विश्व रेबीज दिवस : जागरूकता और समय पर टीकाकरण से रेबीज से बचाव संभव


हर वर्ष 28 सितंबर को विश्व रेबीज दिवस मनाया जाता है। इसका उद्देश्य रेबीज जैसी गंभीर और जानलेवा बीमारी के प्रति लोगों को जागरूक करना तथा इसके बचाव के उपायों की जानकारी देना है। रेबीज एक वायरल संक्रमण है, जो संक्रमित पशु के काटने, खरोंचने या उसकी लार के संपर्क में आने से मनुष्यों में फैल सकता है। समय पर सावधानी और उचित चिकित्सा मिलने पर इस बीमारी से बचाव संभव है।

रेबीज से बचाव का सबसे प्रभावी उपाय जागरूकता और पशुओं का समय पर टीकाकरण है। विशेष रूप से कुत्तों और अन्य पालतू पशुओं का नियमित टीकाकरण कराना बेहद जरूरी है। पालतू पशुओं को खुले में भटकने से रोकना, उनके व्यवहार में असामान्य बदलाव पर ध्यान देना और पशु के संपर्क में आने के बाद आवश्यक सावधानी बरतना संक्रमण के जोखिम को कम कर सकता है।

यदि किसी व्यक्ति को कुत्ते, बिल्ली या किसी अन्य संदिग्ध संक्रमित पशु ने काट लिया है या खरोंच लग गई है तो घाव को तुरंत साबुन और बहते पानी से अच्छी तरह धोना चाहिए। इसके बाद बिना देरी किए चिकित्सकीय सलाह लेकर आवश्यक एंटी-रेबीज टीकाकरण और अन्य उपचार कराना चाहिए। केवल घरेलू उपचार या झाड़-फूंक पर निर्भर रहना जोखिमपूर्ण हो सकता है।

विश्व रेबीज दिवस हमें यह संदेश देता है कि रेबीज के खिलाफ लड़ाई केवल उपचार तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके लिए पशु टीकाकरण, जिम्मेदार पालतू पशु पालन और आमजन में जागरूकता भी जरूरी है। समय पर उठाया गया एक छोटा-सा कदम किसी अनमोल जीवन को बचा सकता है। इसलिए स्वयं जागरूक बनें, दूसरों को जागरूक करें और अपने पालतू पशुओं के नियमित टीकाकरण के प्रति सजग रहें।

शैलेंद्र कुमार पांडेय ✍️

बलिया (उ.प्र.)