बलिया डीएम मंगला प्रसाद सिंह की सख्ती : एंबुलेंस को पेट्रोल न देने पर बड़ा एक्शन, लापरवाही से गई मरीज की जान


बलिया जिले से एक बेहद दर्दनाक और झकझोर देने वाली घटना सामने आई है, जिसने इंसानियत और व्यवस्था दोनों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। बैरिया क्षेत्र में स्थित एक पेट्रोल पंप पर एंबुलेंस को पेट्रोल देने से इनकार कर दिया गया, जिसके चलते गंभीर रूप से बीमार मरीज को समय पर अस्पताल नहीं पहुंचाया जा सका और उसकी मौत हो गई। यह घटना 22 अप्रैल की रात करीब 9:30 बजे की बताई जा रही है, जब नगरा रोड स्थित भूषण पेट्रोल पंप पर एक एंबुलेंस पहुंची थी। एंबुलेंस में मौजूद मरीज की हालत नाजुक थी और हर मिनट कीमती था, लेकिन चालक द्वारा बार-बार अनुरोध करने के बावजूद पंप कर्मचारियों ने पेट्रोल न होने का हवाला देते हुए तेल देने से साफ इनकार कर दिया।

समय के साथ दौड़ में हारती जिंदगी आखिरकार हार गई और इलाज के अभाव में मरीज ने दम तोड़ दिया। इस घटना ने पूरे क्षेत्र में आक्रोश और शोक की लहर पैदा कर दी है। जैसे ही मामले की जानकारी जिलाधिकारी मंगला प्रसाद सिंह तक पहुंची, उन्होंने तत्काल संज्ञान लेते हुए मौके पर पहुंचकर स्थिति का जायजा लिया। डीएम के निर्देश पर पेट्रोल पंप के स्टॉक का भौतिक सत्यापन कराया गया, जिसमें चौंकाने वाला खुलासा हुआ। जांच में पाया गया कि पेट्रोल पंप पर लगभग 8500 लीटर पेट्रोल और 4500 लीटर से अधिक डीजल उपलब्ध था। इससे यह स्पष्ट हो गया कि कर्मचारियों द्वारा तेल खत्म होने की बात पूरी तरह झूठी और भ्रामक थी।

इस गंभीर लापरवाही और अमानवीय व्यवहार को देखते हुए प्रशासन ने पेट्रोल पंप प्रबंधन के खिलाफ कड़ी कार्रवाई शुरू कर दी है। पंप को तत्काल प्रभाव से कारण बताओ नोटिस (शो कॉज नोटिस) जारी किया गया है और इंडियन ऑयल के अधिकारियों को मौके पर बुलाकर पूरे मामले की विस्तृत रिपोर्ट मांगी गई है। जिलाधिकारी ने इस घटना को बेहद गंभीर मानते हुए जिले के सभी 157 पेट्रोल पंप संचालकों की आपात बैठक बुलाई है और स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि एंबुलेंस और अन्य आपातकालीन सेवाओं को प्राथमिकता के आधार पर ईंधन उपलब्ध कराया जाए।

डीएम ने सख्त चेतावनी दी है कि भविष्य में यदि इस तरह की लापरवाही या संवेदनहीनता सामने आई तो संबंधित पेट्रोल पंप का लाइसेंस निरस्त करने सहित कठोर कार्रवाई की जाएगी। इस घटना ने एक बार फिर यह सोचने पर मजबूर कर दिया है कि आपात स्थिति में मानवीय संवेदनाएं और जिम्मेदारी कितनी महत्वपूर्ण होती हैं। प्रशासन की सख्ती के बावजूद यह सवाल कायम है कि आखिर एक छोटी सी लापरवाही कैसे किसी की जिंदगी पर भारी पड़ गई।



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