*रैंकिंग सुधारों या जवाब दो, डीएम ने अधिकारियों को दिए सख्त निर्देश*
बलिया। जिलाधिकारी मंगला प्रसाद सिंह ने सोमवार को विकास भवन सभागार में सीएम डैशबोर्ड की समीक्षा की। जिसमें विभिन्न विभागों के कार्यों की प्रगति का आकलन किया। बैठक में जनवरी से अब तक के चार माह की रैंकिंग की समीक्षा की गई, जिसमें कई विभागों का प्रदर्शन संतोषजनक नहीं पाए जाने पर डीएम ने संबंधित अधिकारियों को कड़ी फटकार लगाई। उन्होंने समीक्षा के दौरान प्रधानमंत्री सूर्य घर मुक्त योजना, ग्राम्य विकास, मुख्यमंत्री आवास योजना (ग्रामीण), जननी सुरक्षा योजना, महिला एवं बाल विकास विभाग के पोषण अभियान तथा मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना की रैंकिंग ‘सी’ श्रेणी में पाई गई। वहीं कृषि विभाग के प्रीमियम आईडी, पंचायती राज विभाग और नई सड़कों के निर्माण कार्य की रैंकिंग ‘बी’ श्रेणी में दर्ज की गई। जिलाधिकारी ने कहा कि कई महत्वपूर्ण योजनाओं की रैंकिंग अपेक्षित स्तर तक नहीं पहुंची है, जो चिंता का विषय है। उन्होंने संबंधित विभागों के अधिकारियों को निर्देश दिया कि वे योजनाओं के क्रियान्वयन में तेजी लाएं और आगामी समीक्षा तक अपनी रैंकिंग को ‘ए’ श्रेणी में पहुंचाने के लिए प्रभावी कार्ययोजना बनाकर काम करें। डीएम ने स्पष्ट कहा कि शासन की प्राथमिकता वाली योजनाओं में किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। सभी अधिकारी नियमित मॉनिटरिंग करते हुए निर्धारित लक्ष्यों को समयबद्ध तरीके से पूरा करें, ताकि जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ पात्र लोगों तक प्रभावी ढंग से पहुंच सके। जिलाधिकारी ने सभी विभागों को आपसी समन्वय के साथ कार्य करने और सीएम डैशबोर्ड पर जिले की रैंकिंग में सुधार लाने के निर्देश दिए।
*14 निर्माणाधीन परियोजनाएं अधूरी मिलने पर जिलाधिकारी नाराज, कार्रवाई के दिए निर्देश*
*सीएम स्तर पर हो रही समीक्षा, देरी पर होगी कड़ी कार्रवाई : डीएम*
जिलाधिकारी ने 05 करोड़ रुपये से अधिक लागत वाली निर्माणाधीन एवं लंबित परियोजनाओं की कार्यों की प्रगति का जायजा लिया। उन्होंने समीक्षा के दौरान जिले में 14 परियोजनाएं अब तक अपूर्ण पाए जाने पर उन्होंने कड़ी नाराजगी व्यक्त की और संबंधित अधिकारियों कोजवाबदेही तय करने के निर्देश दिए। बैठक में प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र हरपुर, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र मनियर, पर्यटन विभाग की दो परियोजनाएं, कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय बेलहरी सहित कुल 14 परियोजनाओं के अधूरे होने की जानकारी सामने आई। इस पर जिलाधिकारी ने जिला अर्थ एवं संख्याधिकारी को निर्देशित किया कि संबंधित कार्यदायी संस्थाओं एवं विभागीय अधिकारियों के विरुद्ध कार्रवाई के लिए शासन स्तर पर पत्र भेजा जाए।
जिलाधिकारी ने कहा कि महत्वपूर्ण परियोजनाओं में अनावश्यक देरी किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं की जाएगी। उन्होंने स्पष्ट निर्देश दिए कि जिन अधिकारियों और कार्यदायी संस्थाओं की वजह से परियोजनाएं लंबित हैं, उनके खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की संस्तुति की जाए।
साथ ही समीक्षा के दौरान यह भी बताया गया कि जून 2026 के बाद विलंबित होने की श्रेणी में कुल चार परियोजनाएं हैं। इनमें परिवहन विभाग की एक, लोक निर्माण विभाग की दो तथा सिंचाई विभाग की एक परियोजना शामिल है। इस पर जिलाधिकारी ने संबंधित विभागों और कार्यदायी संस्थाओं को निर्देश दिया कि सभी परियोजनाओं को इसी माह के भीतर पूर्ण कराया जाए।उन्होंने कहा कि इन परियोजनाओं की समीक्षा स्वयं मुख्यमंत्री स्तर पर की जा रही है, इसलिए सभी कार्य निर्धारित समय-सीमा के भीतर और गुणवत्ता मानकों के अनुरूप पूरे किए जाएं। किसी भी प्रकार की लापरवाही या शिथिलता पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी। जिलाधिकारी ने सभी को समयबद्ध एवं गुणवत्तापूर्ण कार्य सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।
