'श्रेयस की साहित्यशाला' में प्रख्यात भूगोलविद एवं साहित्यकार डॉ. गणेश कुमार पाठक के व्यक्तित्व-कृतित्व पर विशेष आलेख, जलवायु परिवर्तन, मानसून और साहित्य पर साझा किए विचार
बलिया। 'श्रेयस की साहित्यशाला' श्रृंखला के 35वें अंक में वरिष्ठ साहित्यकार राजेश सिंह 'श्रेयस' ने प्रख्यात भूगोलविद, पर्यावरणविद् एवं साहित्यकार डॉ. गणेश कुमार पाठक के व्यक्तित्व और कृतित्व पर विस्तृत आलेख प्रस्तुत किया है। उन्होंने कहा कि डॉ. पाठक अपने साहित्यिक लेखन के माध्यम से सामयिक विषयों और प्रकृति को जोड़कर साहित्य को नया आयाम प्रदान करते हैं।
राजेश 'श्रेयस' ने बताया कि 1857 के अमर क्रांतिवीर मंगल पांडेय की जन्मस्थली नगवा (बलिया) में जन्मे डॉ. गणेश कुमार पाठक भूगोल के विद्वान होने के साथ-साथ हिंदी के सशक्त साहित्यकार भी हैं। वे अमरनाथ मिश्र स्नातकोत्तर महाविद्यालय, दुबेछपरा के पूर्व प्राचार्य एवं भूगोल विभागाध्यक्ष, जननायक चंद्रशेखर विश्वविद्यालय के पूर्व शैक्षिक निदेशक तथा पूर्व लोकपाल रह चुके हैं। वर्तमान में वे जिला गंगा समिति, बलिया के सदस्य भी हैं।
आलेख में राजेश 'श्रेयस' ने डॉ. पाठक के साथ हुई विस्तृत बातचीत का उल्लेख करते हुए बताया कि उन्होंने बादलों की संरचना, मानसून, वर्षा, जलवायु परिवर्तन तथा पर्यावरण से जुड़े अनेक वैज्ञानिक तथ्यों को सरल भाषा में समझाया। डॉ. पाठक ने बताया कि बादलों के प्रकारों का अध्ययन कर वर्षा का पूर्वानुमान लगाया जा सकता है। उन्होंने कपासीय, पक्षाभ एवं स्तरीय बादलों की विशेषताओं के साथ मानसून की दिशा, समुद्री तटीय क्षेत्रों में अधिक वर्षा तथा लखनऊ जैसे क्षेत्रों में अपेक्षाकृत कम वर्षा के वैज्ञानिक कारण भी स्पष्ट किए।
जलवायु परिवर्तन पर चिंता व्यक्त करते हुए डॉ. पाठक ने कहा कि प्रकृति के साथ बढ़ती छेड़छाड़, वनों की कटाई और अनियोजित विकास के कारण मौसम का संतुलन बिगड़ रहा है। इसका परिणाम अत्यधिक गर्मी, असामान्य वर्षा, बेमौसम सर्दी और प्राकृतिक आपदाओं के रूप में सामने आ रहा है। उन्होंने यह भी बताया कि पहले सर्वाधिक वर्षा के लिए प्रसिद्ध चेरापूंजी की तुलना में अब मासिनराम में अधिक वर्षा दर्ज की जा रही है।
राजेश 'श्रेयस' ने डॉ. पाठक के विशाल निजी पुस्तकालय, उनके शोध कार्यों तथा साहित्यिक योगदान का भी उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि डॉ. पाठक की पर्यावरण, आपदा प्रबंधन, जलवायु परिवर्तन, प्रयोगात्मक भूगोल और ग्रामीण विकास जैसे विषयों पर प्रकाशित पुस्तकें शोधार्थियों के लिए अत्यंत उपयोगी हैं।
अपने आलेख के अंत में राजेश 'श्रेयस' ने कहा कि डॉ. गणेश कुमार पाठक जैसे विद्वान भूगोलविद एवं साहित्यकार का परिचय समाज के सामने प्रस्तुत करना उनके लिए गौरव का विषय है। उन्होंने कहा कि डॉ. पाठक का ज्ञान, सरल व्यक्तित्व और साहित्य के प्रति समर्पण नई पीढ़ी के लिए प्रेरणास्रोत है।
राजेश सिंह 'श्रेयस'वरिष्ठ साहित्यकार



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