श्री शिव महापुराण कथा के छठे दिन उमड़ा आस्था का महासागर, शिव महिमा और गुरु तत्व का किया भावपूर्ण वर्णन
बलिया। बाबा बालखंडी नाथ धाम, दिउली में परिवहन मंत्री दयाशंकर सिंह के आयोजकत्व में चल रही श्री शिव महापुराण कथा के छठे दिन श्रद्धालुओं का अभूतपूर्व जनसैलाब उमड़ पड़ा। सुप्रसिद्ध कथावाचक पंडित प्रदीप मिश्रा ने शिव महिमा, गुरु भक्ति, आत्मज्ञान और समर्पण के विविध प्रसंगों का भावपूर्ण वर्णन करते हुए कहा कि भगवान शिव में ही मनुष्य का भाग्य बदलने की क्षमता है। अटूट गुरु भक्ति, दृढ़ संकल्प और शिव कृपा से जीवन सुखी, संस्कारवान, समृद्ध और सुंदर बन जाता है।
उन्होंने कहा कि जब मनुष्य के जीवन से दिखावा, अहंकार और आडंबर समाप्त होकर सहजता, सरलता और विनम्रता का प्रवेश होता है, तभी भोलेनाथ की कृपा उस पर बरसती है। शिव केवल पूजा से नहीं, बल्कि सच्चे भाव, श्रद्धा और निष्कपट भक्ति से प्रसन्न होते हैं।
मानव जीवन की महत्ता का उल्लेख करते हुए पंडित मिश्रा ने कहा कि 84 लाख योनियों में केवल मनुष्य योनि ही ऐसी है, जिसमें भगवान शिव का पूजन-अर्चन करने और एक लोटा जल अर्पित करने का दुर्लभ सौभाग्य प्राप्त होता है। उन्होंने कहा कि मनुष्य को इस अनमोल जीवन का सदुपयोग भक्ति, सेवा और सत्कर्मों में करना चाहिए।
वर्षा की बूंद का उदाहरण देते हुए उन्होंने बताया कि जिस प्रकार वर्षा की एक साधारण बूंद सीप में गिरकर मोती बन जाती है, उसी प्रकार भगवान शिव की कृपा से साधारण जीवन भी अनमोल और दिव्य बन सकता है। उन्होंने कहा कि शिव भक्ति मनुष्य के भीतर छिपी संभावनाओं को जागृत कर देती है।
समुद्र के गुणों का वर्णन करते हुए उन्होंने कहा कि समुद्र अनुपयोगी वस्तुओं को किनारे पर छोड़ देता है और बहुमूल्य रत्नों को अपने भीतर सुरक्षित रखता है। मनुष्य को भी इसी प्रकार दूसरों की अच्छाइयों, विश्वास और दुख-दर्द को अपने हृदय में स्थान देना चाहिए तथा नकारात्मकताओं को त्याग देना चाहिए।
कथा के दौरान पंडित मिश्रा ने भगवान शिव के दक्षिणामूर्ति स्वरूप का विस्तृत वर्णन किया। उन्होंने बताया कि सनक, सनंदन, सनातन और सनत्कुमार ऋषियों की जिज्ञासाओं का समाधान भगवान शिव ने मौन रहकर किया और आदिगुरु के रूप में आत्मज्ञान का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि वास्तविक ज्ञान शब्दों से नहीं, बल्कि साधना, चिंतन और आत्मानुभूति से प्राप्त होता है।
उपमन्यु ऋषि और पशुपति व्रत के प्रसंग का वर्णन करते हुए उन्होंने कहा कि बालक उपमन्यु की अटूट शिव भक्ति से प्रसन्न होकर भगवान शिव ने उन्हें अक्षय संपदा, ज्ञान और वैभव का वरदान दिया। आगे चलकर भगवान श्रीकृष्ण ने भी उपमन्यु ऋषि के निर्देश पर पशुपति व्रत का पालन किया और संतान सुख की प्राप्ति की।
ताड़कासुर के प्रसंग के माध्यम से उन्होंने बताया कि सच्चा भक्त केवल भगवान से पाने की कामना नहीं करता, बल्कि अपने आराध्य के लिए सर्वस्व समर्पित करने का भाव रखता है। ताड़कासुर का त्याग और समर्पण भगवान के प्रति भक्त की निष्ठा का अद्वितीय उदाहरण है।
कथा के समापन सत्र में भगवान श्रीगणेश एवं रिद्धि-सिद्धि विवाह प्रसंग का मनोहारी मंचन किया गया, जिसे देखकर श्रद्धालु भाव-विभोर हो उठे। कथा के दौरान पूरा पंडाल हर-हर महादेव और बम-बम भोले के जयघोष से गुंजायमान रहा।
इस अवसर पर राज्यसभा के उपसभापति हरिवंश नारायण सिंह, मंत्री मनोज पांडेय, परिवहन मंत्री दयाशंकर सिंह, मंत्री दयालु मिश्रा, पूर्व मंत्री नारद राय सहित अनेक जनप्रतिनिधियों और गणमान्य नागरिकों ने भगवान शिव की आरती कर क्षेत्र की सुख-समृद्धि की कामना की।
कल 15 जून होगा शिव महापुराण कथा का भव्य समापन
बलिया। श्री शिव महापुराण महाकथा का भव्य समापन सोमवार को प्रातः 8 बजे से 11 बजे तक होगा। समापन अवसर पर विशेष पूजा-अर्चना, पूर्णाहुति तथा विशाल भंडारे का आयोजन किया जाएगा, जिसमें हजारों श्रद्धालुओं के शामिल होने की संभावना है। आयोजकों ने श्रद्धालुओं से समय से पहुंचकर कथा के अंतिम दिवस का पुण्य लाभ प्राप्त करने की अपील की है।


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