प्राथमिक चिकित्सा—एक कौशल ही नहीं, जीवन बचाने की शक्ति
12 सितंबर को विश्व प्राथमिक चिकित्सा दिवस मनाया जाता है। यह दिवस हमें याद दिलाता है कि दुर्घटना, चोट, जलने, बेहोशी, रक्तस्राव या किसी अन्य आकस्मिक स्थिति में डॉक्टर और अस्पताल तक पहुंचने से पहले दी गई तत्काल सहायता कई बार किसी व्यक्ति के जीवन के लिए निर्णायक साबित हो सकती है। प्राथमिक चिकित्सा का उद्देश्य बीमारी का पूरा उपचार करना नहीं, बल्कि आपात स्थिति में घायल या बीमार व्यक्ति की स्थिति को स्थिर रखना, जीवन बचाना और स्थिति को और गंभीर होने से रोकना है।
प्राथमिक चिकित्सा की जानकारी केवल चिकित्सकों या स्वास्थ्यकर्मियों तक सीमित नहीं होनी चाहिए। घर, स्कूल, कार्यालय, बाजार, सड़क और सार्वजनिक स्थानों पर मौजूद आम नागरिक भी यदि प्राथमिक चिकित्सा के बुनियादी नियमों से परिचित हों तो संकट की घड़ी में बड़ी मदद कर सकते हैं। सड़क दुर्घटना में घायल व्यक्ति को सुरक्षित स्थान पर पहुंचाना, अत्यधिक रक्तस्राव होने पर उचित तरीके से दबाव देना, जलने पर प्रभावित हिस्से को ठंडे बहते पानी से ठंडा करना और बेहोश व्यक्ति की स्थिति को समझते हुए तत्काल आपात चिकित्सा सहायता बुलाना जैसे कदम महत्वपूर्ण हो सकते हैं। हालांकि गंभीर चोट, सांस न आना, बेहोशी या अन्य जीवन-घातक स्थिति में प्रशिक्षित चिकित्सा सहायता को तुरंत बुलाना सबसे जरूरी है।
विश्व प्राथमिक चिकित्सा दिवस का संदेश केवल प्राथमिक उपचार सीखने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह समाज में जिम्मेदारी और संवेदनशीलता की भावना विकसित करने का भी अवसर है। अक्सर दुर्घटना के समय लोग घबराकर यह तय नहीं कर पाते कि क्या करें। ऐसे में थोड़ी-सी जानकारी, संयम और सही समय पर उठाया गया कदम किसी की जान बचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। इसलिए प्रत्येक परिवार में प्राथमिक चिकित्सा किट रखना और उसके उपयोग की बुनियादी जानकारी रखना आज की आवश्यकता है।
प्राथमिक चिकित्सा प्रशिक्षण में सीपीआर, रक्तस्राव को नियंत्रित करना, चोट और मोच में तत्काल सहायता, जलने की स्थिति में प्राथमिक उपचार, बेहोशी की स्थिति में सावधानियां तथा आपातकालीन सेवाओं से संपर्क करने जैसी जानकारियां शामिल होती हैं। बच्चों और युवाओं को भी उनकी उम्र के अनुरूप प्राथमिक चिकित्सा के बुनियादी सिद्धांतों से परिचित कराया जाना चाहिए, ताकि वे आवश्यकता पड़ने पर घबराने के बजाय समझदारी से सहायता कर सकें।
आज तेज रफ्तार जिंदगी में सड़क दुर्घटनाओं, घरेलू हादसों और विभिन्न आपात परिस्थितियों का खतरा बना रहता है। ऐसे में प्राथमिक चिकित्सा का ज्ञान समाज के प्रत्येक व्यक्ति के लिए उपयोगी है। यह हमें केवल उपचार की जानकारी नहीं देता, बल्कि मुश्किल समय में किसी दूसरे इंसान के साथ खड़े होने का साहस भी देता है।
विश्व प्राथमिक चिकित्सा दिवस पर संकल्प लिया जाना चाहिए कि हम स्वयं प्राथमिक चिकित्सा के आवश्यक कौशल सीखेंगे और अपने परिवार, मित्रों तथा आसपास के लोगों को भी इसके प्रति जागरूक करेंगे। क्योंकि आपात स्थिति में की गई छोटी-सी सहायता बड़ा बदलाव ला सकती है। सही समय पर दिया गया प्राथमिक उपचार किसी घायल व्यक्ति को सुरक्षित अस्पताल तक पहुंचने का अवसर दे सकता है और कई बार यही प्रयास जीवन और मृत्यु के बीच अंतर बन जाता है। हर जीवन की सुरक्षा हमारी जिम्मेदारी है और प्राथमिक चिकित्सा इस जिम्मेदारी को निभाने का एक महत्वपूर्ण माध्यम है।
डाॅ. संतोष कुमार सिंह ✍️
वरिष्ठ चिकित्सक, बलिया


