बलिया : भिखारी ठाकुर ने कला को बनाया सामाजिक परिवर्तन का सशक्त माध्यम : आशीष त्रिवेदी


बलिया। महान लोकनाट्य सम्राट एवं जनकवि भिखारी ठाकुर की पुण्यतिथि पर शुक्रवार देर शाम संकल्प साहित्यिक, सामाजिक एवं सांस्कृतिक संस्था, बलिया द्वारा अमृत पाली स्थित कैम्प कार्यालय पर श्रद्धांजलि एवं सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में वक्ताओं ने भिखारी ठाकुर के व्यक्तित्व एवं कृतित्व पर प्रकाश डालते हुए उन्हें भारतीय लोकसंस्कृति का अमर प्रहरी बताया।

वरिष्ठ रंगकर्मी एवं रंग निर्देशक आशीष त्रिवेदी ने कहा कि भिखारी ठाकुर केवल लोक कलाकार नहीं, बल्कि सांस्कृतिक योद्धा थे। उन्होंने समाज में व्याप्त कुरीतियों, विसंगतियों और सामाजिक समस्याओं के विरुद्ध कला को अपना सबसे प्रभावी हथियार बनाया। अपने नाटकों और लोकगीतों के माध्यम से उन्होंने समाज को जागरूक किया तथा सामाजिक चेतना का अलख जगाया। उन्होंने कहा कि भिखारी ठाकुर की रचनाएँ आज भी समाज को नई दिशा और प्रेरणा देने का कार्य कर रही हैं।


डॉ. शुभनीत कौशिक ने कहा कि भिखारी ठाकुर के नाटक सामाजिक सरोकारों से गहराई से जुड़े हुए हैं। विशेष रूप से उनके साहित्य में स्त्री विमर्श, सामाजिक समानता और मानवीय संवेदनाओं का सशक्त चित्रण देखने को मिलता है। वहीं डॉ. अखिलेश सिन्हा ने उन्हें कालजयी रचनाकार बताते हुए कहा कि उनकी कृतियाँ समय की सीमाओं से परे आज भी उतनी ही प्रासंगिक हैं, जितनी उनके जीवनकाल में थीं।

इस अवसर पर संकल्प के रंगकर्मियों ट्विंकल गुप्ता, तुषार पांडेय, राहुल चौरसिया, रितिक गुप्ता, कृष्ण कुमार यादव 'मिट्ठू', पंकज कुमार, उत्कर्ष, रिया वर्मा, भाग्यलक्ष्मी एवं खुशी ने भिखारी ठाकुर के प्रसिद्ध नाटकों 'बिदेसिया', 'बेटी वियोग' और 'गबरघिचोर' के लोकप्रिय गीतों की संगीतमय प्रस्तुति देकर उपस्थित जनसमूह को भावविभोर कर दिया।

कार्यक्रम में डॉ. राजेन्द्र भारती, डॉ. कादम्बिनी सिंह, संजय मौर्य, शिवम् मिश्रा, अचिंत्य त्रिपाठी, अनुपम पाण्डेय, नन्दिनी सहित अनेक साहित्यकार, रंगकर्मी एवं सांस्कृतिक प्रेमी उपस्थित रहे। कार्यक्रम का संचालन संकल्प के सचिव आशीष त्रिवेदी ने किया।



Post a Comment

0 Comments