*फरवरी-मार्च के टेन्योर ट्रांसफर जून तक अधर में, कर्मचारियों ने तबादले स्थगित करने की उठाई मांग*
नई दिल्ली। रेलवे सुरक्षा बल (आरपीएफ) में पारदर्शिता और सुव्यवस्थित स्थानांतरण व्यवस्था के उद्देश्य से लागू किया गया ट्रांसफर मैनेजमेंट मॉड्यूल (टीएमएम) अब कर्मचारियों के लिए गंभीर चिंता का विषय बनता जा रहा है।
फरवरी-मार्च 2026 में प्रस्तावित वार्षिक टेन्योर स्थानांतरण जून माह में भी पूरे नहीं हो सके हैं, जिससे हजारों आरपीएफ कर्मी और उनके परिवार असमंजस की स्थिति में हैं।
सबसे अधिक असर बच्चों की शिक्षा पर पड़ रहा है, क्योंकि नया शैक्षणिक सत्र शुरू होने के बाद भी स्थानांतरण प्रक्रिया अधूरी है।
आरपीएफ कर्मियों का कहना है कि टीएमएम प्रणाली अर्धसैनिक बलों की कार्यप्रणाली को ध्यान में रखकर तैयार की गई प्रतीत होती है, जबकि आरपीएफ की संरचना और जिम्मेदारियां उनसे पूरी तरह भिन्न हैं।
रेलवे सुरक्षा, अपराध नियंत्रण, खुफिया गतिविधियों और यात्रियों की सुरक्षा जैसे बहुआयामी दायित्वों के कारण आरपीएफ में मानव संसाधन प्रबंधन कहीं अधिक जटिल है। ऐसे में तकनीकी खामियों और प्रशासनिक देरी के कारण स्थानांतरण प्रक्रिया लगातार विवादों में बनी हुई है।
कर्मचारियों का कहना है कि बच्चों के नए स्कूलों में प्रवेश, फीस, पुस्तकें और यूनिफॉर्म पर पहले ही भारी खर्च हो चुका है। यदि अब स्थानांतरण आदेश जारी किए जाते हैं तो उन्हें न केवल सरकारी आवास छोड़ना पड़ेगा, बल्कि नए स्थान पर बच्चों के लिए विद्यालय तलाशने और दोबारा प्रवेश कराने की कठिन चुनौती का भी सामना करना होगा।
कई प्रतिष्ठित विद्यालयों में प्रवेश प्रक्रिया बंद हो चुकी है, जिससे अभिभावकों की चिंता और बढ़ गई है।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस स्तर की प्रशासनिक देरी से कर्मचारियों का मनोबल प्रभावित होता है।
पारिवारिक अस्थिरता और भविष्य की अनिश्चितता का सीधा असर जवानों की कार्यक्षमता पर पड़ सकता है। साथ ही, विलंबित स्थानांतरणों से रेलवे को करोड़ों रुपये अतिरिक्त ट्रांसफर अलाउंस और यात्रा भत्ते के रूप में खर्च करने पड़ सकते हैं।
इन परिस्थितियों को देखते हुए आरपीएफ कर्मियों ने रेलवे बोर्ड और आरपीएफ महानिदेशालय से मांग की है कि वर्ष 2026 के लंबित टेन्योर स्थानांतरणों को फिलहाल स्थगित अथवा निरस्त किया जाए तथा भविष्य में स्थानांतरण प्रक्रिया को शैक्षणिक सत्र शुरू होने से पहले समयबद्ध तरीके से पूरा करने की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए।
कर्मचारियों का कहना है कि मानवीय संवेदनाओं और व्यावहारिक जरूरतों को ध्यान में रखकर लिया गया निर्णय ही संगठन के मनोबल और विश्वास को बनाए रख सकता है।


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