भारतीय सेना दिवस : शौर्य, अनुशासन और राष्ट्रभक्ति का गौरवशाली उत्सव


हर वर्ष 15 जनवरी को मनाया जाने वाला भारतीय सेना दिवस देश के उन वीर सपूतों को समर्पित है, जो अपनी जान की परवाह किए बिना मातृभूमि की रक्षा में सदैव तत्पर रहते हैं। यह दिन केवल एक औपचारिक उत्सव नहीं, बल्कि उस गौरवशाली परंपरा का प्रतीक है, जिसने भारत को साहस, अनुशासन और बलिदान की मिसाल दी है। इसी दिन वर्ष 1949 में फील्ड मार्शल के.एम. करिअप्पा ने भारतीय सेना के पहले भारतीय सेनाध्यक्ष के रूप में कार्यभार संभाला था, जिसने स्वतंत्र भारत की सैन्य पहचान को नई दिशा दी।

भारतीय सेना केवल एक सैन्य बल नहीं, बल्कि भारत की आत्मा की रक्षा करने वाला वह मजबूत स्तंभ है, जो सीमा पर खड़े होकर हर भारतीय को चैन की नींद देता है। बर्फ से ढके सियाचिन के ग्लेशियर हों या राजस्थान के तपते रेगिस्तान, घने जंगल हों या ऊँचे पहाड़—हर परिस्थिति में भारतीय सैनिक अपनी अदम्य इच्छाशक्ति के साथ देश की सीमाओं की रक्षा करते हैं। उनका जीवन अनुशासन, त्याग और कर्तव्यनिष्ठा का जीवंत उदाहरण है।

इतिहास के पन्नों में भारतीय सेना के शौर्य की अनगिनत गाथाएं दर्ज हैं। 1947-48 का कश्मीर युद्ध हो, 1962, 1965 और 1971 के युद्ध हों या फिर 1999 का कारगिल युद्ध—हर बार भारतीय सेना ने यह सिद्ध किया कि देश की अखंडता से बढ़कर कुछ भी नहीं। विशेष रूप से 1971 के युद्ध में पाकिस्तान पर विजय और बांग्लादेश का निर्माण भारतीय सैन्य इतिहास का स्वर्णिम अध्याय है, जिसने भारत को एक शक्तिशाली राष्ट्र के रूप में विश्व पटल पर स्थापित किया।

समय के साथ भारतीय सेना ने केवल युद्ध के मैदान में ही नहीं, बल्कि प्राकृतिक आपदाओं और राष्ट्रीय संकटों के समय भी अपनी अहम भूमिका निभाई है। भूकंप, बाढ़, चक्रवात या महामारी—हर आपदा में सेना सबसे पहले राहत और बचाव कार्य में जुट जाती है। इससे यह स्पष्ट होता है कि भारतीय सेना केवल सीमा रक्षक ही नहीं, बल्कि देश की सबसे भरोसेमंद सहायता शक्ति भी है।

आज की भारतीय सेना आधुनिक तकनीक, उन्नत हथियारों और प्रशिक्षित मानव संसाधन के साथ निरंतर सशक्त हो रही है। आत्मनिर्भर भारत अभियान के तहत स्वदेशी रक्षा उपकरणों का निर्माण, महिला अधिकारियों की बढ़ती भूमिका और साइबर व स्पेस डोमेन में बढ़ती क्षमता इस बात का प्रमाण है कि भारतीय सेना भविष्य की चुनौतियों के लिए पूरी तरह तैयार है।

सेना दिवस हमें यह याद दिलाता है कि आज हम जिस स्वतंत्रता, सुरक्षा और शांति में जीवन जी रहे हैं, उसके पीछे अनगिनत सैनिकों का बलिदान छिपा है। उन वीरों की माताएं, पत्नियां और परिवार भी उतने ही सम्मान के पात्र हैं, जिन्होंने अपने प्रियजनों को देश सेवा के लिए समर्पित कर दिया।

इस पावन अवसर पर प्रत्येक नागरिक का कर्तव्य है कि वह सेना के प्रति सम्मान, आभार और समर्थन व्यक्त करे। सच्ची श्रद्धांजलि यही होगी कि हम अपने कर्तव्यों का ईमानदारी से पालन करें, देश की एकता और अखंडता बनाए रखें और उस भारत के निर्माण में योगदान दें, जिसके लिए हमारे सैनिक हर दिन अपने प्राण हथेली पर रखकर खड़े रहते हैं।

भारतीय सेना दिवस केवल एक तारीख नहीं, बल्कि राष्ट्र के स्वाभिमान, शौर्य और बलिदान की अमर गाथा है।

जय हिंद 🇮🇳

परिवर्तन चक्र समाचार सेवा ✍️ 

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