सन् 2025 का आज अंतिम दिन है। समय का पहिया एक और चक्र पूरा कर रहा है। घड़ी की हर टिक-टिक में मानो बीते दिनों की आहट छिपी है, यादों की परछाइयाँ आँखों के सामने घूम रही हैं और दिल बार-बार कह रहा है कि यह वर्ष भी जाने वाला है। यह बीते हुए पलों, सीखे गए सबक, अधूरे सपनों, पूरी हुई इच्छाओं और अनगिनत अनुभवों का संगम रहा। 2025 ने दुनिया को बदलते देखा, लोगों को बदलते देखा और मनुष्यों की सोच, जीवनशैली और आकांक्षाओं को एक नया मोड़ देते हुए भविष्य की दिशा में प्रवाहित होते देखा। यह वर्ष एक दर्पण की तरह रहा जिसमें इंसानियत का असली चेहरा झलकता रहा—कहीं मदद, कहीं भरोसा, कहीं संघर्ष, कहीं हार, कहीं जीत, कहीं जश्न, कहीं आँसू और कहीं अटूट साहस।
2025 वह वर्ष रहा जब तकनीकी विकास अपनी सबसे तेज रफ़्तार से चलता दिखा। इंटरनेट ने दुनिया को और नज़दीक किया, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस ने नए अवसरों के द्वार खोले, मशीनों ने मानव को सहारा भी दिया, किन्तु संबंधों के बीच दूरी का एहसास भी कराया। रोबोट और ऑटोमेशन ने कार्यस्थल की तस्वीर बदली, युवाओं के सपनों को पंख मिले, स्टार्टअप संस्कृति पहले से अधिक सशक्त होकर उभरी, अनेक नए उद्यमी सामने आए, और बेरोजगारी की चिंता के बीच भी रोजगार के नए स्रोतों ने आशा जगाई। गाँवों में डिजिटल सेवाओं के विस्तार ने उन हाथों में शक्ति दी जो वर्षों से अवसर का इंतज़ार कर रहे थे। शिक्षा अपनी सीमाओं से बाहर निकलकर मोबाइल स्क्रीन और ई–क्लासरूम के माध्यम से हर घर पहुँची, बच्चों की आँखों में सपनों की रोशनी और भी तेज हुई।
लेकिन हर उजाला अपनी छाया के बिना अधूरा होता है। महंगाई की मार ने इस साल कई घरों की थाली से निवाला छीना, मध्यम वर्ग को कठिनाई में डाला, और गरीब की रसोई में बार-बार संकट खड़ा किया। बेरोजगारी का बोझ अभी भी कुछ युवाओं के कंधों पर भारी रहा। मानसिक तनाव और अवसाद धीरे-धीरे दुश्मन की तरह जीवन में प्रवेश करते रहे—आधुनिकता की चकाचौंध के बीच मनुष्य का मन अकेला होता गया, रिश्तों की मधुरता में कुछ दरारें भी आईं। परिवार एक साथ होने के बावजूद भावनाएँ हमेशा साथ नहीं रहीं। दुनिया जितनी तेज़ भागी, लोग उतने ही भीतर से थकते गए।
प्रकृति भी इस पूरे वर्ष हमें लगातार संदेश देती रही—कहीं बारिश की तबाही, कहीं सूखे की मार, कहीं भूकंप की चोट, कहीं तूफान का प्रकोप। पर्यावरण ने यह स्पष्ट जता दिया कि यदि मनुष्य ने अब भी विवेक नहीं अपनाया, तो आने वाला समय कठिन होगा। हवा की साँस थक रही है, धरती का सीना तप रहा है, पहाड़ों की ताकत टूट रही है और नदियाँ अपनी रफ्तार खो रही हैं। यह वर्ष हमें चेतावनी देकर जा रहा है कि विकास तभी सार्थक है जब धरती की धड़कनें जीवित रहें।
फिर भी, 2025 की तस्वीर केवल संघर्ष और संकट की कहानी नहीं है। यह वर्ष उन छोटी-छोटी खुशियों का भी प्रतीक है जिनके सामने बड़े-बड़े दुख भी फीके लगते हैं। यह वह वर्ष था जब कई परिवारों में नए शिशुओं की हँसी गूँजी, कई रिश्ते जन्मे, कई सपनों को मंज़िल मिली। यह वह समय था जब माँ के हाथ की रोटी का स्वाद, पिता की थकी मुस्कान में छिपा गर्व, भाई का साथ, बहन की चिंता और मित्रों के कंधे पर रखे हाथ ने जीवन को वह अर्थ दिया जिसे शब्दों में पिरो पाना कठिन है। यह वर्ष उन लोगों के लिए भी खास रहा जिन्होंने टूटकर भी उठने का साहस दिखाया, गिरकर भी चलने की कला सीखी, और परिस्थितियों के सामने भी स्वयं के अस्तित्व को बचाकर रखा।
आज जब हम 2025 को विदा करते खड़े हैं, तो मन मानो ठहरकर पूछता है—इस वर्ष ने हमें क्या सिखाया? इस वर्ष ने सिखाया कि संघर्ष रास्ता रोकते नहीं, बल्कि ताकत बनकर उभरते हैं। इसने बताया कि समय सबसे बड़ा धन है, और दूसरी सबसे महत्वपूर्ण पूँजी रिश्ते हैं। इसने समझाया कि स्वास्थ्य केवल शरीर नहीं, बल्कि मन की शांति भी है। यह वर्ष कहता है—सीखते रहो, बदलते रहो, क्योंकि भविष्य उन्हीं का है जो पीछे नहीं देखते, बल्कि आगे बढ़ते हैं।
और अब, कल सुबह एक नया सवेरा उगने वाला है—2026 का सवेरा। वह सिर्फ एक दिन नहीं होगा, बल्कि एक नई किताब का पहला पन्ना होगा, जिसमें हम आज अपनी पहली पंक्ति लिखेंगे। 2026 हमारे सामने एक अवसर की तरह खड़ा है—सपनों को उड़ान देने का, अपनों को गले लगाने का, गलतियों को पीछे छोड़ने का, जीवन को संतुलन, विनम्रता, और कृतज्ञता के साथ जीने का। आने वाला वर्ष हमें पुकार रहा है—कि अब हम सिर्फ सफलता नहीं, बल्कि सार्थकता खोजें; सिर्फ कमाएँ नहीं, बल्कि खुशियाँ बाँटें; सिर्फ दौड़ें नहीं, बल्कि हर पल को महसूस भी करें।
अंततः, 2025 केवल वर्ष नहीं था—यह हमारी कहानी का एक भावनात्मक, संघर्षपूर्ण, प्रेरणादायक और सीखों से भरा अध्याय था। और 2026 केवल वर्ष नहीं होगा—यह हमारे सपनों का नया मंच, हमारी उम्मीदों की नई किरण, और हमारी इच्छाशक्ति की अग्नि परीक्षा होगा। आइए आज दिल पर हाथ रखकर कहें—विदा 2025, तुम्हारे हर आँसू और हर मुस्कान को हम दिल में संजोकर रखेंगे; स्वागत 2026, चलो नई उम्मीदों की रोशनी में नया भविष्य गढ़ते हैं।
सहतवार, बलिया (उ.प्र.)
मो. नं. - 9454046303



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