युवा आंदोलन के नाम पर,
चली आंदोलनो की आंधी है।
बगल में अपने हम सब ने,
देखी इनकी स्वघोषित कामयाबी है।
यहाँ भी कुछ लोग,
रुख अपना दिखा रहे,
उनको लगता वह सभी को,
नई राह सिखा रहे।
उनको यह शायद भान नहीं!
परिणाम इसका होता क्या।
अनुचित राह सदा,
पथिक को गुमराह करती है,
मंजिल तक नहीं पहुंचती है।
परिणाम जब आता है तो,
यह चाह को दुष्कर करती है।।
यहां संस्कार हमारी थाती हैं,
इसके निर्वहन की अब हमारी बारी है।
हम जब करते इसका सम्मान,
तब यह बढ़ाता हमारा मान, साथ कराता हम सभी का कल्याण।
जब देश हमारा युवा हो,
दायित्वान भी अधिक युवा हो।
पथ भटक नहीं सकता वह,
दोष नहीं मढ़ सकता वह।
संस्कारों से विमुख नहीं हो सकता वह,
बहकावे में नहीं आ सकता वह।
वह तो हमारी शान है,
देश का अभिमान है ।।
लोकतंत्र में वाक स्वतंत्रता मिली है सभी को,
लेकिन सीमा का भी रखना होगा मान।
तभी तो बढ़ेगा अपने साथ देश का सम्मान।
रहता जिसका हमें सदा अभिमान,
इसके लिए संस्कारों का करना होगा ध्यान।।
प्रगति हमारी कुछ देश-व्यक्ति को खटक रही,
कैसे हम आगे निकल रहे,
अवरोध के लिए वह तरस रहे।
यह बात जब हमें भी पता चली,
तभी से हमने भी नई चाल चली ।।
लोकतंत्र में विरोध दर्ज कराने की,
स्वस्थ्य परम्परा अपनाने की,
बड़ो को मान दिलाने की,
अपना सम्मान बढ़ाने की,
रही सदा परिपाटी है,
यही हमारी थाती है।
जो करेंगें इसका सम्मान,
उसका कभी नहीं होगा अपमान।
आंदोलन की भी मार्यादा होती है।
देश में अपने अराजकता की कोई जगह नहीं,
मान नहीं-सम्मान नहीं।
आंदोलनों में जो होता है,
सर्वत्र आज-कल दिख जाता है,
आंदोलन जो अपना रूप दिखाता है,
निष्कर्ष उसी पर निकाला जाता है।।
प्रगति विरोधी आंदोलन में न ढील दें,
प्रशासन को यह सीख दें।
राह विमुख लोगों को,
मुख्य धारा में आने की रणनीति दें।
संस्कार हमारी थाती हैं,
इसके निर्वहन की हमारी परिपाटी है।।
👇
राजेश कुमार सिंह ✍️
मऊ, उत्तर प्रदेश
9415367382
9838104950

