बलिया रेलवे स्टेशन के मुख्य द्वार से हिंदी गायब!


सुंदरीकरण के बाद दीवार पर उर्दू और अंग्रेजी में लिखा नाम, हिंदी को नहीं मिली जगह; राजभाषा नीति के अनुपालन पर उठे सवाल

बलिया। जिला मुख्यालय स्थित बलिया रेलवे स्टेशन के सुंदरीकरण और आधुनिकीकरण के बावजूद स्टेशन के मुख्य द्वार की दीवार पर हिंदी में ‘बलिया’ का नाम अंकित नहीं होना चर्चा का विषय बना हुआ है। हैरानी की बात यह है कि स्टेशन के मुख्य प्रवेश द्वार पर दीवार पर बलिया का नाम अंग्रेजी और उर्दू में तो लिखा गया है, लेकिन हिंदी को पूरी तरह नजरअंदाज कर दिया गया है। हिंदी भाषी क्षेत्र के प्रमुख रेलवे स्टेशन पर हिंदी की इस अनदेखी से रेल प्रशासन की कार्यशैली और राजभाषा नीति के अनुपालन पर सवाल खड़े हो रहे हैं।

उल्लेखनीय है कि रेलवे स्टेशन का हाल ही में सुंदरीकरण कराया गया है। इसके बाद स्टेशन के मुख्य द्वार पर लगाए गए नाम संबंधी बोर्ड और दीवारों पर अंग्रेजी एवं उर्दू में ‘बलिया’ अंकित है, जबकि हिंदी में नाम कहीं दिखाई नहीं दे रहा है। जबकि इससे पहले पुराने बलिया रेलवे स्टेशन पर हिंदी में भी बलिया का नाम लिखा हुआ था। स्टेशन के विकास और आधुनिकीकरण के बाद मुख्य द्वार से ही हिंदी का नाम गायब हो जाना लोगों को अखर रहा है। सवाल यह है कि आखिर सुंदरीकरण के दौरान हिंदी में नाम लिखने की व्यवस्था क्यों नहीं की गई?

गौरतलब है कि रेलवे स्टेशनों का विकास एवं आधुनिकीकरण केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी ‘अमृत भारत स्टेशन योजना’ के तहत किया जा रहा है। इस योजना का उद्देश्य रेलवे स्टेशनों को आधुनिक सुविधाओं से सुसज्जित करना और उनकी पहचान को बेहतर बनाना है। लेकिन बलिया रेलवे स्टेशन के मुख्य द्वार पर हिंदी में नाम अंकित नहीं होना इस विकास कार्य की प्राथमिकताओं पर भी सवाल खड़ा करता है। आधुनिकता के नाम पर हिंदी को ही पीछे छोड़ देना समझ से परे है।


हैरानी की बात यह भी है कि कुछ दिन पहले ही वाराणसी मंडल के मंडल रेल प्रबंधक (डीआरएम) ने बलिया रेलवे स्टेशन का निरीक्षण किया था। इसके बावजूद स्टेशन के मुख्य द्वार पर हिंदी में नाम नहीं लिखे जाने जैसी स्पष्ट कमी अधिकारियों की नजर में क्यों नहीं आई? क्या निरीक्षण के दौरान राजभाषा संबंधी व्यवस्थाओं की समीक्षा नहीं की गई? स्टेशन के सुंदरीकरण पर लाखों रुपये खर्च किए जा रहे हैं, लेकिन हिंदी में स्टेशन का नाम अंकित कराने जैसी बुनियादी आवश्यकता की अनदेखी होना कई सवाल खड़े करता है।

भारत सरकार की राजभाषा नीति, राजभाषा अधिनियम, 1963 तथा राजभाषा नियम, 1976 के तहत केंद्रीय सरकारी कार्यालयों एवं संस्थानों में हिंदी के प्रयोग को प्रोत्साहित करने और निर्धारित प्रावधानों का पालन करने की व्यवस्था है। रेलवे भी केंद्र सरकार का एक महत्वपूर्ण विभाग है। ऐसे में रेलवे स्टेशनों पर हिंदी के समुचित प्रयोग और राजभाषा संबंधी दिशा-निर्देशों का अनुपालन सुनिश्चित किया जाना चाहिए। विशेष रूप से उत्तर प्रदेश जैसे हिंदी भाषी राज्य में स्थित बलिया रेलवे स्टेशन के मुख्य द्वार पर हिंदी में नाम का न होना उचित नहीं कहा जा सकता।

इस संबंध में बैजनाथ प्रसाद, प्रो. बालदेव राज एंड कम्पनी, आर्य समाज रोड, बलिया की ओर से रेल प्रशासन का ध्यान आकृष्ट कराते हुए मांग की गई है कि बलिया रेलवे स्टेशन के मुख्य प्रवेश द्वार की दीवार पर अंग्रेजी और उर्दू के साथ हिंदी में भी बड़े एवं स्पष्ट अक्षरों में ‘बलिया’ अंकित कराया जाए। साथ ही, स्टेशन परिसर में लगे सभी नामपट्टों और सूचना बोर्डों की समीक्षा कर यह सुनिश्चित किया जाए कि हिंदी को उसका उचित स्थान मिले।

यह मामला केवल एक नामपट्ट पर हिंदी में नाम लिखने तक सीमित नहीं है, बल्कि हिंदी के सम्मान, भाषायी पहचान और राजभाषा संबंधी प्रावधानों के प्रभावी अनुपालन से भी जुड़ा है। स्टेशन का आधुनिकीकरण तभी सार्थक होगा, जब विकास के साथ देश की भाषायी पहचान और राजभाषा का सम्मान भी सुनिश्चित हो। अब देखना यह है कि वाराणसी मंडल का रेल प्रशासन इस गंभीर कमी पर कब संज्ञान लेता है और बलिया रेलवे स्टेशन के मुख्य द्वार पर हिंदी में ‘बलिया’ लिखवाने की पहल कब करता है।