बाबा बालखंडी नाथ धाम में सात दिवसीय शिव महापुराण कथा का भव्य समापन, श्रद्धालुओं की नम आंखों के बीच गूंजा— “अभी न जाओ छोड़कर बाबा”
परिवहन मंत्री दयाशंकर सिंह ने की घोषणा, पंजीकृत श्रद्धालुओं के घर पहुंचाया जाएगा एक लोटा गंगाजल
बलिया। बाबा बालखंडी नाथ धाम, दिउली में परिवहन मंत्री दयाशंकर सिंह के तत्वावधान में आयोजित सात दिवसीय श्री शिव महापुराण कथा का रविवार को भक्ति, श्रद्धा और भावनाओं के अद्भुत संगम के बीच भव्य समापन हो गया। कथा के अंतिम दिन लाखों श्रद्धालुओं का जनसैलाब उमड़ पड़ा। कथा के विश्राम की बेला में वातावरण भावुक हो उठा और श्रद्धालुओं की आंखें नम हो गईं। पूरे पंडाल में “अभी न जाओ छोड़कर बाबा” का स्वर गूंजता रहा।
अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त कथावाचक पंडित प्रदीप मिश्रा ने अपने अंतिम प्रवचन में कहा कि संसार रूपी भवसागर से मुक्ति पाने का सबसे सरल और प्रभावी मार्ग भगवान शिव की भक्ति है। उन्होंने कहा कि जैसे जेब में रखा धन किसी भी यात्रा को सुगम बना देता है, उसी प्रकार हृदय में भगवान शिव का वास जीवन की कठिन से कठिन यात्रा को सरल बनाकर मनुष्य को मोक्ष की ओर ले जाता है। उन्होंने कहा कि जो व्यक्ति शिव भक्ति रूपी तैरना सीख लेता है, वह जीवन की किसी भी परिस्थिति में डूबता नहीं, बल्कि सहजता से भवसागर को पार कर जाता है।
कथा के दौरान पंडित मिश्रा ने भगवान कार्तिकेय की श्रीशैलम पर्वत यात्रा का प्रसंग सुनाते हुए बताया कि प्रकृति के प्रत्येक कण में ईश्वर का वास है। वन, पर्वत, पशु-पक्षी और समस्त सृष्टि भगवान की उपस्थिति का अनुभव कराते हैं। उन्होंने कहा कि 84 लाख योनियों में मानव जीवन ही ऐसा दुर्लभ अवसर है, जिसमें भक्ति और साधना के माध्यम से मोक्ष प्राप्त किया जा सकता है।
सोशल मीडिया पर भृगु ऋषि की जन्मभूमि को लेकर उठे प्रश्नों का उत्तर देते हुए उन्होंने कहा कि मनुष्य के केवल शारीरिक जन्म ही नहीं होते, बल्कि साधना, तपस्या और सिद्धि की प्राप्ति भी एक प्रकार का आध्यात्मिक जन्म है। जिस भूमि पर भृगु ऋषि ने तप कर सिद्धि प्राप्त की, वह भूमि भी उनकी जन्मभूमि के समान ही पूजनीय है। इसी आधार पर बलिया को महर्षि भृगु की जन्मस्थली के रूप में सम्मान प्राप्त है।
उन्होंने सात संख्या के आध्यात्मिक महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि सप्ताह के सात दिन, भगवान श्रीकृष्ण द्वारा सात दिनों तक गोवर्धन पर्वत धारण करना और धार्मिक कथाओं का सात दिवसीय स्वरूप कोई संयोग नहीं, बल्कि सनातन परंपरा की गहन आध्यात्मिक व्यवस्था का हिस्सा है। भगवान को पूर्ण समर्पण प्रिय है और सच्ची श्रद्धा से की गई पूजा को वे संपूर्ण रूप से स्वीकार करते हैं।
राजा दक्ष और देवर्षि नारद के प्रसंगों का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि भगवान का अपमान करने अथवा उन्हें चुनौती देने का प्रयास करने वालों को अंततः उसके दुष्परिणाम भुगतने पड़ते हैं। शिव कृपा केवल उसी पर बरसती है, जो अहंकार छोड़कर भक्ति और समर्पण का मार्ग अपनाता है।
कथा के समापन अवसर पर परिवहन मंत्री दयाशंकर सिंह ने पंडित प्रदीप मिश्रा का आभार व्यक्त करते हुए घोषणा की कि अधिक मास वर्ष 2029 में एक बार फिर उनके श्रीमुख से बाबा बालखंडी नाथ धाम में शिव महापुराण कथा का आयोजन कराया जाएगा। उन्होंने प्रदेश सरकार के मंत्री डॉ. संजय निषाद, मंत्री विजय लक्ष्मी गौतम, वाराणसी से पधारे जगद्गुरु 1008 सतुआ बाबा तथा जिला सहकारी बैंक उन्नाव के चेयरमैन अरुण सिंह का स्वागत एवं अभिनंदन किया।
परिवहन मंत्री ने कथा के लिए पंजीकरण कराने वाले सभी श्रद्धालुओं के घर निःशुल्क एक लोटा गंगाजल पहुंचाने की घोषणा कर उपस्थित जनसमूह को भावविभोर कर दिया। उन्होंने कहा कि कथा का पुण्य प्रसाद हर श्रद्धालु तक पहुंचे, यही उनका संकल्प है।
कथा के विश्राम से पूर्व पंडित प्रदीप मिश्रा ने चंचूला के पति बिन्दुक की मुक्ति, द्वादश ज्योतिर्लिंगों के प्राकट्य और उनके नामकरण का संक्षिप्त वर्णन किया। भगवान भोलेनाथ की भव्य आरती और जयघोष के साथ सात दिवसीय श्री शिव महापुराण कथा का विधिवत समापन हुआ।
सात दिनों तक चले इस विराट आध्यात्मिक आयोजन में लाखों श्रद्धालुओं ने भाग लेकर शिव कृपा का आशीर्वाद प्राप्त किया। समापन के बाद भी पूरे क्षेत्र में "हर-हर महादेव" और "श्री शिवाय नमस्तुभ्यं" का जयघोष देर तक गूंजता रहा, जिससे बाबा बालखंडी नाथ धाम का वातावरण पूर्णतः शिवमय बना रहा।






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