शौक उनके अक्सर कम हो जाते हैं, जो कम उम्र में ही जिम्मेदार हो जाते है!

करोना काल कि बिकराल ब्यवस्था में होली की रंगोली उदासी भरे वातावरण में मनहूशीयत लिये आज ताल ठोक रही है। न हर्ष न उल्लास हर आदमी उदास, न जोगीरा, न  चौपाल, महंगाई में सबका फाक्ता है ख्याल। गजब का मंजर है करौना के दहशत में गांव और शहर है। आज के दिन का कभी बे सब्ररी से इन्तजार हुआ करता‌ था। बसन्त पंचमी के बाद से ही वातावरण उल्लासमय हो जाता था। दिशाये गमकने लगती थी मादकता लिये हवा मनमोहक छटा बिखेरती थी बाग बगीचा खेत खलिहान में नव विहान का उत्कर्ष अंगड़ाई लेने लगता प्रकृति साज श्रृंगार कर दुल्हन के तरह से सज उठती हर तरफ माहौल में रंगीनियत का आगाज हिलोरें मारने लगता। हर हराती पछुआ का शानिध्य पाकर आसमान चमक उठता, धरती प्रफुल्लित होकर मुस्करा उठती लेकिन बदलते हालात में सब कुछ कल की बात होकर रह गया है। बाग बगीचे  जंगल सब कटते गये‌ प्रकृति के साथ श्रृंगार के संसाधन घटते गये।प्रदुषण खर-दूषण के तरह हाहाकार मचा दिया है‌। वैमनश्यता समरसरता का विलोपन कर दिया भाईचारगी में जहर भर दिया। सियासत के सिपाहसलार इन्सानियत लिये मचल रहे वातावरण का चीरहरण कर दिये। जाति बिरादरी हिन्दू मुसलमान के बीच इन्सानो का बंटवारा कर दिया। आज हालत यह हो गया की सियासतदारों के कुटिल चाल में फंसकर हर धर्म सम्प्रदाय जहरीला बना गया। आदमी आदमी का दुश्मन बन गया है भाई चारगी विवश है हर त्योहार नीरस है।आज होली की रंगोली में आसमान हरा धरती लाल हो‌ उठती थी, अबीर गुलाल के साथ ही लोगों की चाल बदल जाती। मगर शहर दहशत में हैं तो गांवों में अजीब उदासी‌ है। 

करोना की दहशत ने सारा रंग फीका कर दिया है। इन्सानो के स्वार्थ का शिकार होकर समय भी परिवर्तन की जो इबारत लिख रहा है वह इन्सानों की बस्ती में तब्दील होता कंकरीट के जंगल में मंगल की शुभ कामना का संकेत कत्तई नहीं है। पुरातन धरोहर देखने को नहीं मिल रहा है। सुबह से ही बच्चों का हुजुम पीचकारी लिये राह चलते लोगों के लिये कौतुहल बना रहता था आज वह भी नजारा गायब है। महंगाई की मार करोना की ललकार ब्यवस्था के बिमार होने का अहसास आज हो रहा है।गरीब आहे भर रहा है तो आम आदमी रो रहा है। खुशी खुदकुशी कर चुकी है। सनातनी त्योहारों के श्रृंखला का आखरी सफर आज खत्म हो रहा है। शबेरात के साथ इस्लामिक त्योहार शुरु हो रहे है लेकिन हर तरफ मनहूषियत का आलम है जो गुज़र गया अतीत की बात होकर रह गया जो गुज़र रहा इस सदी की अनूठी सौगात है। धरती वहीं रात वहीं है केवल आदमी बदल गया। जैसे तैसे आज का वक्त भी निकल जायेगा लेकिन इतिहास‌ के पन्नों में अमिट इबारत तहरीर कर जायेगा। होली की रंगोली में हमजोली बनीये मगर करोना से सावधान रहें। करोना घात लगाते हमला के फिराक में हैं। जीवन अनमोल है सावधानी के साथ ही हर कदम उठाते।

जयहिंद🙏🏻🙏🏻


जगदीश सिंह, मऊ

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