*आईजीआरएस शिकायतों के निस्तारण में लापरवाही पर डीएम सख्त, मांगा स्पष्टीकरण*
*आईजीआरएस पोर्टल पर गलत आख्या अपलोड करने पर विभाग को चेतावनी*
*फीडबैक प्रतिशत बढ़ाने के निर्देश, दो दिन में 70 फीसदी लक्ष्य*
जिलाधिकारी ने आईजीआरएस पोर्टल पर प्राप्त शिकायतों के निस्तारण और फीडबैक की प्रगति की समीक्षा की। समीक्षा के दौरान शिकायतकर्ताओं से फीडबैक न लेने तथा पोर्टल पर निस्तारण आख्या सही ढंग से अपलोड न किए जाने पर उन्होंने संबंधित विभागों के अधिकारियों को कड़ी फटकार लगाई। जिसमें जिला समाज कल्याण विभाग के 82, जिला पिछड़ा वर्ग कल्याण विभाग के 320, विद्युत विभाग के 102, जिला विद्यालय निरीक्षक कार्यालय के 16 तथा जिला पूर्ति विभाग के 68 मामलों में शिकायतकर्ताओं से फीडबैक नहीं लिया गया। इस पर जिलाधिकारी ने कड़ी नाराजगी व्यक्त करते हुए संबंधित अधिकारियों से स्पष्टीकरण तलब करने के निर्देश दिए। साथ ही बंदोबस्त अधिकारी कार्यालय के 16, लोक निर्माण विभाग के 26, जिला समाज कल्याण विभाग के 108 तथा विद्युत विभाग के 129 मामलों में शिकायतकर्ताओं ने फीडबैक के दौरान असंतोष जताया। इसके अलावा ग्राम्य विकास विभाग के सोहांव, पंदह और बेलहरी विकास खंडों, बाल विकास एवं पुष्टाहार विभाग के हनुमानगंज, मनियर और रेवती विकास खंडों तथा पंचायती राज विभाग के 14 विकास खंडों और बेसिक शिक्षा विभाग के छ: विकास खंडों में भी शिकायतकर्ताओं ने निस्तारण पर असंतोष व्यक्त किया। जिलाधिकारी ने कहा कि शिकायतों के निस्तारण के बाद शिकायतकर्ता की संतुष्टि सुनिश्चित करना संबंधित अधिकारियों की जिम्मेदारी है। शिकायतकर्ताओं की असंतुष्टि को गंभीर लापरवाही मानते हुए उन्होंने संबंधित अधिकारियों को चेतावनी दी और सुधारात्मक कार्रवाई के निर्देश दिए।
समीक्षा के दौरान सामुदायिक एवं प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र नगरा में तीन, रसड़ा में एक तथा पंदह में दो मामलों में शिकायतकर्ताओं द्वारा असंतोषजनक फीडबैक दिए जाने पर जिलाधिकारी ने नाराजगी जताई और संबंधित अधिकारियों को कारण बताओ नोटिस (शोकॉज नोटिस) जारी करने के निर्देश दिए। वहीं नगर पालिका विभाग द्वारा आईजीआरएस पोर्टल पर गलत निस्तारण आख्या अपलोड किए जाने का मामला सामने आने पर जिलाधिकारी ने कड़ी नाराजगी व्यक्त करते हुए विभाग को चेतावनी नोटिस जारी करने के निर्देश दिए।
जिलाधिकारी ने सभी विभागीय अधिकारियों को निर्देशित किया कि शिकायतों के निस्तारण के बाद शिकायतकर्ता से अनिवार्य रूप से फीडबैक लिया जाए तथा उसके साथ फोटो भी खींची जाए। निस्तारण आख्या के साथ कम से कम चार फोटो पोर्टल पर अपलोड करना सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने कहा कि जिन विभागों का फीडबैक प्रतिशत 50 से कम है, वे दो दिनों के भीतर इसे बढ़ाकर 70 प्रतिशत करें और इसकी रिपोर्ट प्रस्तुत करे।
जिलाधिकारी ने सख्त चेतावनी देते हुए कहा कि निस्तारण आख्या पर केवल सक्षम अधिकारी के हस्ताक्षर होने चाहिए। यदि किसी कर्मचारी द्वारा हस्ताक्षर कर आख्या पोर्टल पर अपलोड की गई और जांच में मामला सही पाया गया, तो संबंधित के विरुद्ध कठोर कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने कहा कि शिकायत निस्तारण की गुणवत्ता में किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। बैठक में सीडीओ ओजस्वी राज, एडीएम अनिल कुमार, डीडीओ आनंद प्रकाश एवं जिला स्तरीय अधिकारीगण उपस्थित रहे।


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