अनियोजित- अनियंत्रित विकास तथा मानव की भोगवादी प्रवृति एवं विलासितापूर्ण जीवन की देन हैं पर्यावरणीय समस्याएँ- डा० गणेश पाठक


बलिया। गोपीनाथ पी० जी० कालेज देवली सलामतपुर , गाजीपुर में शनिवार को "पर्यावरणीय समस्याएँ एवं उनका समाधान" नामक विषय पर भूगोल विभाग द्वारा एक संगोष्ठी का आयोजन किया गया, जिसके मुख्य अतिथि महाविद्यालय दूबेछपरा, बलिया के पूर्व प्राचार्य व पर्यावरणविद् डा० गणेश कुमार पाठक एवं विशिष्ट अतिथि का० हि० वि० वाराणसी के भूगोल विभाग के प्रो० विनोद कुमार तिवारी रहे। संगोष्ठी का शुभारम्भ माँ सरस्वती के चित्र पर माल्यार्पण कर एवं दीप प्रज्जवलित कर हुआ।
       संगोष्ठी के प्रारभ में मुख्य अतिथि, विशिष्ट अतिथि एवं वक्ता अतुलकान्त मिश्र तथा डा० दर्शन कुमार झाँ को बुके, अंगवस्त्रम् एवं स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित किया गया। बतौर मुख्य अतिथि संगोष्ठी को संबोधित करते हुए डा० गणेश कुमार पाठक ने कहा कि वर्तमान समय में उत्पन्न पर्यावरणीय समस्याएं मानव की भोगवादी प्रवृत्ति एवं विलासिता पूर्ण जीवन की आवश्यकताओं की पूर्ति हेतु किए गए अनियंत्रित एवं अनियंत्रित एवं अनियोजित विकास की देन हैं, जिसके चलते पर्यावरण एवं पारिस्थितिकी के तत्वों का बेरहमी से दोहन एवं शोषण किया गया, फलतः प्राकृतिक संसाधन समाप्त होते गए, जससे पर्यावरण एवं पारिस्थितिकी असंतुलन बढ़ता गया। जिसका परिणाम यह हुआ कि अनेकों तरह की प्राकृतिक आपदाएँ उत्पन्न होकर सम्पूर्ण क्षजीव- जगत को संकट में डाल दिया है। बढ़ते नगरीकरण एवं औद्योगिकीकरण ने पर्यावरण प्रदूषण को फैलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। ग्लोबल वार्मिंग एवं जलवायु परिवर्तन के चलते मौसम में अचानक परिवर्तन होने लगे हैं जिससे मानव का अस्तित्व ही संकट में पड़ गया है।

      पर्यावरण समस्याओं के समाधान हेतु डा० पाठक ने कहा कि भले राष्ट्रीय स्तर पर एवं विश्व स्तर पर भी पर्यावरणीय समस्याओं के समाधान हेतु प्रयास चल रहे हैं, किन्तु उसका बहुत सार्थक परिणाम नहीं निकल रहा है। इसके लिए हमें भारतीय चिन्तन में निहित अवधारणाओं को अपनाना हो। भारतीय संस्कृति में पर्यावरण के सभी तत्वों की सुरक्षा एवं संरक्षण हेतु विधान बनाए गए हैं , जिनका अनुकरण कर और बताए गए  अवधारणाओं पर जीवन यापन कर पर्यावरण की समस्याओं को कम किया जा सकता है।
      बतौर विशिष्ट अतिथि प्रो० विनोद कुमार तिवारी ने पर्यावरणीय समस्याओं के समाधान हेतु व्यवहारिक पक्षों पर जोर देते हुए कहा कि हमें अपने जीवनचर्या में सुधार लाते हुए अपने घर से इसकी शुरूआत करनी होगी तथा वृक्षारोपण पर विशेष ध्यान देना होगा। विशिष्ट वक्ता अतुल कान्त मिश्र ने पर्यावरण समस्याओं एवं प्रदूषण के विविध पक्षों पर विचार रखते हुए प्रदूषण के नये आयाम रेडियेशन से उत्पन्न प्रदूषण एवं ई प्रदूषण को विशेष रूप से घातक बताया। डा० दर्शंन कुमार झा ने विभिन्न उदाहरणों द्वारा पर्यावरण प्रदूषण की समस्या एवं समाधान पर अपने विचार रखते हुए कहाकि हम प्रकृति से जितना आवश्यकता से अधिक लेंगे तो उसका भुगतान तो किसी न किसी रूप में करना ही पड़ेगा।
      संगोष्ठी के अंत में महाविद्यालय की प्रचार्या डा० सुधा त्रिपाठी ने संगोष्ठी में आए सभी अतिथियों एवं सहभागियों के प्रति धन्यवाद ज्ञापित किया।अध्यक्षता महाविद्यालय के संरक्षक राकेश तिवारी ने किया, जबकि संचालन संगोष्ठी के संयोजक डा० ऋषिकेश कुमार तिवारी ने किया।


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