बलिया : पंडित प्रदीप मिश्रा के आह्वान पर देशभर में हुआ पार्थिव शिवलिंग पूजन, परिवहन मंत्री दयाशंकर सिंह परिवार सहित हुए शामिल


बलिया। प्रसिद्ध शिव महापुराण कथावाचक पंडित प्रदीप मिश्रा जी के मार्गदर्शन में शनिवार 13 जून 2026 को देशभर में ऑनलाइन माध्यम से पार्थिव शिवलिंग का विधि-विधानपूर्वक पूजन संपन्न कराया गया। इस विशेष आध्यात्मिक आयोजन में उत्तर प्रदेश सरकार के परिवहन मंत्री दयाशंकर सिंह, उनकी माताजी तथा परिवार के अन्य सदस्यों ने श्रद्धापूर्वक भाग लेकर भगवान शिव की आराधना की। देश के विभिन्न राज्यों में लाखों शिवभक्तों ने अपने-अपने घरों में पार्थिव शिवलिंग स्थापित कर एक साथ पूजन-अर्चन कर भगवान भोलेनाथ का स्मरण किया।

ऑनलाइन प्रसारित इस सामूहिक पूजन कार्यक्रम में पंडित प्रदीप मिश्रा जी ने वैदिक मंत्रोच्चार, रुद्राभिषेक, जलाभिषेक, बेलपत्र अर्पण तथा शिव मंत्रों के जप के साथ श्रद्धालुओं को पूजन की संपूर्ण प्रक्रिया कराई। इस दौरान "ॐ नमः शिवाय" और "श्री शिवाय नमस्तुभ्यं" के जयघोष से वातावरण भक्तिमय हो उठा।


धार्मिक मान्यताओं के अनुसार पार्थिव शिवलिंग को भगवान शिव का अत्यंत दिव्य और प्रभावशाली स्वरूप माना जाता है। शास्त्रों में वर्णित है कि पार्थिव शिवलिंग का पूजन करने से घर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है तथा मानसिक शांति, सुख-समृद्धि और आध्यात्मिक उन्नति का मार्ग प्रशस्त होता है। श्रद्धालुओं का विश्वास है कि नियमित रूप से पार्थिव शिवलिंग की पूजा करने से व्यक्ति के जीवन में आने वाली अनेक बाधाएं दूर होती हैं और शिव कृपा प्राप्त होती है।

पंडित प्रदीप मिश्रा जी ने पूजन के दौरान कहा कि भगवान शिव अपने भक्तों की सच्ची श्रद्धा और भक्ति से शीघ्र प्रसन्न होते हैं। उन्होंने बताया कि पार्थिव शिवलिंग का पूजन केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि आत्मशुद्धि, सकारात्मक चिंतन और ईश्वर से जुड़ने का एक सशक्त माध्यम है। जब करोड़ों लोग एक साथ भगवान शिव का स्मरण करते हैं तो सामूहिक आध्यात्मिक ऊर्जा का निर्माण होता है, जिससे समाज में सद्भाव, शांति और सकारात्मकता का विस्तार होता है।

परिवहन मंत्री दयाशंकर सिंह एवं उनके परिवार ने भी पूर्ण श्रद्धा और आस्था के साथ पूजन कर प्रदेश एवं देश की सुख-समृद्धि, शांति तथा जनकल्याण की कामना की। पूजन उपरांत उन्होंने भगवान भोलेनाथ से सभी श्रद्धालुओं के मंगलमय जीवन एवं निरोगी काया की प्रार्थना की।

धार्मिक विद्वानों के अनुसार पार्थिव शिवलिंग पूजन का प्रमुख तात्पर्य भगवान शिव के प्रति समर्पण, आत्मिक शुद्धि और जीवन में आध्यात्मिक चेतना का जागरण है। मान्यता है कि इसके पूजन से मन की एकाग्रता बढ़ती है, नकारात्मक विचारों का क्षय होता है तथा व्यक्ति को आत्मविश्वास, धैर्य और मानसिक संतुलन प्राप्त होता है। यही कारण है कि देशभर के शिवभक्त इस प्रकार के सामूहिक पूजन कार्यक्रमों में बढ़-चढ़कर भाग लेते हैं।

ऑनलाइन आयोजित इस भव्य धार्मिक कार्यक्रम ने एक बार फिर यह सिद्ध कर दिया कि आधुनिक तकनीक के माध्यम से भी सनातन संस्कृति, धार्मिक परंपराओं और आध्यात्मिक मूल्यों को जन-जन तक प्रभावी ढंग से पहुंचाया जा सकता है। पूरे देश में आयोजित इस पार्थिव शिवलिंग पूजन ने श्रद्धालुओं के मन में भक्ति, विश्वास और शिव आराधना के प्रति नई ऊर्जा का संचार किया।

पूजन संपन्न होने के बाद पंडित प्रदीप मिश्रा जी ने श्रद्धालुओं को पार्थिव शिवलिंग विसर्जन की विधि भी बताई। उन्होंने कहा कि शास्त्रों के अनुसार पार्थिव शिवलिंग का पूजन करने के बाद उसका विधि-विधानपूर्वक विसर्जन करना आवश्यक होता है। श्रद्धालुओं ने अपने-अपने घरों में स्थापित पार्थिव शिवलिंग का पूजन पूर्ण होने के बाद स्वच्छ जलाशय, नदी, तालाब अथवा घर में रखे स्वच्छ जल पात्र में श्रद्धापूर्वक विसर्जन किया। उन्होंने बताया कि पार्थिव शिवलिंग मिट्टी से निर्मित होने के कारण पंचतत्व में विलीन होकर प्रकृति के प्रति सम्मान और समर्पण का संदेश देता है। विसर्जन के समय श्रद्धालुओं ने "ॐ नमः शिवाय" एवं "हर हर महादेव" का जयघोष करते हुए भगवान शिव से सुख, शांति, समृद्धि और कल्याण का आशीर्वाद मांगा। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार पार्थिव शिवलिंग का विधिपूर्वक पूजन एवं विसर्जन करने से भगवान शिव की विशेष कृपा प्राप्त होती है तथा जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।



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