स्वतंत्रता संग्राम सेनानी तारकेश्वर पाण्डेय स्वयं में एक जीवंत प्रगतिशील आंदोलन थे : डॉ. जनार्दन राय


बलिया। स्वतंत्रता संग्राम सेनानी पं० तारकेश्वर पाण्डेय केवल एक व्यक्ति नहीं, बल्कि स्वयं में एक प्रगतिशील सामाजिक एवं राष्ट्रीय आंदोलन थे। स्वतंत्रता संग्राम और रेल आंदोलन में उनका योगदान ऐसा रहा है जिसे इतिहास कभी भुला नहीं सकता।

ये उद्गार वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. जनार्दन राय ने सेनानी पं० तारकेश्वर पाण्डेय के स्मृति दिवस के अवसर पर व्यक्त किए। वे सतीश चन्द्र कॉलेज चौराहा स्थित पं० तारकेश्वर पाण्डेय की प्रतिमा पर माल्यार्पण के पश्चात आयोजित कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित जनसमुदाय को संबोधित कर रहे थे। डॉ. जनार्दन राय ने कहा कि पं० तारकेश्वर पाण्डेय ने आज़ादी की लड़ाई को जन-जन से जोड़ते हुए सामाजिक चेतना, श्रमिक अधिकार और राष्ट्र निर्माण के लिए आजीवन संघर्ष किया। उनका जीवन आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणास्रोत है।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए डॉ. शिव कुमार मिश्र ने पं० तारकेश्वर पाण्डेय को गरीबों का मसीहा बताया, वहीं जे.पी. पाण्डेय ने उन्हें शिक्षा और समाज को जोड़ने वाली एक महत्वपूर्ण कड़ी के रूप में रेखांकित किया। वंशरोपन पाण्डेय ने कहा कि पंडित जी पारिवारिक मूल्यों के साथ-साथ राष्ट्रीय मूल्यों को भी समान रूप से पहचानने और जीने वाले व्यक्तित्व थे। सुशील कुमार पाण्डेय उर्फ कान्हा जी ने उन्हें समाजवादी योद्धा बताते हुए उनके विचारों को आज के समय में भी प्रासंगिक बताया। इस अवसर पर कवि फतेह चन्द्र गुप्त ‘बेचैन’ ने देशभक्ति और कौमी एकता से ओत-प्रोत गीत प्रस्तुत कर वातावरण को भावविभोर कर दिया।

कार्यक्रम में प्रमुख रूप से पूर्व प्रधानाचार्य सुरेन्द्र नाथ ओझा, प्रेम प्रकाश पाण्डेय, अजीत पाण्डेय, सुनील कुमार पाण्डेय, सौरभ पाण्डेय, नर्वदेश्वर चौबे, संतोष पाण्डेय, टुनटुन सिंह, निर्भय कुमार यादव, रवि वर्मा, सुशील त्रिपाठी, उमेश पाण्डेय, वेदान्त ओझा, मनोज कुमार गुप्ता सहित बड़ी संख्या में गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे। कार्यक्रम की अध्यक्षता पंडित श्री राम तिवारी ने की, जबकि संचालन जय प्रकाश पाण्डेय ने किया।



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