अपनी खुशियों का रिमोट दूसरों के हाथ में न दें, आत्मनिर्भर बनें : जया किशोरी


भागवत कथा के चौथे दिन कथावाचिका ने दिया कर्म, पारिवारिक सामंजस्य और आत्मनिर्भरता का संदेश; भजनों पर झूमे श्रद्धालु

बलिया। छोड़हर गांव स्थित श्रीराम जानकी मंदिर परिसर में आयोजित सात दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा के चौथे दिन शनिवार को प्रसिद्ध कथावाचिका जया किशोरी ने श्रद्धालुओं को कर्म, आत्मनिर्भरता और पारिवारिक सामंजस्य का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि दूसरों पर निर्भर रहना ही दुख का सबसे बड़ा कारण है। आपकी जरूरत और आपकी खुशी दोनों आपकी अपनी जिम्मेदारी हैं, फिर इसके लिए किसी दूसरे पर निर्भर क्यों रहना? अपनी खुशियों का रिमोट दूसरों के हाथ में कभी न दें। जीवन में खुश रहना है तो स्वयं को मजबूत बनाना होगा और अपनी जिम्मेदारियों को समझना होगा।

इसके पूर्व परिवहन मंत्री दयाशंकर सिंह के भाई धर्मेन्द्र सिंह, अनुज सरावगी एवं हर्ष श्रीवास्तव ने विधि-विधान से व्यासपीठ का पूजन-अर्चन किया। इसके बाद कथा का शुभारंभ हुआ। जया किशोरी के मुखारविंद से निकले प्रेरक प्रसंगों को सुनकर श्रद्धालु भावविभोर होते रहे।


कथावाचिका ने पारिवारिक जीवन में आपसी सामंजस्य और जिम्मेदारियों के बंटवारे पर विशेष जोर देते हुए कहा कि सामंजस्य सिखाने की सबसे अधिक जरूरत बेटों को है। समाज में अक्सर काम का बंटवारा इस आधार पर कर दिया जाता है कि यह काम पुरुष करेगा और वह काम महिला, जबकि घर के सभी सदस्यों को हर तरह के काम आने चाहिए। घर-परिवार की जिम्मेदारी किसी एक व्यक्ति की नहीं, बल्कि सभी की साझा जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि सफलता के लिए परिवार का साथ और परिवार की खुशियां सबसे अधिक महत्वपूर्ण हैं।

उन्होंने घर की वास्तविक परिभाषा समझाते हुए कहा कि घर वह होता है, जहां पहुंचने पर सुकून और शांति मिले। ऐसा नहीं होना चाहिए कि घर जाने का नाम सुनते ही मन खराब होने लगे। यदि किसी परिवार में ऐसी स्थिति है तो सदस्यों को आपस में बैठकर बातचीत करनी चाहिए और समस्याओं का समाधान निकालना चाहिए। आपसी संवाद और समझदारी से ही परिवार में प्रेम और सामंजस्य कायम रह सकता है।


जया किशोरी ने जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने की जिम्मेदारी स्वयं उठाने की सीख देते हुए कहा कि डॉक्टर मरीज को दवा तो दे सकता है, लेकिन दवा खाना मरीज को ही पड़ता है। इसी तरह प्रेरक वक्ता और धर्मगुरु भी लोगों को अच्छी बातें समझा सकते हैं, सही रास्ता दिखा सकते हैं, लेकिन उन बातों को अपने जीवन में उतारना प्रत्येक व्यक्ति की अपनी जिम्मेदारी है। केवल अच्छी बातें सुनने से जीवन नहीं बदलता, बल्कि उन पर अमल करने से बदलाव आता है।

उन्होंने आध्यात्मिक प्रसंग के माध्यम से कहा कि जीवन में यदि विष आया है तो शिव भी आएंगे। इसलिए विपरीत परिस्थितियों में घबराने के बजाय धैर्य, विश्वास और सकारात्मक सोच के साथ आगे बढ़ना चाहिए। जीवन में आने वाली कठिनाइयां इंसान को मजबूत बनाने का माध्यम भी बन सकती हैं।


कथा के दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ी रही। पंडाल में भक्तों का उत्साह देखते ही बन रहा था। जया किशोरी के भजनों और भक्ति गीतों पर श्रद्धालु झूमते तथा भक्ति में सराबोर नजर आए। पूरा कथा परिसर भक्तिमय वातावरण से गूंजता रहा।

अविनाश तिवारी "गोलू" ✍️