ज्येष्ठ माह के पावन मंगलवारों में मनाया जाने वाला बड़ा मंगल सनातन संस्कृति में विशेष महत्व रखता है। भगवान श्री हनुमान को समर्पित यह पर्व श्रद्धा, विश्वास, सेवा और जनकल्याण की भावना का प्रतीक माना जाता है। इस वर्ष 02 जून को पड़ रहा पांचवां बड़ा मंगल विशेष धार्मिक महत्व लिए हुए है। मान्यता है कि ज्येष्ठ माह के बड़े मंगल पर विधि-विधान से हनुमान जी की पूजा-अर्चना करने से सभी कष्टों का निवारण होता है तथा सुख, समृद्धि और सफलता की प्राप्ति होती है। इसी विश्वास के साथ आज प्रदेश भर के हनुमान मंदिरों में सुबह से ही श्रद्धालुओं का जनसैलाब उमड़ पड़ा है और पूरा वातावरण "जय श्रीराम" तथा "जय बजरंगबली" के जयघोष से भक्तिमय बना हुआ है।
उत्तर प्रदेश में बड़े मंगल का उत्सव विशेष रूप से धूमधाम और श्रद्धा के साथ मनाया जाता है। लखनऊ, वाराणसी, अयोध्या, प्रयागराज, गोरखपुर, बलिया सहित प्रदेश के अनेकों जनपदों में स्थित हनुमान मंदिरों में श्रद्धालु दर्शन-पूजन के लिए पहुंच रहे हैं। भक्तगण भगवान हनुमान को सिंदूर, चमेली का तेल, लाल चोला, लड्डू और अन्य प्रसाद अर्पित कर अपने परिवार की सुख-शांति, स्वास्थ्य और समृद्धि की कामना कर रहे हैं। मंदिरों में सुंदरकांड पाठ, हनुमान चालीसा, भजन-कीर्तन, अखंड रामायण पाठ और विशेष आरती का आयोजन किया जा रहा है, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालु भाग ले रहे हैं।
पांचवें बड़े मंगल की सबसे बड़ी विशेषता सेवा, परोपकार और सामाजिक समरसता की भावना है। इस अवसर पर प्रदेश के अनेकों जनपदों में सामाजिक संगठनों, धार्मिक संस्थाओं, व्यापारिक प्रतिष्ठानों तथा श्रद्धालुओं द्वारा जगह-जगह, प्रमुख चौराहों, बाजारों और सार्वजनिक स्थलों पर विशाल भंडारों का आयोजन बड़े धूमधाम और श्रद्धा के साथ किया जाता है। इन भंडारों में श्रद्धालुओं और राहगीरों को पूरी, सब्जी, खीर, हलवा, बूंदी, लड्डू, छोला-चावल, शरबत, फल तथा अन्य अनेक प्रकार के स्वादिष्ट पकवान प्रसाद स्वरूप वितरित किए जाते हैं। इन आयोजनों की विशेषता यह होती है कि यहां समाज के हर वर्ग, हर आयु और हर समुदाय के लोग एक साथ बैठकर प्रसाद ग्रहण करते हैं, जिससे सामाजिक एकता और भाईचारे का संदेश भी मजबूत होता है।
भीषण गर्मी के इस मौसम में जगह-जगह ठंडे पानी, शरबत, बेल के रस, आम पना और अन्य पेय पदार्थों के वितरण की व्यवस्था भी की जाती है। सेवा भाव से ओत-प्रोत स्वयंसेवक पूरे दिन श्रद्धालुओं और राहगीरों की सेवा में लगे रहते हैं। बड़े मंगल के भंडारे केवल भोजन वितरण तक सीमित नहीं होते, बल्कि यह भारतीय संस्कृति की उस परंपरा का जीवंत उदाहरण हैं, जिसमें मानव सेवा को ही ईश्वर सेवा माना गया है।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार भगवान हनुमान शक्ति, साहस, निष्ठा, समर्पण और निस्वार्थ सेवा के प्रतीक हैं। बड़े मंगल के दिन उनकी आराधना करने से भय, रोग, संकट और बाधाओं का नाश होता है तथा जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। श्रद्धालुओं का विश्वास है कि संकटमोचन हनुमान अपने भक्तों की हर कठिनाई में रक्षा करते हैं और उन्हें सही मार्ग पर चलने की प्रेरणा देते हैं। यही कारण है कि बड़े मंगल के अवसर पर हर वर्ग के लोग पूरी आस्था और श्रद्धा के साथ इस पर्व में सहभागी बनते हैं।
आज पांचवें बड़े मंगल पर मंदिरों की विशेष सजावट, धार्मिक अनुष्ठान और विशाल भंडारों के माध्यम से पूरे प्रदेश में भक्ति और सेवा का अद्भुत संगम देखने को मिल रहा है। यह पर्व केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक नहीं, बल्कि सामाजिक सद्भाव, परोपकार और मानवता की सेवा का भी संदेश देता है। बड़े मंगल हमें यह प्रेरणा देता है कि सच्ची भक्ति केवल पूजा-अर्चना में नहीं, बल्कि जरूरतमंदों की सहायता, समाज की सेवा और जनकल्याण के कार्यों में भी निहित है।
पांचवां बड़ा मंगल आज पूरे उत्तर प्रदेश में श्रद्धा, भक्ति, सेवा और सामाजिक एकता के महापर्व के रूप में मनाया जा रहा है, जहां बजरंगबली की कृपा प्राप्त करने के साथ-साथ मानवता की सेवा को भी सर्वोच्च धर्म माना जा रहा है।
अजय कुमार सिंह ✍️
बलिया (उ.प्र.)



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