छोटे लोहिया जनेश्वर मिश्र की पुण्यतिथि : समाजवाद, संघर्ष और जनसेवा की अमिट विरासत


भारतीय राजनीति में समाजवाद को जन-जन तक पहुँचाने वाले, सिद्धांत और संघर्ष को जीवन का आधार बनाने वाले महान समाजवादी चिंतक एवं जननेता छोटे लोहिया के नाम से विख्यात स्वर्गीय जनेश्वर मिश्र की पुण्यतिथि हमें उनके विचारों, संघर्षों और जनसेवा की उस परंपरा का स्मरण कराती है, जो आज भी लोकतंत्र को दिशा देने का कार्य कर रही है। जनेश्वर मिश्र केवल एक नेता नहीं थे, बल्कि वे जनता की आवाज़, वंचितों की उम्मीद और समाजवादी आंदोलन की जीवंत आत्मा थे।

जनेश्वर मिश्र का संपूर्ण जीवन समाज के अंतिम पंक्ति में खड़े व्यक्ति के अधिकारों के लिए समर्पित रहा। उन्होंने राजनीति को सत्ता प्राप्ति का माध्यम नहीं, बल्कि सामाजिक परिवर्तन का सशक्त औजार माना। स्वतंत्रता के बाद के भारत में जब लोकतंत्र नई चुनौतियों से गुजर रहा था, तब जनेश्वर मिश्र ने समाजवाद को केवल विचार नहीं, बल्कि जनआंदोलन के रूप में स्थापित करने का प्रयास किया। वे डॉ. राममनोहर लोहिया के विचारों से गहरे प्रभावित थे और उन्हीं के सिद्धांतों को व्यवहार में उतारने के कारण उन्हें छोटे लोहिया की संज्ञा मिली।

उनकी राजनीति की सबसे बड़ी विशेषता थी—सादगी, स्पष्टवादिता और निडरता। संसद हो या सड़क, सत्ता पक्ष हो या विपक्ष, जनेश्वर मिश्र ने सदैव जनहित की बात निर्भीकता से कही। वे सत्ता से समझौता करने के बजाय संघर्ष को प्राथमिकता देते थे। किसानों, मजदूरों, युवाओं और हाशिए पर खड़े समाज के लिए उनका संघर्ष कभी थमा नहीं। उन्होंने भ्रष्टाचार, अन्याय और असमानता के विरुद्ध आजीवन आवाज़ बुलंद की।

जनेश्वर मिश्र का मानना था कि लोकतंत्र तभी मजबूत होगा जब राजनीति में नैतिकता और समाज में समान अवसर सुनिश्चित होंगे। उन्होंने क्षेत्र, जाति और वर्ग से ऊपर उठकर सामाजिक न्याय की बात की। उत्तर प्रदेश की राजनीति में उनका योगदान विशेष रूप से उल्लेखनीय रहा, जहाँ उन्होंने समाजवादी आंदोलन को नई ऊर्जा दी और संगठन को जमीनी स्तर पर सशक्त किया। उनकी लोकप्रियता का कारण उनका आमजन से सीधा संवाद और उनकी पीड़ा को समझने की क्षमता थी।

पुण्यतिथि के अवसर पर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए यह महसूस होता है कि आज के राजनीतिक परिदृश्य में जनेश्वर मिश्र जैसे निष्कलंक और सिद्धांतवादी नेताओं की कमी खलती है। उनका जीवन हमें यह सिखाता है कि राजनीति सेवा का मार्ग है, न कि व्यक्तिगत स्वार्थ का साधन। विचारों के प्रति निष्ठा और जनता के प्रति जवाबदेही ही सच्चे नेता की पहचान होती है।

आज जब समाज आर्थिक विषमता, सामाजिक तनाव और नैतिक संकट जैसी चुनौतियों से जूझ रहा है, तब छोटे लोहिया जनेश्वर मिश्र के विचार और भी प्रासंगिक हो जाते हैं। उनकी पुण्यतिथि हमें यह संकल्प लेने का अवसर देती है कि हम समाजवाद के मूल मूल्यों—समता, न्याय, स्वतंत्रता और बंधुत्व—को अपने आचरण और सार्वजनिक जीवन में उतारने का प्रयास करें।

अंततः जनेश्वर मिश्र की स्मृति केवल अतीत की धरोहर नहीं, बल्कि वर्तमान और भविष्य के लिए प्रेरणा है। उनका संघर्ष, उनकी सादगी और उनकी वैचारिक प्रतिबद्धता सदैव समाज को दिशा देती रहेगी। छोटे लोहिया के रूप में वे जन-जन के हृदय में जीवित हैं और रहेंगे।

भावभीनी श्रद्धांजलि।

परिवर्तन चक्र समाचार सेवा ✍️ 



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