शक्ति, साधना और विजय की अधिष्ठात्री : मां बगलामुखी जयंती का आध्यात्मिक महत्व

 


भारत की सनातन परंपरा में देवी-उपासना का विशेष स्थान है। इन्हीं शक्तियों में से एक हैं मां बगलामुखी, जिन्हें दस महाविद्याओं में आठवीं महाविद्या के रूप में पूजा जाता है। हर वर्ष वैशाख मास की शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि को मां बगलामुखी जयंती श्रद्धा और भक्ति के साथ मनाई जाती है। वर्ष 2026 में यह पावन पर्व 24 अप्रैल को पड़ रहा है, जिसे साधना, तंत्र और शक्ति उपासना का अत्यंत महत्वपूर्ण दिन माना जाता है।

मां बगलामुखी को ‘पीताम्बरा देवी’ भी कहा जाता है, क्योंकि उन्हें पीले वस्त्र, पीले पुष्प और हल्दी अत्यंत प्रिय हैं। उनकी आराधना में पीले रंग का विशेष महत्व है, जो समृद्धि, शक्ति और सकारात्मक ऊर्जा का प्रतीक माना जाता है। देवी का स्वरूप अत्यंत प्रभावशाली और अद्वितीय है—वे एक हाथ से शत्रु की जिह्वा पकड़कर उसे वश में करती हैं और दूसरे हाथ में गदा धारण करती हैं। यह स्वरूप इस बात का संकेत देता है कि मां अपने भक्तों के शत्रुओं और नकारात्मक शक्तियों को नष्ट कर उन्हें विजय प्रदान करती हैं।

पौराणिक कथाओं के अनुसार, जब संसार में अत्यधिक अराजकता और दुष्ट शक्तियों का प्रकोप बढ़ गया था, तब देवी बगलामुखी ने प्रकट होकर उन शक्तियों का संहार किया और धर्म की रक्षा की। उनकी उपासना विशेष रूप से शत्रु बाधा, न्यायिक मामलों में सफलता, वाणी पर नियंत्रण और जीवन में स्थिरता प्राप्त करने के लिए की जाती है।

इस दिन साधक विशेष रूप से व्रत रखते हैं और मां की पूजा-अर्चना करते हैं। मंदिरों में हवन, जप और अनुष्ठान का आयोजन होता है। भक्तगण ‘बगलामुखी मंत्र’ का जाप कर देवी की कृपा प्राप्त करने का प्रयास करते हैं। मान्यता है कि सच्ची श्रद्धा और नियमपूर्वक की गई साधना से मां बगलामुखी अपने भक्तों को हर संकट से उबारती हैं और उन्हें सफलता के मार्ग पर अग्रसर करती हैं।

आज के समय में, जब जीवन में प्रतिस्पर्धा, तनाव और अस्थिरता बढ़ती जा रही है, मां बगलामुखी की उपासना मन और आत्मा को संतुलित करने का माध्यम बनती है। यह पर्व हमें यह भी सिखाता है कि नकारात्मकता पर विजय पाने के लिए आत्मबल, संयम और श्रद्धा का होना आवश्यक है।

मां बगलामुखी जयंती केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक नहीं, बल्कि आत्मशक्ति, आत्मविश्वास और सकारात्मक ऊर्जा को जागृत करने का एक सशक्त अवसर है। इस दिन की गई साधना और प्रार्थना जीवन में नई दिशा और शक्ति प्रदान करती है।

अंततः, यह पावन पर्व हमें यह संदेश देता है कि जब आस्था और शक्ति का संगम होता है, तब हर कठिनाई पर विजय संभव हो जाती है। मां बगलामुखी की कृपा से सभी के जीवन में सुख, शांति और समृद्धि बनी रहे।

पंडित संतोष कुमार दूबे 

गोपालपुर, सहोदरा 

जिला - बलिया (उ.प्र.)

मो0 - 79059 16135




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