106 बाढ़ प्रभावित रेड जोन गांवों में विशेष तैयारी के निर्देश
कटान पीड़ित किसानों को तत्काल मुआवजा देने का आदेश
राहत केंद्रों से लेकर मेडिकल टीम और एनडीआरएफ तक हर व्यवस्था दुरुस्त रखने के निर्देश
बलिया। जिले में संभावित बाढ़ और नदी कटान की चुनौती को देखते हुए जिला प्रशासन पूरी तरह अलर्ट मोड में आ गया है। गुरुवार को कलेक्ट्रेट सभागार में जिलाधिकारी मंगला प्रसाद सिंह की अध्यक्षता में आयोजित उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक में बाढ़ राहत एवं बचाव तैयारियों की विस्तृत समीक्षा की गई। बैठक में डीएम ने स्पष्ट निर्देश दिए कि किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी और सभी विभाग समयबद्ध तरीके से अपनी जिम्मेदारियां पूरी करें।
जिलाधिकारी ने बताया कि बेल्थरारोड, सिकंदरपुर, बांसडीह, बलिया सदर तथा बैरिया तहसीलों के कुल 106 गांव बाढ़ प्रभावित रेड जोन में चिन्हित किए गए हैं। संबंधित खंड विकास अधिकारियों को निर्देशित किया गया कि वे सभी गांवों का पूर्व भ्रमण कर राहत केंद्रों के लिए उपयुक्त स्थान चिन्हित करें तथा हर स्तर पर तैयारियां पूरी रखें, ताकि आपदा की स्थिति में लोगों को तत्काल राहत उपलब्ध कराई जा सके।
बैठक में घाघरा एवं गंगा नदी से हो रहे कटान की भी गंभीरता से समीक्षा की गई। बैरिया तहसील के वशिष्ठ नगर, गोपालनगर टाड़ी और सिवान मठिया, बांसडीह तहसील के भोजपुरवा, महाराजपुर और चांदपुर तथा सिकंदरपुर तहसील के दियरा बंसीदास, बिजलीपुर दियारा महाराजपुरा, निपनिया और डूहा बिहरा सहित कई गांवों में कटान की गंभीर स्थिति पर विशेष चिंता व्यक्त की गई।
डीएम ने संबंधित एसडीएम एवं लेखपालों को निर्देश दिया कि जिन किसानों की भूमि नदी कटान में समा चुकी है, उन्हें तत्काल मुआवजा उपलब्ध कराया जाए। लेखपालों को प्रतिदिन कटान की अद्यतन रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश देते हुए उन्होंने कहा कि राहत वितरण और मुआवजा भुगतान में किसी भी प्रकार की देरी या लापरवाही पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
सिंचाई विभाग को तटबंधों की मरम्मत, जल निकासी, नालों एवं चैनलों की सफाई तथा सिल्ट हटाने के कार्यों की दैनिक प्रगति रिपोर्ट उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए। वहीं बैरिया के गोपालनगर टाड़ी में घाघरा नदी में बह चुके तीन मकानों के प्रभावित परिवारों को तत्काल भूमि का पट्टा, प्रधानमंत्री आवास योजना का लाभ एवं मुआवजा उपलब्ध कराने का आदेश दिया गया।
बांसडीह तहसील के भोजपुरवा गांव में घाघरा नदी में बह चुकी 25 वर्ष पुरानी पानी की टंकी के स्थान पर शुद्ध पेयजल की वैकल्पिक व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश जल निगम को दिए गए। साथ ही बेसिक शिक्षा अधिकारी को नदी में समाए विद्यालय के नौ शिक्षकों की सूची उपलब्ध कराने तथा पंचायत भवन में संचालित कक्षाओं में मिड-डे मील व्यवस्था की जांच कर रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए।
बाढ़ राहत तैयारियों के तहत प्रत्येक प्रभावित गांव में राहत केंद्र स्थापित किए जाएंगे। इन केंद्रों पर जनरेटर, भोजन बनाने के लिए हलवाई, हैंडपंप, नाव, लाइफ जैकेट, पेयजल एवं अन्य आवश्यक संसाधनों की उपलब्धता सुनिश्चित करने को कहा गया। प्रत्येक नाव पर दो लाइफ जैकेट तथा "जिला प्रशासन बलिया" अंकित झंडा लगाने के भी निर्देश दिए गए।
जिलाधिकारी ने जिला पूर्ति अधिकारी को पर्याप्त खाद्यान्न का अग्रिम भंडारण सुनिश्चित करने, मुख्य चिकित्साधिकारी को मेडिकल टीम, मोबाइल मेडिकल यूनिट, एंबुलेंस और प्राथमिक उपचार किट तैयार रखने तथा पशु चिकित्सा विभाग को पशुओं के सुरक्षित ठहराव एवं चारे की समुचित व्यवस्था करने के निर्देश दिए।
इसके अलावा सभी एसडीएम को तहसील स्तर पर बाढ़ कंट्रोल रूम स्थापित करने तथा आवश्यक कर्मचारियों की तैनाती सुनिश्चित करने का आदेश दिया गया। ग्राम पंचायत भवनों एवं अन्य सार्वजनिक स्थानों पर कंट्रोल रूम के संपर्क नंबर पेंट कराए जाएंगे, ताकि आपात स्थिति में ग्रामीण तुरंत सहायता प्राप्त कर सकें। लोक निर्माण विभाग को बाढ़ प्रभावित मार्गों का निरीक्षण करने तथा सभी बीडीओ को लाउडस्पीकर की व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए, जिससे समय रहते लोगों को सतर्क किया जा सके।
जिलाधिकारी ने बताया कि जिले में बाढ़ राहत एवं बचाव कार्यों के प्रभावी संचालन के लिए तीन विशेष समितियों का गठन किया जाएगा। साथ ही एनडीआरएफ एवं पीएसी की टीमें भी पूरी तरह तैयार रखी गई हैं, ताकि किसी भी आपात स्थिति में तत्काल राहत एवं बचाव अभियान शुरू किया जा सके।
बैठक में मुख्य विकास अधिकारी आलोक कुमार, डीडीओ आनंद प्रकाश, एडीएम अनिल कुमार, सिटी मजिस्ट्रेट आसाराम वर्मा, सभी उपजिलाधिकारी, सभी खंड विकास अधिकारी एवं संबंधित विभागों के जिला स्तरीय अधिकारी उपस्थित रहे। बैठक में प्रशासन ने स्पष्ट संदेश दिया कि बाढ़ से जन-धन की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है और हर विभाग को पूरी जिम्मेदारी एवं सतर्कता के साथ कार्य करना होगा।


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