बलिया : राष्ट्रीय लोक अदालत में रिकॉर्ड 55,590 वादों का निस्तारण, 19 करोड़ से अधिक की समझौता धनराशि तय


बलिया। माननीय राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण, नई दिल्ली एवं उ०प्र० राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण, लखनऊ के निर्देशानुसार शनिवार को जनपद न्यायालय परिसर, बलिया में राष्ट्रीय लोक अदालत का भव्य आयोजन किया गया। राष्ट्रीय लोक अदालत का उद्घाटन माननीय न्यायमूर्ति डॉ. गौतम चौधरी, प्रशासनिक न्यायमूर्ति (सेशन डिवीजन), उच्च न्यायालय इलाहाबाद द्वारा दीप प्रज्ज्वलित कर एवं मां सरस्वती के चित्र पर माल्यार्पण कर किया गया।


उद्घाटन अवसर पर जनपद न्यायाधीश बलिया श्री अनिल कुमार झा, प्रधान न्यायाधीश परिवार न्यायालय श्री अश्वनी कुमार दूबे, पीठासीन अधिकारी मोटर दुर्घटना दावा अधिकरण श्री संजीव कुमार तिवारी, नोडल अधिकारी लोक अदालत श्री प्रथम कान्त, जिलाधिकारी श्री मंगला प्रसाद सिंह, पुलिस अधीक्षक डॉ. ओमवीर सिंह, क्रिमिनल बार एसोसिएशन के अध्यक्ष श्री देवेन्द्र कुमार मिश्र तथा सिविल बार एसोसिएशन के अध्यक्ष श्री जितेन्द्र बहादुर सिंह सहित न्यायिक अधिकारी, अधिवक्तागण, बैंक अधिकारी, कर्मचारी, पीएलवी एवं बड़ी संख्या में वादकारी उपस्थित रहे। कार्यक्रम का संचालन जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के सचिव श्री चन्द्र प्रकाश तिवारी द्वारा किया गया।


माननीय न्यायमूर्ति डॉ. गौतम चौधरी ने लोक अदालत के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि लोक अदालतें आमजन को त्वरित, सरल एवं सस्ता न्याय उपलब्ध कराने का प्रभावी माध्यम हैं। उन्होंने कहा कि सुलह-समझौते के माध्यम से विवादों का समाधान सामाजिक सौहार्द को मजबूत करता है तथा न्यायालयों में लंबित मामलों का बोझ भी कम होता है। उन्होंने न्यायिक एवं राजस्व विभाग के बीच बेहतर समन्वय पर बल देते हुए न्याय व्यवस्था में नैतिकता एवं मानवीय मूल्यों की आवश्यकता को रेखांकित किया। साथ ही उन्होंने न्यायिक कार्यों में हिन्दी भाषा के अधिकतम प्रयोग हेतु अधिकारियों को प्रेरित किया।


जनपद न्यायाधीश श्री अनिल कुमार झा ने अपने संबोधन में कहा कि न्याय व्यवस्था को अधिक मानवीय, सरल और सुलभ बनाने की दिशा में लोक अदालतों की महत्वपूर्ण भूमिका है। उन्होंने न्यायिक अधिकारियों से न्याय को सामाजिक उत्थान और जनहित के उद्देश्य से जोड़कर कार्य करने का आह्वान किया।


राष्ट्रीय लोक अदालत में दीवानी, फौजदारी, वैवाहिक, मोटर दुर्घटना, बैंक, विद्युत, राजस्व एवं उपभोक्ता विवादों सहित विभिन्न प्रकार के मामलों का निस्तारण किया गया। जनपद न्यायाधीश न्यायालय में 4 सिविल एवं 2 आर्बिट्रेशन वादों का निस्तारण करते हुए 2 लाख 18 हजार रुपये की समझौता धनराशि तय की गई। मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट न्यायालय में सर्वाधिक 2,771 फौजदारी मामलों का निस्तारण हुआ तथा 4 लाख 88 हजार 200 रुपये अर्थदण्ड के रूप में वसूले गए।

विशेष न्यायालयों, सिविल न्यायालयों एवं ग्राम न्यायालयों में भी बड़ी संख्या में मामलों का निस्तारण किया गया। सिविल न्यायालयों द्वारा कई मामलों में उत्तराधिकार प्रमाण पत्र जारी किए गए, जिनकी कुल धनराशि 1 करोड़ 68 लाख 19 हजार 463 रुपये से अधिक रही। विभिन्न न्यायालयों में फौजदारी मामलों में अर्थदण्ड तथा समझौता राशि के रूप में लाखों रुपये की वसूली की गई।

परिवार न्यायालय द्वारा 20 वैवाहिक वादों का निस्तारण किया गया, जबकि मोटर दुर्घटना दावा अधिकरण द्वारा 9 मामलों में 90 लाख 80 हजार 656 रुपये का प्रतिकर प्रदान किया गया। उपभोक्ता फोरम द्वारा 6 मामलों का निस्तारण करते हुए 11 लाख 6 हजार रुपये की प्रतिकर धनराशि निर्धारित की गई।

राजस्व विभाग द्वारा 26,271 मामलों का निस्तारण किया गया, जबकि विद्युत विभाग ने 24,606 मामलों का समाधान कर 12 करोड़ 71 लाख 97 हजार 788 रुपये की समझौता धनराशि तय की। बैंकों द्वारा 747 प्री-लिटिगेशन मामलों का निस्तारण कर 3 करोड़ 56 लाख 38 हजार 596 रुपये की समझौता धनराशि निर्धारित की गई तथा मौके पर ही 1 करोड़ 76 लाख 50 हजार 283 रुपये की वसूली की गई। दूरसंचार विभाग द्वारा भी 7 प्री-लिटिगेशन मामलों का निस्तारण कर 1 लाख 9 हजार 396 रुपये की समझौता धनराशि तय की गई।

राष्ट्रीय लोक अदालत में कुल 55,590 मामलों का निस्तारण किया गया। इस दौरान कुल 19 करोड़ 1 लाख 69 हजार 899 रुपये की समझौता धनराशि तय हुई तथा मौके पर ही 14 करोड़ 54 लाख 67 हजार 11 रुपये की वसूली की गई। आयोजन को सफल बनाने में न्यायिक अधिकारियों, अधिवक्ताओं, प्रशासनिक अधिकारियों एवं कर्मचारियों की महत्वपूर्ण भूमिका रही।



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