बलिया : देश को चंद्रशेखर जैसी निर्भीक पत्रकारिता की जरूरत : अरविंद मोहन


जन्मशताब्दी वर्ष पर आयोजित राष्ट्रीय संगोष्ठी में वक्ताओं ने याद किए पूर्व प्रधानमंत्री चंद्रशेखर के विचार और पत्रकारिता के मूल्य

बलिया। पूर्व प्रधानमंत्री एवं प्रखर समाजवादी नेता स्वर्गीय चंद्रशेखर की जन्मशताब्दी वर्ष के अवसर पर गुरुवार को नगर के ऐतिहासिक टाउन हॉल में एक भव्य राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन किया गया। जिले के पत्रकारों द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम में देशभर से आए वरिष्ठ पत्रकारों, शिक्षाविदों और समाजसेवियों ने चंद्रशेखर की पत्रकारिता, विचारधारा और राजनीतिक जीवन पर विस्तार से चर्चा की। कार्यक्रम में वक्ताओं ने कहा कि आज के दौर में देश को चंद्रशेखर जैसे निर्भीक, वैचारिक और जनपक्षधर पत्रकारों एवं नेताओं की सबसे अधिक आवश्यकता है।

कार्यक्रम के मुख्य वक्ता वरिष्ठ पत्रकार अरविंद मोहन ने कहा कि चंद्रशेखर की पत्रकारिता ने देश में एक नई वैचारिक लकीर खींची थी। उन्होंने कहा कि “यंग इंडियन” केवल एक पत्रिका नहीं थी, बल्कि उस दौर के सामाजिक और राजनीतिक संघर्षों की आवाज थी। देश के तत्कालीन हालात ने चंद्रशेखर को “यंग इंडियन” निकालने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि विचार और समाचार दोनों अलग-अलग चीजें हैं, लेकिन चंद्रशेखर ने पत्रकारिता को विचार की ताकत दी। उनके लेखन से देश सोचने को मजबूर होता था।

अरविंद मोहन ने चिंता जताते हुए कहा कि आज देश में वैचारिक पत्रकारिता कमजोर होती जा रही है। विचारवान पत्रकार और सिद्धांतवादी नेता लगातार कम हो रहे हैं। इसके बावजूद समाज आज भी चंद्रशेखर जैसे व्यक्तित्व की कमी महसूस करता है। उन्होंने कहा कि पत्रकारिता केवल सूचना देने का माध्यम नहीं, बल्कि समाज को दिशा देने का दायित्व भी है, जिसे चंद्रशेखर ने पूरी ईमानदारी से निभाया।


चंद्रशेखर की पत्रकारिता में दिखता था गांधी के स्वराज का दर्शन

कार्यक्रम के दूसरे सत्र “चंद्रशेखर की पत्रकारिता दृष्टि” में अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय वर्धा के वरिष्ठ पत्रकार एवं प्रोफेसर डा. कृपाशंकर चौबे ने बीज वक्तव्य प्रस्तुत करते हुए कहा कि “यंग इंडियन” का प्रारंभिक संपादन अंग्रेजी में हुआ, लेकिन बाद में चंद्रशेखर ने हिंदी में वर्षों तक इसका संपादन किया। उन्होंने कहा कि चंद्रशेखर की पत्रकारिता में महात्मा गांधी के स्वराज की स्पष्ट झलक दिखाई देती थी।

डा. चौबे ने कहा कि चंद्रशेखर के लेखन का केंद्र हमेशा गरीब, किसान, बेरोजगार और समाज का अंतिम व्यक्ति रहा। संसद से लेकर पत्रकारिता तक उन्होंने हमेशा वंचितों की आवाज बुलंद की। उन्होंने “मेरी जेल डायरी” का उल्लेख करते हुए कहा कि नेहरू के बाद चंद्रशेखर देश के सबसे अधिक पढ़े-लिखे और वैचारिक प्रधानमंत्री थे। उनकी लेखनी निष्पक्ष और निर्भीक थी।

उन्होंने वर्ष 1975 में “यंग इंडियन” में प्रकाशित एक लेख का जिक्र करते हुए कहा कि उस समय बेरोजगारी पर चंद्रशेखर ने जो चिंताएं व्यक्त की थीं, वे आज भी उतनी ही प्रासंगिक हैं। डा. चौबे ने कहा कि चंद्रशेखर वैचारिक पत्रकारिता के शिखर पुरुष थे और आज के पत्रकारों को उनसे सीख लेने की आवश्यकता है।


