राष्ट्र सेवा का संकल्प, देश की सुरक्षा में प्रादेशिक सेना का अदम्य योगदान


09 अक्टूबर : भारतीय प्रादेशिक सेना दिवस पर विशेष

भारतीय प्रादेशिक सेना दिवस हर वर्ष 9 अक्टूबर को देश की सुरक्षा, सेवा और राष्ट्रनिर्माण में प्रादेशिक सेना के योगदान को स्मरण करने और उसके वीर जवानों के प्रति सम्मान व्यक्त करने का अवसर प्रदान करता है। प्रादेशिक सेना भारतीय सेना का ऐसा महत्वपूर्ण अंग है, जिसमें देश के नागरिक अपने नियमित पेशे और पारिवारिक जिम्मेदारियों के साथ-साथ आवश्यकता पड़ने पर राष्ट्र की रक्षा के लिए सैन्य दायित्व निभाते हैं। यह भावना भारतीय नागरिक के भीतर छिपे राष्ट्रप्रेम, अनुशासन और कर्तव्यबोध का अद्भुत उदाहरण प्रस्तुत करती है।

भारतीय प्रादेशिक सेना की स्थापना 9 अक्टूबर 1949 को हुई थी। इसका उद्देश्य देश की नियमित सेना को आवश्यकता के समय अतिरिक्त सहयोग उपलब्ध कराना तथा नागरिकों को सैन्य सेवा से जोड़ना था। प्रादेशिक सेना की सबसे बड़ी विशेषता यही है कि इसके सदस्य सामान्य परिस्थितियों में अपने व्यवसाय, नौकरी अथवा अन्य पेशे में रहते हुए राष्ट्र की सेवा करते हैं और जरूरत पड़ने पर वर्दी पहनकर देश की सुरक्षा में योगदान देते हैं। इस व्यवस्था ने भारतीय सेना और समाज के बीच एक मजबूत सेतु का निर्माण किया है।

प्रादेशिक सेना का इतिहास केवल युद्ध और सैन्य अभियानों तक सीमित नहीं है। प्राकृतिक आपदाओं, बाढ़, भूस्खलन, राहत एवं बचाव कार्यों, पर्यावरण संरक्षण और अन्य राष्ट्रीय आवश्यकताओं के समय भी इसके जवानों ने उल्लेखनीय भूमिका निभाई है। जब देश को अतिरिक्त सैन्य शक्ति, मानव संसाधन और अनुशासित कार्यबल की आवश्यकता होती है, तब प्रादेशिक सेना के जवान पूरी तत्परता के साथ अपने दायित्वों का निर्वहन करते हैं। उनका योगदान यह संदेश देता है कि राष्ट्र की सेवा केवल सीमा पर तैनात रहकर ही नहीं, बल्कि आवश्यकता के प्रत्येक क्षण में जिम्मेदारी निभाकर भी की जा सकती है।

भारतीय प्रादेशिक सेना में समाज के विभिन्न क्षेत्रों से जुड़े नागरिक शामिल होते हैं। डॉक्टर, इंजीनियर, शिक्षक, कारोबारी, प्रशासनिक एवं अन्य पेशेवर लोग अपने-अपने क्षेत्रों में योगदान देने के साथ सैन्य प्रशिक्षण और जिम्मेदारियों को भी निभाते हैं। इस प्रकार प्रादेशिक सेना देश की नागरिक शक्ति और सैन्य शक्ति के बीच सामंजस्य का अनूठा उदाहरण है। यहां सेवा का अर्थ केवल नौकरी नहीं, बल्कि देश के प्रति समर्पण और जिम्मेदारी का भाव है।

आज जब देश सुरक्षा के साथ-साथ प्राकृतिक आपदाओं, पर्यावरणीय चुनौतियों और विभिन्न आकस्मिक परिस्थितियों का सामना करता है, तब प्रादेशिक सेना की उपयोगिता और भी महत्वपूर्ण हो जाती है। इसके जवान कठिन परिस्थितियों में अनुशासन, साहस और सेवा भावना का परिचय देते हैं। उनका जीवन युवाओं को यह प्रेरणा देता है कि राष्ट्रहित को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए व्यक्ति अपने निजी जीवन और राष्ट्रीय दायित्वों के बीच संतुलन स्थापित कर सकता है।

भारतीय प्रादेशिक सेना दिवस हमें उन सभी वीर जवानों और अधिकारियों को नमन करने का अवसर देता है, जिन्होंने देश की एकता, अखंडता और सुरक्षा के लिए अपना योगदान दिया है। यह दिवस केवल प्रादेशिक सेना की उपलब्धियों को याद करने का दिन नहीं, बल्कि प्रत्येक नागरिक को अपने राष्ट्रीय कर्तव्यों के प्रति जागरूक करने का भी अवसर है। देश की सुरक्षा केवल सैनिकों की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि प्रत्येक नागरिक की सामूहिक जिम्मेदारी है।

प्रादेशिक सेना का मूल संदेश स्पष्ट है—राष्ट्र सेवा के लिए समर्पण हो तो सामान्य नागरिक भी असाधारण भूमिका निभा सकता है। अपने पेशे के साथ सैन्य दायित्व निभाने वाले ये जवान देश की उस भावना का प्रतिनिधित्व करते हैं, जिसमें व्यक्तिगत हित से ऊपर राष्ट्रहित को स्थान दिया जाता है। भारतीय प्रादेशिक सेना दिवस पर देश के इन समर्पित सैनिकों के साहस, अनुशासन और सेवा भावना को शत-शत नमन।

आशीष त्रिवेदी ✍️

सचिव, संकल्प संस्था, बलिया (उ.प्र.)