श्रीमद्भागवत कथा के अंतिम दिन उमड़ा श्रद्धालुओं का जनसैलाब
भगवान कृष्ण, सुदामा और अर्जुन के प्रसंगों से दिया जीवन में सही संगति का संदेश
बलिया। छोड़हर गांव स्थित श्रीराम जानकी मंदिर परिसर में आयोजित सात दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा का मंगलवार को श्रद्धा, भक्ति और उल्लास के बीच समापन हुआ। कथा के अंतिम दिन प्रसिद्ध कथावाचिका जया किशोरी के प्रवचन सुनने के लिए श्रद्धालुओं का भारी हुजूम उमड़ पड़ा। सुबह से ही कथा स्थल पर भक्तों के पहुंचने का सिलसिला शुरू हो गया था। श्रद्धालुओं की भारी भीड़ को देखते हुए पुलिस प्रशासन पूरी तरह मुस्तैद रहा और सुरक्षा एवं यातायात व्यवस्था को सुचारु बनाए रखने के लिए पुलिसकर्मी लगातार सक्रिय रहे।
कथा के दौरान जया किशोरी ने जीवन में सकारात्मक बदलाव, अच्छी संगति और सही मित्रों के महत्व पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि बदलाव ही प्रकृति का नियम है। जो समय के साथ स्वयं को बदलता है, वही जीवन में आगे बढ़ता है और उन्नति करता है। इसलिए परिस्थितियों के अनुसार अपने विचारों और कार्यशैली में सकारात्मक बदलाव लाना जरूरी है। उन्होंने कहा कि भगवान का काम केवल रास्ता दिखाना है, हाथ पकड़कर चलाना नहीं। जीवन में आगे बढ़ने के लिए व्यक्ति को स्वयं प्रयास करना पड़ता है। भगवान मार्गदर्शन जरूर करते हैं, लेकिन उस मार्ग पर चलने की जिम्मेदारी हमारी अपनी होती है।
जया किशोरी ने भगवान श्रीकृष्ण, सुदामा और अर्जुन के जीवन से जुड़े विभिन्न प्रसंगों के माध्यम से श्रोताओं को जीवन की व्यावहारिक सीख दी। उन्होंने मित्रता और संगति के महत्व को समझाते हुए कहा कि हमारे मित्र और आसपास के लोग भगवान श्रीकृष्ण जैसे होने चाहिए, न कि शकुनि मामा जैसे। श्रीकृष्ण जहां मित्र को सही राह दिखाते हैं, वहीं शकुनि गलत दिशा में ले जाने का प्रतीक हैं। उन्होंने कहा कि व्यक्ति के जीवन पर उसकी संगति का गहरा प्रभाव पड़ता है। अच्छी संगति इंसान को आगे बढ़ाती है, जबकि गलत संगति उसके जीवन को भटका सकती है।
उन्होंने श्रद्धालुओं से आत्ममंथन करने की अपील करते हुए कहा कि आज ही विचार कीजिए कि ऐसे पांच लोग कौन हैं, जिनसे आप सबसे ज्यादा बातचीत करते हैं और अपने दिल की बातें साझा करते हैं। यह परखने की जरूरत है कि वे लोग आपको सकारात्मक दिशा में ले जा रहे हैं या गलत रास्ते की ओर प्रेरित कर रहे हैं। यदि आपकी संगति अच्छी है तो उसे बनाए रखिए, लेकिन यदि कोई व्यक्ति आपके विचारों, व्यवहार और भविष्य पर नकारात्मक प्रभाव डाल रहा है तो उससे जल्द से जल्द दूरी बना लेना ही बेहतर है। उन्होंने कहा कि जीवन में सही मित्र का होना किसी वरदान से कम नहीं है। इसलिए मित्र चुनते समय विशेष सावधानी बरतनी चाहिए।
कथा के दौरान उनके सरल, सहज और प्रेरणादायी प्रवचनों ने श्रद्धालुओं को भावविभोर कर दिया। भगवान श्रीकृष्ण की लीलाओं और जीवन से जुड़े प्रसंगों के माध्यम से उन्होंने धर्म, कर्म, मित्रता, विश्वास और नैतिक मूल्यों का संदेश दिया। अंतिम दिन कथा स्थल पर भक्ति और आध्यात्मिकता का विशेष वातावरण देखने को मिला। इसके पूर्व परिवहन मंत्री दयाशंकर सिंह, पूर्व मंत्री राजधारी सिंह, विजय बहादुर सिंह, अरविंद शुक्ल, अरुण सिंह बंटू, हर्ष श्रीवास्तव सहित अन्य गणमान्य लोगों ने विधि-विधान से व्यासपीठ का पूजन-अर्चन कर कथावाचिका का आशीर्वाद प्राप्त किया।
अविनाश तिवारी "गोलू" ✍️





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