भगवान भी है मायाजाल के वश में
बलिया । द वैदिक प्रभात फाउण्डेशन की और से रामलीला मैदान में चल रहे श्रीमदबाल्मीकि रामायण प्रवचन के छठवे अंतिम दिन दिन जगतगुरु विद्याभष्कर जी महाराज ने परमात्मा द्वारा उत्पन्न मायाजाल और उनके लीला का बड़े ही मनोहारी प्रवचन किया।
प्रवचन में विद्याभाष्कर जी ने बताया की जबसे भगवान की सांस से है तब से वेद है । भगवान माया से ही सारा कार्य करते है। माया के वश में खुद भगवान भी है। मायाजाल के वश में आकर वे भी सुख की अनुभूति करते है।
परमात्मा द्वारा रचित मायाजाल पर प्रवचन के दौरान ही वे, माया महाठगनी मैं जानी विष्णु भय लक्ष्मी बन बैठा शिव के भवन भवानी हो माया .…...... भजन सुनाया जिसपर श्रोता काफी देर तक झूमते रहे।
जगतगुरु ने बताया कि ये मायाजाल
का ही चक्कर है चक्कर बड़े महात्मा भी साधना करते करते मेनका में आशक्त हो जाते है । जनकनंदिनी माता सीता भी माया की लालसा में भगवान राम से कहती है मृग ले आओ। जब माया बढ़ती है तब मद हो जाता है।
आशीष लेने की लगीं रही भीड़, झूमते रहे श्रद्धालु
प्रवचन के अंतिम दिन होने के चलते श्रद्धालुओं द्वारा जगतगुरु विद्याभाष्कर जी महाराज को पुष्प अर्पण कर आशीर्वाद लेने के लिये श्रद्धलुओं की भीड़ लगी रही। श्रद्धालु जगतगुरु के भजन पर देर तक झूमते रहे।
सन्त सम्मेलन आज, आयेंगे कई जानेमाने साधु सन्त
श्रीमद बाल्मीकि रामायण के समाप्ति के 22 दिसम्बर को होने वाले सन्त सम्मेलन में कई साधु संत आ रहे है। इनमे
रामजन्मभूमि न्यासाध्यक्ष जनविजय शरण जी, जगतगुरु रामदिनिशाचार्यजी, जगतगुरु रामदिनेशजी, बुंदेलखंड के योगी अर्पित दास, साध्वी सरस्वती, साध्वी तृप्ति, महेन्द्र दास जी, बक्सर वाले मामा जी के महंत राजा राम जी आ रहे है।
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