अयोध्या में नहीं, हर भक्त के हृदय में होता है श्रीराम का जन्म : राजन जी महाराज


श्रीराम जन्मोत्सव प्रसंग पर उमड़ा आस्था का सैलाब, कथा पंडाल में गूंजते रहे जय श्रीराम के उद्घोष

बांसडीह/बेरूआरबारी (बलिया)। भगवान दास मंदिर, करीहरा के पावन परिसर में बाबा अमरनाथ सेवा समिति एवं बांसडीह विधायक केतकी सिंह के संयोजन में आयोजित भव्य श्रीराम कथा महोत्सव के चौथे दिन श्रद्धा, भक्ति और आध्यात्मिक चेतना का अद्भुत संगम देखने को मिला। अंतरराष्ट्रीय ख्यातिप्राप्त कथा वाचक राजन जी महाराज ने भगवान श्रीराम के जन्मोत्सव प्रसंग का ऐसा भावपूर्ण एवं ओजस्वी वर्णन किया कि पूरा कथा पंडाल भक्तिरस में सराबोर हो गया। श्रीराम जन्म की कथा सुनते-सुनते श्रद्धालु भावविभोर हो उठे और "जय श्रीराम" के गगनभेदी उद्घोष से पूरा क्षेत्र गुंजायमान हो गया।

राजन जी महाराज ने कहा कि भगवान श्रीराम का जन्म केवल अयोध्या में नहीं हुआ था, बल्कि जब-जब किसी मनुष्य के हृदय में सत्य, मर्यादा, करुणा, त्याग और धर्म का भाव जागृत होता है, तब-तब वहां श्रीराम का जन्म होता है। उन्होंने कहा कि श्रीराम भारतीय संस्कृति के केवल आराध्य नहीं, बल्कि आदर्श जीवन के सर्वोच्च प्रतीक हैं। उनका जीवन मानवता के लिए प्रेरणा और मर्यादा का सर्वोत्तम उदाहरण है।


कथा व्यास ने श्रीराम जन्म प्रसंग का वर्णन करते हुए कहा कि माता कौशल्या, महाराज दशरथ और गुरु वशिष्ठ को यह अनुभूति हो चुकी थी कि उनके घर जन्म लेने वाला बालक कोई साधारण राजकुमार नहीं, बल्कि स्वयं परमब्रह्म का अवतार है। फिर भी उन्होंने अपने जीवन में कभी अहंकार को स्थान नहीं दिया और धर्म, कर्तव्य तथा मर्यादा के आदर्शों का पालन करते हुए संसार को जीवन जीने की सही दिशा दिखाई।

उन्होंने कहा कि भगवान जब अवतार लेते हैं तो केवल अधर्म का नाश करने के लिए नहीं आते, बल्कि मानव समाज को प्रेम, सेवा, त्याग, कर्तव्य और सदाचार का संदेश देने के लिए भी आते हैं। श्रीराम का सम्पूर्ण जीवन इस बात का प्रमाण है कि शक्ति से अधिक महत्वपूर्ण मर्यादा होती है और अधिकार से अधिक महत्वपूर्ण कर्तव्य होता है।


अपने प्रेरक उद्बोधन में राजन जी महाराज ने जीवन की वास्तविकता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि मनुष्य के अधिकांश दुख, विवाद और तनाव उसके अहंकार और मोह के कारण उत्पन्न होते हैं। यदि व्यक्ति यह स्वीकार कर ले कि एक दिन उसे इस संसार को छोड़कर जाना है, तो उसके भीतर का क्रोध, ईर्ष्या, द्वेष और वैमनस्य स्वतः समाप्त हो जाएगा। मृत्यु का स्मरण मनुष्य को विनम्र बनाता है और उसे प्रेम, सद्भाव तथा सेवा के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देता है।

उन्होंने कहा कि आज समाज में बढ़ती कटुता और विभाजन की भावना को समाप्त करने के लिए श्रीराम के आदर्शों को अपनाना समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है। जब तक मनुष्य अपने भीतर रामत्व का विकास नहीं करेगा, तब तक वास्तविक सुख और शांति प्राप्त नहीं हो सकती।


कथा के दौरान श्रीराम जन्मोत्सव की झांकी प्रस्तुत होते ही पूरा पंडाल भक्तिमय हो उठा। श्रद्धालु भक्ति में डूबकर नृत्य करने लगे और वातावरण श्रीराम के जयघोषों से गुंजायमान हो गया। कथा स्थल पर हजारों श्रद्धालुओं की उपस्थिति ने आयोजन को एक भव्य आध्यात्मिक महोत्सव का स्वरूप प्रदान कर दिया।

इस अवसर पर बांसडीह विधायक केतकी सिंह, पूर्व विधायक शिवशंकर चौहान, राकेश सिंह, राना कुनाल सिंह, विश्राम सिंह, कौशल मिश्र सहित अनेक गणमान्य नागरिक एवं क्षेत्र के हजारों श्रद्धालु उपस्थित रहे। कथा के समापन पर श्रद्धालुओं ने भगवान श्रीराम की आरती में भाग लेकर सुख, शांति और समृद्धि की कामना की।



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