स्याही से सभ्यता तक : विश्व मुद्रण दिवस और ज्ञान क्रांति की अमर कहानी


हर वर्ष 24 फरवरी को विश्व मुद्रण दिवस मनाया जाता है। यह दिवस उस ऐतिहासिक परिवर्तन की याद दिलाता है, जिसने मानव सभ्यता को अज्ञान के अंधकार से निकालकर ज्ञान के प्रकाश की ओर अग्रसर किया। मुद्रण ने विचारों को उड़ान दी, शब्दों को स्थायित्व दिया और शिक्षा, संस्कृति, लोकतंत्र व सामाजिक चेतना को नई दिशा प्रदान की।

विश्व मुद्रण दिवस का संबंध उस महान आविष्कारक से जुड़ा है, जिसने छपाई की दुनिया में क्रांति ला दी—जोहान्स गुटेनबर्ग। 24 फरवरी 1468 को गुटेनबर्ग का निधन हुआ था। उनके द्वारा विकसित मूवेबल टाइप प्रिंटिंग प्रेस ने पहली बार पुस्तकों को बड़े पैमाने पर छापना संभव बनाया। इससे पहले ज्ञान कुछ गिने-चुने वर्गों तक सीमित था, लेकिन मुद्रण के आगमन ने इसे जन-जन तक पहुंचा दिया।

मुद्रण ने शिक्षा के क्षेत्र में अभूतपूर्व परिवर्तन किए। पाठ्यपुस्तकों, संदर्भ ग्रंथों और शोध साहित्य की उपलब्धता ने सीखने की गति तेज की। सामाजिक और राजनीतिक चेतना के प्रसार में भी मुद्रण की अहम भूमिका रही। समाचार पत्रों और पत्रिकाओं ने आम जन को अपनी आवाज़ दी, सवाल पूछने का साहस दिया और लोकतांत्रिक मूल्यों को मजबूत किया। भारत के स्वतंत्रता आंदोलन में भी मुद्रित साहित्य ने जनजागरण की मशाल जलाए रखी।

आज डिजिटल युग में भले ही तकनीक ने संचार के नए माध्यम दे दिए हों, लेकिन मुद्रण की प्रासंगिकता कम नहीं हुई है। पुस्तकें, अख़बार, पत्रिकाएँ, शोध पत्र और आधिकारिक दस्तावेज़ आज भी भरोसे और प्रमाणिकता के प्रतीक हैं। मुद्रण उद्योग ने समय के साथ स्वयं को बदला है—ऑफसेट, डिजिटल प्रिंटिंग, थ्री-डी प्रिंटिंग जैसी तकनीकों ने इसकी क्षमता और दायरा बढ़ाया है।

विश्व मुद्रण दिवस केवल अतीत के गौरव को स्मरण करने का दिन नहीं, बल्कि भविष्य की जिम्मेदारियों पर विचार करने का अवसर भी है। पर्यावरण संरक्षण के प्रति सजग रहते हुए कागज़ के विवेकपूर्ण उपयोग, पुनर्चक्रण और हरित मुद्रण तकनीकों को अपनाना आज की आवश्यकता है। साथ ही, गुणवत्तापूर्ण सामग्री और नैतिक पत्रकारिता के माध्यम से समाज को सही दिशा देना भी मुद्रण जगत का दायित्व है।

अंततः, मुद्रण वह सेतु है जो पीढ़ियों को जोड़ता है—विचारों को समय के पार ले जाता है। विश्व मुद्रण दिवस हमें यह याद दिलाता है कि शब्दों की शक्ति अमर है और जब वे काग़ज़ पर उतरते हैं, तो इतिहास बनाते हैं।

परिवर्तन चक्र समाचार सेवा ✍️ 



Post a Comment

0 Comments