देश में सकारात्मक सोच और रचनात्मक राजनीति की जरूरत, युवाओं से सजग एवं सचेष्ट रहने की अपील : डॉ. निर्भय नारायण सिंह
बलिया। देश में राजनीतिक मुद्दों के बीच लगातार इस्तीफे की मांग को लेकर उठने वाली आवाजों पर चिंता व्यक्त करते हुए वरिष्ठ अधिवक्ता डॉ. निर्भय नारायण सिंह ने कहा कि देश की राजनीति को केवल इस्तीफे और आरोप-प्रत्यारोप तक सीमित नहीं रहना चाहिए। आज आवश्यकता इस बात की है कि राजनीतिक दल और उनके नेता आपसी मतभेदों से ऊपर उठकर देश के विकास, शिक्षा, रोजगार, सामाजिक व्यवस्था और आम जनता के हितों पर गंभीरता से विचार करें।
डॉ. सिंह ने कहा कि कभी शिक्षा मंत्री, कभी चुनाव आयोग के अध्यक्ष, कभी गृह मंत्री और कभी प्रधानमंत्री के इस्तीफे की मांग को राजनीतिक विमर्श का प्रमुख मुद्दा बना देना देश के मूल विकास संबंधी सवालों से ध्यान भटका सकता है। लोकतंत्र में सरकार और संवैधानिक संस्थाओं की जवाबदेही महत्वपूर्ण है, लेकिन इसके साथ ही जनहित के मुद्दों पर सकारात्मक और रचनात्मक चर्चा भी उतनी ही आवश्यक है।
उन्होंने कहा कि देश की राजनीति में ऐसी भाषा और कार्यशैली को बढ़ावा मिलना चाहिए, जिससे समाज में विश्वास, संवाद और विकास की भावना मजबूत हो। नेताओं को चाहिए कि वे जनता के सामने ठोस मुद्दे रखें और शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार, किसानों, युवाओं तथा बुनियादी सुविधाओं से जुड़े विषयों पर सार्थक पहल करें।
वरिष्ठ अधिवक्ता ने विशेष रूप से युवाओं को संबोधित करते हुए कहा कि युवा देश का भविष्य हैं। उन्हें किसी भी राजनीतिक बहकावे, अफवाह या उकसावे में आने के बजाय हर विषय को तथ्यों और विवेक की कसौटी पर परखना चाहिए। उन्होंने कहा कि युवाओं को लेकर सार्वजनिक जीवन में चाहे जैसी भी टिप्पणियां की जाएं, उन्हें निराश होने के बजाय अपने अधिकारों और जिम्मेदारियों के प्रति जागरूक रहना चाहिए।
डॉ. सिंह ने कहा कि युवाओं की ऊर्जा देश की सबसे बड़ी ताकत है। यही ऊर्जा यदि शिक्षा, रोजगार, नवाचार, सामाजिक सेवा और राष्ट्र निर्माण में लगे तो देश को नई दिशा मिल सकती है। उन्होंने युवाओं से अपील की कि वे किसी भी मुद्दे पर प्रतिक्रिया देने से पहले उसके तथ्य समझें और लोकतांत्रिक एवं शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात रखें।
उन्होंने कहा कि समाज में ऐसे लोग भी होते हैं जो विभिन्न मुद्दों को अपने हित में इस्तेमाल करने का प्रयास करते हैं। इसलिए युवाओं को विशेष रूप से सावधान और सचेष्ट रहने की जरूरत है। भावनाओं में बहने के बजाय उन्हें अपने विवेक और संवैधानिक मूल्यों को प्राथमिकता देनी चाहिए।
डॉ. निर्भय नारायण सिंह ने कहा कि लोकतंत्र में असहमति का अपना महत्व है, लेकिन असहमति का स्वर सकारात्मक और मर्यादित होना चाहिए। राजनीतिक नेतृत्व से अपेक्षा है कि वह जनता की वास्तविक समस्याओं पर ध्यान केंद्रित करे और देश को आगे ले जाने वाली नीतियों एवं कार्यक्रमों पर चर्चा करे।
उन्होंने कहा कि आज आवश्यकता ‘इस्तीफा पॉलिटिक्स’ से आगे बढ़कर ‘विकास की राजनीति’ को मजबूत करने की है। देश की युवा शक्ति को शिक्षा, रोजगार, तकनीक, उद्यमिता और सामाजिक जिम्मेदारी के क्षेत्र में आगे बढ़ाने के लिए सभी राजनीतिक दलों और जनप्रतिनिधियों को मिलकर प्रयास करना चाहिए।
अंत में उन्होंने युवाओं से आह्वान किया कि वे देश के भविष्य के निर्माण में अपनी भूमिका को समझें। जोश जरूरी है, लेकिन जोश के साथ होश और विवेक रखना उससे भी अधिक जरूरी है। लोकतंत्र की मजबूती, सामाजिक सद्भाव और राष्ट्र के विकास के लिए प्रत्येक नागरिक को अपनी जिम्मेदारी निभानी होगी।
जय हिंद, जय भारत।

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