डेंगू आज विश्व के अनेक देशों के लिए एक गंभीर जनस्वास्थ्य चुनौती बन चुका है। तेजी से बढ़ते शहरीकरण, जलवायु परिवर्तन, अनियोजित जल निकासी व्यवस्था तथा लोगों में जागरूकता की कमी के कारण डेंगू के मामले लगातार बढ़ रहे हैं। इसी खतरे के प्रति लोगों को जागरूक करने तथा बचाव के उपायों को जन-जन तक पहुंचाने के उद्देश्य से प्रतिवर्ष 15 जून को विश्व डेंगू दिवस मनाया जाता है। यह दिवस हमें याद दिलाता है कि डेंगू से बचाव केवल सरकारी प्रयासों से नहीं, बल्कि समाज के प्रत्येक व्यक्ति की सहभागिता से ही संभव है।
डेंगू एक वायरल रोग है, जो संक्रमित एडीज एजिप्टी (Aedes Aegypti) मच्छर के काटने से फैलता है। यह मच्छर मुख्य रूप से दिन के समय काटता है तथा साफ और रुके हुए पानी में पनपता है। घरों के आसपास रखे गमले, कूलर, टायर, पानी की टंकियां, टूटे बर्तन और अन्य जलभराव वाले स्थान इसके प्रजनन के प्रमुख केंद्र बन जाते हैं। यही कारण है कि डेंगू की रोकथाम के लिए स्वच्छता और जलभराव पर नियंत्रण अत्यंत आवश्यक है।
डेंगू के लक्षण सामान्य बुखार से भिन्न हो सकते हैं। तेज बुखार, सिरदर्द, आंखों के पीछे दर्द, मांसपेशियों और जोड़ों में तीव्र पीड़ा, शरीर पर लाल चकत्ते, कमजोरी तथा उल्टी इसके प्रमुख लक्षण हैं। गंभीर स्थिति में रोगी के शरीर में प्लेटलेट्स की संख्या कम हो सकती है, जिससे रक्तस्राव का खतरा बढ़ जाता है। समय पर उपचार न मिलने पर यह जानलेवा भी साबित हो सकता है। इसलिए किसी भी प्रकार के लक्षण दिखाई देने पर तुरंत चिकित्सकीय सलाह लेना आवश्यक है।
विशेषज्ञों के अनुसार डेंगू का कोई निश्चित एंटीवायरल उपचार उपलब्ध नहीं है, इसलिए बचाव ही इसका सबसे प्रभावी उपाय है। लोगों को चाहिए कि वे अपने घरों और आसपास कहीं भी पानी जमा न होने दें। कूलर, गमले और पानी की टंकियों की नियमित सफाई करें तथा उन्हें ढककर रखें। पूरी बांह के कपड़े पहनें, मच्छरदानी का प्रयोग करें और मच्छररोधी क्रीम या स्प्रे का उपयोग करें। सामुदायिक स्तर पर स्वच्छता अभियान चलाकर भी डेंगू के प्रसार को काफी हद तक रोका जा सकता है।
विश्व डेंगू दिवस का मुख्य उद्देश्य लोगों में यह समझ विकसित करना है कि डेंगू केवल एक स्वास्थ्य समस्या नहीं, बल्कि सामाजिक जिम्मेदारी का विषय भी है। जब तक प्रत्येक नागरिक अपने घर, मोहल्ले और आसपास के वातावरण को स्वच्छ रखने का संकल्प नहीं लेगा, तब तक डेंगू पर प्रभावी नियंत्रण संभव नहीं होगा। विद्यालयों, महाविद्यालयों, सामाजिक संगठनों और स्वास्थ्य विभागों को मिलकर जनजागरूकता कार्यक्रम आयोजित करने चाहिए ताकि अधिक से अधिक लोग इस बीमारी और उसके बचाव के उपायों से परिचित हो सकें।
वर्तमान समय में आधुनिक चिकित्सा सुविधाओं और जनजागरूकता अभियानों के कारण डेंगू से होने वाली मृत्यु दर में कमी आई है, लेकिन खतरा अभी भी पूरी तरह समाप्त नहीं हुआ है। बदलते मौसम और बढ़ती आबादी के बीच डेंगू नियंत्रण के लिए सतत प्रयास आवश्यक हैं। प्रत्येक व्यक्ति का छोटा-सा प्रयास, जैसे सप्ताह में एक दिन घर और आसपास की सफाई करना, डेंगू के खिलाफ एक बड़ी लड़ाई को मजबूत बना सकता है।
विश्व डेंगू दिवस हमें यह संदेश देता है कि स्वस्थ समाज के निर्माण के लिए जागरूकता, स्वच्छता और सामूहिक प्रयास अत्यंत आवश्यक हैं। आइए, हम सभी मिलकर यह संकल्प लें कि अपने घर, परिवार और समाज को डेंगू मुक्त बनाने के लिए हर संभव प्रयास करेंगे। यही इस दिवस की सार्थकता और सच्ची श्रद्धांजलि होगी।
"हर रविवार, डेंगू पर वार — पानी जमा न होने दें बार-बार।"
"स्वच्छता अपनाएं, मच्छरों को भगाएं और डेंगू मुक्त भारत बनाएं।"
डॉ. संतोष कुमार सिंह ✍️
फिजिशियन, बलिया



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