सादा जीवन, उच्च विचारों के प्रतीक थे स्वर्गीय विक्रमादित्य पांडे : बलिया के विकास पुरुष को 19वीं पुण्यतिथि पर श्रद्धांजलि


बलिया। सादा जीवन और उच्च विचारों की मिसाल रहे स्वर्गीय विक्रमादित्य पांडे जी का जीवन सेवा, संघर्ष और विकास की अनुपम गाथा है। उनका जन्म 1 जुलाई 1945 को जनपद बलिया के अति पिछड़े गांव बसुधरपाह में हुआ था। उनके पिता स्वर्गीय जगन्नाथ पांडे तथा माता समरातो देवी थीं। प्रारंभिक शिक्षा गांव के सेटपुरा से हुई, जबकि मैट्रिक की पढ़ाई बसरिकापुर और इंटर की शिक्षा दुबहर से प्राप्त की। आगे चलकर उन्होंने टाउन डिग्री कॉलेज से बीकॉम तथा गोरखपुर विश्वविद्यालय से स्नातक की डिग्री हासिल की।

शिक्षक के रूप में उन्होंने अपने करियर की शुरुआत शिवपुर इंटर कॉलेज से की और बाद में नगवा इंटर कॉलेज में प्रधानाध्यापक नियुक्त हुए। शिक्षा के क्षेत्र में सेवा देते हुए ही उन्होंने सामाजिक और राजनीतिक जीवन में कदम रखा। वर्ष 1965-66 में वे ग्राम सभा के प्रधान बने। इसके बाद 1972 में बेलहरी ब्लॉक से लगातार तीन बार ब्लॉक प्रमुख रहकर जनसेवा का नया कीर्तिमान स्थापित किया।

राजनीतिक जीवन में उनका कद निरंतर बढ़ता गया। 1984-85 में वे पहली बार बलिया विधानसभा से विधायक बने और लगातार तीन बार विधायक रहकर क्षेत्र की जनता का भरोसा जीता। 1989 में उत्तर प्रदेश में मुलायम सिंह यादव के नेतृत्व में बनी सरकार में उन्होंने नगर विकास मंत्री के रूप में शपथ ली। इसके बाद 2002 में वे पहली बार विधान परिषद के सदस्य चुने गए। अपनी सादगी, ईमानदारी और साफ-सुथरी छवि के कारण वे सदैव अपने नेता नेताजी मुलायम सिंह यादव के अत्यंत विश्वासपात्र बने रहे।

स्वर्गीय पांडे जी को सही मायनों में “विकास पुरुष” कहा जाए तो अतिशयोक्ति नहीं होगी। उनके प्रयासों से बलिया को विकास की नई दिशा मिली। प्रमुख कार्यों में—

👉बलिया नगर की सड़कों का चौड़ीकरण

👉पहली बार हॉट मिक्स प्लांट से सड़कों का निर्माण

👉गंगा नदी पर पुल का निर्माण

👉बसरिकापुर में बालिका इंटर कॉलेज

👉नगवा में बालिका डिग्री कॉलेज

👉मंगल पांडे स्मारक का निर्माण

👉भृगु मंदिर का जीर्णोद्धार

👉नगर में सीवर प्लांट की स्थापना

👉बसंतपुर में आयुर्वेदिक अस्पताल

👉बसुधरपाह में सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र

👉दुबहर में विद्युत उपकेंद्र

👉नगर की मलिन बस्तियों में नाली-खरंजा का प्रथम बार निर्माण

👉विभिन्न क्षेत्रों में पानी की टंकियों का निर्माण

जैसे अनगिनत विकास कार्य शामिल हैं, जो आज भी उनकी दूरदर्शिता की गवाही देते हैं।

वे केवल एक जनप्रतिनिधि नहीं, बल्कि जनता के सच्चे सेवक थे। आम लोगों से सीधे मिलना, गरीबों की मदद करना और जरूरतमंदों के लिए हमेशा खड़े रहना उनकी पहचान थी। शिक्षक होने के कारण वे अपने से छोटे लोगों को “चेला” कहकर पुकारते थे और लोग उन्हें स्नेह से “गुरु जी” कहा करते थे।

14 जनवरी 2007 को लखनऊ में हृदयाघात से उनका आकस्मिक निधन हो गया। उस समय के मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव स्वयं बलिया पहुंचकर उन्हें कंधा देकर अंतिम विदाई दी थी, जो उनके सम्मान और कद का प्रतीक था।

हर वर्ष 14 जनवरी को उनकी पुण्यतिथि पर टाउन हॉल, बापू भवन में सर्वदलीय श्रद्धांजलि सभा आयोजित की जाती है, जिसमें सभी राजनीतिक दलों के नेता और गणमान्य नागरिक उन्हें श्रद्धासुमन अर्पित करते हैं।

आज उनकी 19वीं पुण्यतिथि पर पूरा बलिया उस महान व्यक्तित्व को नमन करता है, जिसने अपने जीवन का हर क्षण जनसेवा और विकास को समर्पित कर दिया। स्वर्गीय विक्रमादित्य पांडे जी जैसे नेता विरले होते हैं, जो पद से नहीं, अपने कर्मों से अमर हो जाते हैं।

परिवर्तन चक्र समाचार सेवा ✍️ 



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