दयाशंकर सिंह व संजय सिंह टाइगर की मौजूदगी में मनाया गया कुंवर सिंह जयंती का विजयोत्सव
बलिया, 24 अप्रैल। 1857 की क्रांति के अमर नायक वीरवर बाबू कुंवर सिंह की जयंती गुरुवार की शाम शहर के कुंवर सिंह चौराहे पर भव्य रूप से विजयोत्सव के रूप में मनाई गई। कार्यक्रम में देशभक्ति, शौर्य और बलिदान की गूंज के बीच लोगों ने महान योद्धा को श्रद्धापूर्वक याद किया। मुख्य अतिथि के रूप में आरा के विधायक एवं मंत्री संजय सिंह ‘टाइगर’ तथा परिवहन मंत्री दयाशंकर सिंह की उपस्थिति ने आयोजन को गरिमामयी बना दिया।
मुख्य अतिथि संजय सिंह ‘टाइगर’ ने अपने संबोधन में कहा कि वीर कुंवर सिंह का जीवन भारतीय इतिहास में अद्वितीय प्रेरणा का स्रोत है। उन्होंने कहा कि 80 वर्ष की आयु में भी जिस प्रकार बाबू कुंवर सिंह ने अंग्रेजों के खिलाफ तलवार उठाई, वह विश्व इतिहास में वीरता का बेजोड़ उदाहरण है। उन्होंने 23 अप्रैल 1858 को अंग्रेज कैप्टन ली ग्रैंड की सेना को पराजित कर जगदीशपुर में पुनः अपना ध्वज फहराया, जो उनके अदम्य साहस और रणनीतिक कौशल का प्रतीक है। उनकी इस ऐतिहासिक विजय की स्मृति में हर वर्ष 23 अप्रैल को विजयोत्सव सह शौर्य दिवस के रूप में मनाया जाता है।
कार्यक्रम के आयोजक एवं परिवहन मंत्री दयाशंकर सिंह ने कहा कि वीरवर कुंवर सिंह केवल एक योद्धा नहीं, बल्कि आत्मसम्मान, देशभक्ति और अटूट संकल्प के प्रतीक थे। उन्होंने कहा कि जिस उम्र में लोग विश्राम करते हैं, उस समय उन्होंने स्वतंत्रता के लिए संघर्ष कर देश में क्रांति की नई अलख जगाई। उनका बलिदान और साहस आने वाली पीढ़ियों को सदैव प्रेरित करता रहेगा।
इस अवसर पर अतिथियों ने वीर कुंवर सिंह की प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित कर उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि दी। परिवहन मंत्री दयाशंकर सिंह ने मुख्य अतिथि संजय सिंह ‘टाइगर’ को अंगवस्त्र और माल्यार्पण कर सम्मानित किया। साथ ही कार्यक्रम में उपस्थित अन्य अतिथियों एवं गणमान्य लोगों को भी अंगवस्त्र एवं स्मृति चिन्ह प्रदान किए गए।
कार्यक्रम की अध्यक्षता कुंवर सिंह पीजी कॉलेज के प्राचार्य प्रो. अशोक सिंह ने की, जबकि संचालन सुरजीत सिंह परमार ने किया। संयोजक के रूप में कॉलेज छात्रसंघ के पूर्व अध्यक्ष राजेंद्र सिंह ने सभी अतिथियों एवं उपस्थित जनसमूह के प्रति आभार व्यक्त किया।
इस अवसर पर शशि प्रेमदेव, अखिलेश सिंह, अरुण सिंह बंटू, राजेश सिंह, संतोष सिंह, अमरीश पांडेय, गोला सिंह, अरविंद सिंह सहित बड़ी संख्या में लोग उपस्थित रहे। पूरा वातावरण “वीर कुंवर सिंह अमर रहें” के जयघोष से गूंज उठा, जिसने कार्यक्रम को एक ऐतिहासिक और भावनात्मक स्वरूप प्रदान किया।




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