सत्ता से सवाल करने का साहस रखते थे चंद्रशेखर

लखनऊ के वरिष्ठ पत्रकार सुरेश बहादुर सिंह ने कहा कि चंद्रशेखर की पत्रकारिता में सत्ता से सवाल पूछने का साहस था। वे कभी सत्ता के दबाव में नहीं झुके और न ही अपने सिद्धांतों से समझौता किया। उन्होंने कहा कि चंद्रशेखर ने अपने पूरे जीवन में अपनी किसी खबर का खंडन नहीं किया, क्योंकि वे तथ्य और सच्चाई के साथ खड़े रहते थे।

वरिष्ठ पत्रकार धीरेंद्रनाथ श्रीवास्तव ने कहा कि चंद्रशेखर की पत्रकारिता में गरीबी, बेरोजगारी और सामाजिक असमानता प्रमुख विषय होते थे। कठिन से कठिन बात को सरल भाषा में कहने की अद्भुत क्षमता उनमें थी। उन्होंने कहा कि देश में समय-समय पर घटी कुछ राजनीतिक घटनाओं ने उन्हें पत्रकारिता से दूर जरूर किया, लेकिन पत्रकारिता को लेकर उनके विचार आज भी जीवंत और प्रासंगिक हैं।


बीएचयू में चंद्रशेखर के नाम पर शोधपीठ स्थापित करने की घोषणा

काशी हिंदू विश्वविद्यालय (बीएचयू) के पत्रकारिता विभागाध्यक्ष डा. ज्ञानप्रकाश मिश्र ने कहा कि भारत में पत्रकारिता का उदय देश की स्वतंत्रता और सामाजिक चेतना के आंदोलन के साथ हुआ था। चंद्रशेखर ने पत्रकारिता को केवल पेशा नहीं, बल्कि सामाजिक परिवर्तन का माध्यम बनाया।

उन्होंने कहा कि चंद्रशेखर सनातनी समाजवादी थे। उनका ग्राम्य जीवन, भारतीय संस्कृति और सामाजिक मूल्यों से गहरा लगाव था। वे कभी प्रलोभनों के आगे नहीं झुके और संघर्षों के बावजूद ऊंचाइयों तक पहुंचे।

डा. मिश्र ने घोषणा की कि बीएचयू के पत्रकारिता विभाग में चंद्रशेखर के नाम पर एक शोधपीठ स्थापित करने के लिए पहल की जाएगी, ताकि आने वाली पीढ़ियां उनके विचारों और पत्रकारिता दृष्टि का अध्ययन कर सकें। उन्होंने कहा कि चंद्रशेखर को सच्ची श्रद्धांजलि तभी होगी जब उनके मूल्यों, चिंतन और आदर्शों को समाज में आगे बढ़ाया जाएगा।



अतिथियों का हुआ सम्मान, बड़ी संख्या में जुटे पत्रकार और समाजसेवी

कार्यक्रम का शुभारंभ स्वर्गीय चंद्रशेखर के चित्र पर पुष्पांजलि और दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुआ। इस अवसर पर राज्यसभा सांसद नीरज शेखर एवं एमएलसी रविशंकर सिंह पप्पू ने वरिष्ठ पत्रकार अरविंद मोहन, डा. कृपाशंकर चौबे, डा. ज्ञानप्रकाश मिश्र तथा धीरेंद्रनाथ श्रीवास्तव को अंगवस्त्र और स्मृति चिन्ह भेंट कर सम्मानित किया।

कार्यक्रम में श्याम जी त्रिपाठी, योगेंद्र सिंह, कमलेश सिंह, राणा प्रताप सिंह, नगर पालिका चेयरमैन संत कुमार “मिठाई लाल” गुप्त, चंद्रशेखर सिंह, यशपाल सिंह, अनिल सिंह, मनोरंजन सिंह, अजय उपाध्याय, उमाशंकर सिंह, अजय सिंह, सुशील कुमार पांडेय “कान्ह जी”, अरविंद शुक्ल सहित बड़ी संख्या में पत्रकार, बुद्धिजीवी और सामाजिक कार्यकर्ता उपस्थित रहे।


कार्यक्रम की अध्यक्षता चंद्रशेखर जन्मशताब्दी वर्ष समारोह समिति के अध्यक्ष श्यामबहादुर सिंह ने की, जबकि संचालन वरिष्ठ पत्रकार डा. अखिलेश सिन्हा ने किया। सभी अतिथियों का स्वागत पूर्व प्रमुख अनिल सिंह ने किया।

संगोष्ठी के अंत में वक्ताओं ने एक स्वर में कहा कि आज जब पत्रकारिता अनेक चुनौतियों से गुजर रही है, तब चंद्रशेखर जैसे वैचारिक, निष्पक्ष और जनपक्षधर पत्रकारों के आदर्शों को अपनाना समय की सबसे बड़ी जरूरत है।



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