मेहनत, समर्पण और संघर्ष की गौरवगाथा : भारतीय मजदूर संघ के स्थापना दिवस पर श्रम शक्ति को नमन


भारतीय मजदूर संघ स्थापना दिवस पर विशेष :-

23 जुलाई का दिन देश के सबसे बड़े श्रमिक संगठन भारतीय मजदूर संघ (BMS) के स्थापना दिवस के रूप में मनाया जाता है। यह दिवस उन करोड़ों श्रमिकों के अथक परिश्रम, त्याग और समर्पण को सम्मान देने का अवसर है, जिनके श्रम से राष्ट्र की प्रगति और विकास का पहिया निरंतर गतिमान रहता है। खेतों से लेकर कारखानों तक, निर्माण स्थलों से लेकर उद्योगों और सेवा क्षेत्रों तक हर श्रमिक देश की आर्थिक मजबूती का आधार है।

भारतीय मजदूर संघ की स्थापना 23 जुलाई 1955 को महान राष्ट्रवादी चिंतक एवं समाजसेवी दत्तोपंत ठेंगड़ी द्वारा की गई थी। संगठन का उद्देश्य केवल श्रमिकों के अधिकारों की रक्षा करना ही नहीं, बल्कि राष्ट्रहित, उद्योगहित और श्रमिक हित के बीच संतुलन स्थापित करना भी रहा है। भारतीय मजदूर संघ ने हमेशा संवाद, सहयोग और रचनात्मक समाधान के माध्यम से श्रमिकों की समस्याओं के निराकरण का मार्ग अपनाया है।

भारतीय मजदूर संघ का मूल मंत्र "देश के हित में करेंगे काम, काम के लेंगे पूरे दाम" श्रम के सम्मान और राष्ट्र निर्माण की भावना को सशक्त रूप से अभिव्यक्त करता है। संगठन का मानना है कि श्रमिक केवल मजदूरी करने वाला व्यक्ति नहीं, बल्कि राष्ट्र की उन्नति का निर्माता है। इसलिए श्रमिकों को सम्मानजनक जीवन, सुरक्षित कार्य वातावरण, उचित वेतन, सामाजिक सुरक्षा और विकास के समान अवसर मिलना आवश्यक है।

आज भारत तेज़ी से औद्योगिक, तकनीकी और आर्थिक विकास की ओर अग्रसर है। ऐसे समय में श्रमिकों की भूमिका और भी अधिक महत्वपूर्ण हो जाती है। आधुनिक भारत की हर उपलब्धि के पीछे लाखों श्रमिकों की मेहनत, लगन और समर्पण छिपा हुआ है। चाहे सड़कें हों, पुल, रेल, बिजली परियोजनाएँ, कारखाने या डिजिटल भारत का निर्माण—हर क्षेत्र में श्रमिकों का योगदान अमूल्य है।

स्थापना दिवस हमें यह भी प्रेरणा देता है कि श्रमिकों के अधिकारों के साथ-साथ उनके कर्तव्यों का भी सम्मान किया जाए। जब श्रम का सम्मान होगा, श्रमिक सुरक्षित और सशक्त होंगे, तभी आत्मनिर्भर भारत और विकसित भारत का सपना साकार होगा।

भारतीय मजदूर संघ स्थापना दिवस पर हम सभी मेहनतकश श्रमिकों, कर्मचारियों और कर्मयोगियों को नमन करते हैं। आइए, हम श्रम की गरिमा को सर्वोच्च स्थान दें, श्रमिकों के अधिकारों की रक्षा का संकल्प लें और उनके योगदान का सम्मान करते हुए राष्ट्र निर्माण की इस महान यात्रा में सहभागी बनें। यही स्थापना दिवस का वास्तविक संदेश और उद्देश्य है।

पंडित विजेंद्र शर्मा ✍️

जीराबस्ती, बलिया