भारत के इतिहास में कुछ व्यक्तित्व ऐसे होते हैं जो केवल अपने समय के नहीं, बल्कि आने वाली अनेक पीढ़ियों के पथप्रदर्शक बन जाते हैं। महात्मा गांधी ऐसे ही महान व्यक्तित्व थे, जिनका जीवन सत्य, अहिंसा, त्याग और मानवता के उच्चतम आदर्शों का जीवंत उदाहरण रहा। उनकी पुण्यतिथि केवल एक तिथि भर नहीं, बल्कि आत्ममंथन, स्मरण और उनके सिद्धांतों को जीवन में उतारने का अवसर है। 30 जनवरी का दिन हमें यह याद दिलाता है कि राष्ट्रपिता ने अपने प्राणों की आहुति देकर देश को न केवल आज़ादी दिलाई, बल्कि नैतिक मूल्यों की ऐसी धरोहर भी दी, जो आज भी उतनी ही प्रासंगिक है जितनी स्वतंत्रता संग्राम के समय थी।
महात्मा गांधी का जीवन सादगी, अनुशासन और आत्मसंयम का प्रतीक था। उन्होंने सत्य और अहिंसा को अपना सबसे बड़ा हथियार बनाया और इन्हीं के बल पर विश्व की सबसे बड़ी साम्राज्यवादी ताकत को झुकने पर मजबूर कर दिया। उनका मानना था कि किसी भी समाज की असली शक्ति उसके नैतिक मूल्यों में निहित होती है, न कि केवल उसकी भौतिक संपन्नता में। चरखा, खादी, स्वदेशी और आत्मनिर्भरता जैसे विचार उनके लिए केवल आंदोलन के साधन नहीं थे, बल्कि आत्मसम्मान और आत्मशक्ति के प्रतीक थे।
गांधी जी ने हमेशा समाज के अंतिम पंक्ति में खड़े व्यक्ति को केंद्र में रखकर सोचने की प्रेरणा दी। उनके लिए स्वतंत्रता का अर्थ केवल राजनीतिक आज़ादी नहीं था, बल्कि सामाजिक समानता, धार्मिक सहिष्णुता और आर्थिक न्याय भी था। उन्होंने अस्पृश्यता, भेदभाव और हिंसा के विरुद्ध निरंतर आवाज़ उठाई। उनका “सर्वोदय” का सिद्धांत — अर्थात सबका विकास — आज भी शासन और समाज दोनों के लिए मार्गदर्शक है।
पुण्यतिथि के अवसर पर जब हम गांधी जी को याद करते हैं, तो यह केवल श्रद्धांजलि देने का अवसर नहीं होता, बल्कि यह स्वयं से प्रश्न करने का भी समय होता है कि क्या हम उनके बताए मार्ग पर चल रहे हैं। आज का दौर तेज़ी, प्रतिस्पर्धा और तकनीकी प्रगति का है, लेकिन इसके बीच मानवीय संवेदनाएं, सत्यनिष्ठा और सहिष्णुता कहीं पीछे छूटती दिखाई देती हैं। ऐसे समय में गांधी जी के विचार हमें संतुलन, धैर्य और नैतिकता का पाठ पढ़ाते हैं।
महात्मा गांधी ने अपने जीवन से यह सिखाया कि परिवर्तन की शुरुआत स्वयं से होती है। उन्होंने कहा था — “आप वह बदलाव बनिए जो आप दुनिया में देखना चाहते हैं।” यह संदेश आज भी उतना ही प्रभावशाली है। यदि प्रत्येक व्यक्ति अपने व्यवहार में ईमानदारी, करुणा और अहिंसा को स्थान दे, तो समाज अपने आप बेहतर बन सकता है।
उनकी पुण्यतिथि पर देशभर में प्रार्थना सभाएँ, श्रद्धांजलि कार्यक्रम और विचार गोष्ठियाँ आयोजित की जाती हैं, परंतु सबसे सच्ची श्रद्धांजलि यही होगी कि हम उनके सिद्धांतों को अपने दैनिक जीवन में अपनाएँ। गांधी जी का जीवन हमें यह याद दिलाता है कि महानता बाहरी आडंबर में नहीं, बल्कि सरलता, सेवा और सत्य के प्रति अडिग रहने में निहित है।
इस दिन हमें केवल इतिहास को याद नहीं करना चाहिए, बल्कि भविष्य के लिए संकल्प भी लेना चाहिए — ऐसा समाज बनाने का, जहाँ शांति हो, समानता हो और मानवता सर्वोपरि हो। महात्मा गांधी का जीवन और उनके विचार सदैव हमें प्रेरित करते रहेंगे, क्योंकि वे केवल एक नेता नहीं, बल्कि एक विचारधारा, एक चेतना और एक अनंत प्रेरणा हैं।


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