बलिया जनपद में स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली इन दिनों सवालों के घेरे में है। आरोप है कि बीते दो वर्षों के दौरान वाराणसी की एक निजी फर्म को बिना टेंडर प्रक्रिया अपनाए और कई स्थानों पर कार्य अधूरा रहने के बावजूद करोड़ों रुपये का भुगतान कर दिया गया। नियमों को दरकिनार कर अधिकांश निर्माण और मरम्मत कार्य उसी फर्म से कराए जाने की बात सामने आ रही है, जिससे पूरे मामले पर गंभीर संदेह पैदा हो गया है।
सूत्रों के अनुसार जिन सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों पर यह कार्य कराए गए, वहां के प्रभारी अधिकारियों को न तो टेंडर प्रक्रिया की जानकारी थी और न ही यह स्पष्ट था कि कुल कितने कार्य स्वीकृत हुए और कितने वास्तव में पूरे किए गए। उनका कहना है कि उन्हें केवल उच्च अधिकारियों के मौखिक निर्देश मिले थे, जबकि कार्य पूर्णता से जुड़ी एनओसी भी सीधे निर्माण के नोडल स्तर से ले ली गई।
पूर्व सीएमओ डॉ. संजीव वर्मन द्वारा सीएचसी सिकंदरपुर में मरम्मत कार्य के नाम पर लगभग 34 लाख रुपये का भुगतान तथा कार्यवाहक सीएमओ डॉ. विजय यादव के कार्यकाल में सीएचसी अगाऊर बांसडीह में करीब एक करोड़ रुपये से अधिक की स्वीकृति ने इस प्रकरण को और गंभीर बना दिया है। शासन के स्पष्ट निर्देश हैं कि एक लाख रुपये से अधिक के किसी भी कार्य के लिए टेंडर या जेम पोर्टल के माध्यम से प्रक्रिया अनिवार्य है, इसके बावजूद नियमों की अनदेखी कर भुगतान किया जाना कई सवाल खड़े करता है।
जनपद में बार-बार कार्यवाहक सीएमओ की नियुक्ति और उन्हें मिले व्यापक वित्तीय व प्रशासनिक अधिकारों को भी इस कथित अनियमितता का कारण माना जा रहा है। लोगों के बीच यह चर्चा तेज है कि क्या स्वास्थ्य सेवाओं के लिए आवंटित धन का सही उपयोग हो रहा है या फिर भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ रहा है।
हालांकि कार्यवाहक सीएमओ डॉ. विजय यादव ने पूरे मामले की जांच कराने और दोषियों पर कार्रवाई का आश्वासन दिया है, लेकिन जनता की नजर अब इस बात पर टिकी है कि क्या यह जांच निष्पक्ष और प्रभावी होगी या फिर यह मामला भी अन्य मामलों की तरह समय के साथ ठंडे बस्ते में चला जाएगा।


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