्रतापगढ़; मिर्जापुर मंडल के मिर्जापुर, सोनभद्र और भदोही; अयोध्या मंडल के अयोध्या, अंबेडकर नगर, सुल्तानपुर और अमेठी; देवीपाटन मंडल के गोंडा, बलरामपुर, बहराइच और श्रावस्ती; गोरखपुर मंडल के गोरखपुर, महाराजगंज, देवरिया और कुशीनगर तथा बस्ती मंडल के बस्ती, सिद्धार्थनगर और संत कबीर नगर शामिल हैं।

यदि यह मांग हकीकत में बदलती है, तो लगभग 7 करोड़ 98 लाख की आबादी के साथ प्रस्तावित पूर्वांचल राज्य देश का 14वां सबसे बड़ा राज्य बन सकता है। इस नए राज्य के लिए ‘पूर्वांचल’ नाम सबसे अधिक प्रचलित बताया जा रहा है, जो क्षेत्र की सांस्कृतिक, सामाजिक और भाषाई पहचान को भी दर्शाता है।

फिलहाल यह मुद्दा एक बार फिर सियासी बहस के केंद्र में आ गया है। अब देखना यह होगा कि पूर्वांचल राज्य की यह पुरानी मांग राजनीतिक सहमति और संवैधानिक प्रक्रिया के जरिए आगे बढ़ पाती है या एक बार फिर चर्चा तक ही सीमित रह जाती है।



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