*श्रीमद्भागवत कथा में उमड़ा श्रद्धालुओं का सैलाब, परिवहन मंत्री दयाशंकर सिंह ने भी किया कथा श्रवण*
*बच्चों को किताबी ज्ञान के साथ अच्छे संस्कार देना भी जरूरी*
बलिया। हनुमानगंज ब्लॉक के छोड़हर स्थित श्रीराम जानकी मंदिर परिसर में आयोजित सात दिवसीय बलिया आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक महोत्सव में रविवार को श्रीमद्भागवत कथा के पांचवें दिन श्रद्धा और भक्ति का अद्भुत संगम देखने को मिला। प्रसिद्ध कथावाचिका जया किशोरी के श्रीमुख से भागवत कथा का रसपान करने के लिए श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ पड़ी। कथा पंडाल भक्तों से खचाखच भरा रहा। परिवहन मंत्री दयाशंकर सिंह ने भी कथा में पहुंचकर श्रीमद्भागवत का श्रवण किया। शाम 5:30 बजे से रात 8:15 बजे तक चले कथा आयोजन का शुभारंभ ठाकुर जी की आरती के साथ हुआ। इसके बाद जया किशोरी ने भक्ति, ज्ञान, संस्कार और भारतीय संस्कृति के महत्व पर विस्तार से प्रकाश डालते हुए श्रद्धालुओं को जीवन जीने की सार्थक सीख दी।
जया किशोरी ने कहा कि आधुनिकता की दौड़ में आगे बढ़ना अच्छी बात है, लेकिन इस दौरान अपनी संस्कृति, परंपरा और पहचान को कभी नहीं भूलना चाहिए। शिक्षा का वास्तविक महत्व तभी है, जब व्यक्ति के जीवन में संस्कार और नैतिक मूल्य भी हों। शिक्षा जहां इंसान को आगे बढ़ने का अवसर देती है, वहीं संस्कार उसे सही और गलत के बीच अंतर समझने की क्षमता प्रदान करते हैं। इसलिए बच्चों को किताबी ज्ञान देने के साथ-साथ अच्छे संस्कार देना भी बेहद जरूरी है। उन्होंने कहा कि आधुनिकता को अपनाने में कोई बुराई नहीं है, लेकिन अपनी सांस्कृतिक विरासत और परंपराओं को संजोकर रखना भी हमारी जिम्मेदारी है।
भगवान विष्णु के विभिन्न अवतारों का प्रसंग सुनाते हुए उन्होंने कहा कि भगवान के प्रत्येक अवतार में मानव जीवन और समाज के लिए कोई न कोई विशेष संदेश छिपा है। इन अवतारों के माध्यम से समाज को धर्म, कर्तव्य, त्याग, साहस और सद्गुणों की प्रेरणा मिलती है। भगवान श्रीकृष्ण के जीवन प्रसंगों का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि द्वापर युग में श्रीकृष्ण ने विपरीत परिस्थितियों में भी सही मार्ग चुनने और कठिन से कठिन समस्याओं का समाधान निकालने की प्रेरणा दी। उनका जीवन हमें सिखाता है कि परिस्थितियां चाहे कितनी भी चुनौतीपूर्ण क्यों न हों, व्यक्ति को विवेक, धैर्य और धर्म का साथ नहीं छोड़ना चाहिए।
उन्होंने कहा कि ज्ञान का अर्थ संसार से दूर हो जाना नहीं, बल्कि संसार में रहते हुए जीवन के वास्तविक सत्य को समझना है। जब व्यक्ति अपने जीवन का उद्देश्य पहचान लेता है, तो बड़ी से बड़ी कठिनाइयां भी उसे अपने लक्ष्य से विचलित नहीं कर पातीं। भारतीय संस्कृति और आध्यात्मिक परंपरा की मजबूती का उल्लेख करते हुए जया किशोरी ने कहा कि सनातन परंपरा की जड़ें बेहद गहरी हैं। समय-समय पर इसे कमजोर करने के प्रयास हुए, लेकिन भारतीय संस्कृति और सनातन परंपरा ने अपनी विशिष्ट पहचान बनाए रखी है।
जीवन की परिस्थितियों और ईश्वर के प्रति विश्वास पर उन्होंने कहा कि हर परिस्थिति को अपने नियंत्रण में रखना मनुष्य के लिए संभव नहीं है। ऐसे में जो चीजें हमारे वश में नहीं हैं, उनके कुछ फैसले ईश्वर पर छोड़कर धैर्य और विश्वास के साथ आगे बढ़ना चाहिए। इससे मन को शांति मिलती है और व्यक्ति कठिन समय में भी हिम्मत नहीं हारता। सेवा के महत्व पर उन्होंने कहा कि सेवा कभी स्वार्थ या बदले में कुछ पाने की उम्मीद से नहीं करनी चाहिए। निस्वार्थ भाव से किया गया कार्य ही वास्तविक सेवा है। मनुष्य को अपने जीवन में दूसरों की मदद, परोपकार और सद्भावना को स्थान देना चाहिए। कथा के दौरान जया किशोरी के भजनों और प्रेरक प्रवचनों में श्रद्धालु भावविभोर नजर आए। पूरे पंडाल में भक्तिमय वातावरण बना रहा।
अविनाश तिवारी "गोलू" ✍️





.jpg)

