राष्ट्रीय पर्यटन दिवस : भारत की सांस्कृतिक विरासत और आर्थिक सशक्तिकरण का उत्सव


भारत विविधताओं का देश है—यहाँ की संस्कृति, परंपराएँ, भाषा, खानपान और भौगोलिक स्वरूप विश्वभर के पर्यटकों को अपनी ओर आकर्षित करते हैं। देश की इसी समृद्ध विरासत, प्राकृतिक सौंदर्य और पर्यटन की महत्ता को रेखांकित करने के उद्देश्य से प्रत्येक वर्ष 25 जनवरी को राष्ट्रीय पर्यटन दिवस मनाया जाता है। यह दिवस न केवल पर्यटन स्थलों के प्रचार-प्रसार का अवसर है, बल्कि पर्यटन के माध्यम से रोजगार सृजन, सांस्कृतिक संरक्षण और आर्थिक विकास के महत्व को समझाने का भी सशक्त माध्यम है।

राष्ट्रीय पर्यटन दिवस का मुख्य उद्देश्य देशवासियों को पर्यटन के प्रति जागरूक करना और भारत को एक वैश्विक पर्यटन गंतव्य के रूप में स्थापित करना है। पर्यटन उद्योग आज भारत की अर्थव्यवस्था का एक महत्वपूर्ण स्तंभ बन चुका है। इससे लाखों लोगों को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से रोजगार प्राप्त होता है, जिनमें होटल व्यवसाय, परिवहन, हस्तशिल्प, गाइड सेवाएँ और स्थानीय कुटीर उद्योग शामिल हैं। पर्यटन के विकास से ग्रामीण और दूरदराज़ क्षेत्रों में भी आर्थिक गतिविधियाँ बढ़ती हैं, जिससे समावेशी विकास को गति मिलती है।

भारत का पर्यटन केवल दर्शनीय स्थलों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह आध्यात्मिक, सांस्कृतिक, ऐतिहासिक, प्राकृतिक, साहसिक और आयुर्वेदिक पर्यटन का अद्भुत संगम है। कश्मीर की वादियाँ, हिमालय की ऊँची चोटियाँ, राजस्थान के किले और महल, दक्षिण भारत के प्राचीन मंदिर, वाराणसी और अयोध्या जैसे धार्मिक स्थल, गोवा और केरल के समुद्र तट, पूर्वोत्तर भारत की हरियाली और आदिवासी संस्कृति—ये सभी भारत की पर्यटन विविधता को दर्शाते हैं।

राष्ट्रीय पर्यटन दिवस हमें जिम्मेदार और सतत पर्यटन का संदेश भी देता है। बढ़ते पर्यटन के साथ पर्यावरण संरक्षण, स्वच्छता और स्थानीय संस्कृति के सम्मान की आवश्यकता और भी बढ़ जाती है। “अतिथि देवो भवः” की भारतीय परंपरा तभी सार्थक होती है जब हम पर्यटकों का स्वागत करने के साथ-साथ अपने प्राकृतिक संसाधनों और सांस्कृतिक धरोहरों की रक्षा भी करें। स्वच्छ पर्यटन स्थल, प्लास्टिक मुक्त वातावरण और स्थानीय समुदाय की भागीदारी पर्यटन को दीर्घकालिक रूप से सफल बनाती है।

इस दिवस पर देशभर में विभिन्न कार्यक्रमों, पर्यटन मेलों, सांस्कृतिक प्रस्तुतियों, संगोष्ठियों और जागरूकता अभियानों का आयोजन किया जाता है। सरकार द्वारा ‘देखो अपना देश’, ‘स्वदेश दर्शन’ और ‘प्रसाद योजना’ जैसी पहलें पर्यटन को बढ़ावा देने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हैं। डिजिटल तकनीक और सोशल मीडिया के माध्यम से भी भारत की छवि एक सुरक्षित, समृद्ध और आकर्षक पर्यटन देश के रूप में उभर रही है।

राष्ट्रीय पर्यटन दिवस युवाओं को पर्यटन क्षेत्र में करियर की संभावनाओं से परिचित कराने का भी अवसर प्रदान करता है। टूरिज़्म मैनेजमेंट, होटल इंडस्ट्री, ट्रैवल ब्लॉगिंग, फोटोग्राफी और इको-टूरिज़्म जैसे क्षेत्र आज नए अवसरों के द्वार खोल रहे हैं। इससे न केवल आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्य को बल मिलता है, बल्कि स्थानीय प्रतिभाओं को भी वैश्विक मंच मिलता है।

अंततः, राष्ट्रीय पर्यटन दिवस हमें यह स्मरण कराता है कि पर्यटन केवल घूमने-फिरने का माध्यम नहीं, बल्कि यह राष्ट्र निर्माण, सांस्कृतिक एकता और आर्थिक प्रगति का सशक्त साधन है। जब हम अपने देश की विरासत को समझते, संजोते और गर्व के साथ विश्व के समक्ष प्रस्तुत करते हैं, तभी भारत सच्चे अर्थों में एक वैश्विक पर्यटन शक्ति बनता है।

आइए, राष्ट्रीय पर्यटन दिवस पर यह संकल्प लें— “देश को जानें, देश को पहचानें और देश को गौरवान्वित करें।”🇮🇳

परिवर्तन चक्र समाचार सेवा ✍️ 



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