सियासत का एक मजबूत स्तंभ ढहा, रामगोविंद चौधरी नहीं रहे


74 वर्ष की उम्र में लखनऊ के पीजीआई में निधन, आठ बार रहे विधायक; विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष और मुलायम-अखिलेश सरकारों में मंत्री के रूप में बनाई अलग पहचान

बलिया/लखनऊ। समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता, पूर्व मंत्री और उत्तर प्रदेश विधानसभा के पूर्व नेता प्रतिपक्ष रामगोविंद चौधरी का शुक्रवार को लखनऊ के पीजीआई में निधन हो गया। वह 74 वर्ष के थे। उनके निधन की खबर से बलिया सहित पूरे पूर्वांचल के राजनीतिक एवं सामाजिक क्षेत्र में शोक की लहर दौड़ गई। समाजवादी पार्टी के कार्यकर्ताओं, समर्थकों और उनके लंबे राजनीतिक सफर से जुड़े लोगों ने उनके निधन पर गहरा दुख व्यक्त किया।

रामगोविंद चौधरी को पूर्वांचल की समाजवादी राजनीति के उन वरिष्ठ नेताओं में गिना जाता रहा, जिन्होंने करीब पांच दशक तक सक्रिय राजनीति में अपनी पहचान बनाए रखी। वह आठ बार उत्तर प्रदेश विधानसभा के सदस्य निर्वाचित हुए। छात्र राजनीति से अपने राजनीतिक सफर की शुरुआत करने वाले चौधरी ने आगे चलकर प्रदेश की राजनीति में महत्वपूर्ण स्थान बनाया।

1977 में शुरू हुआ विधानसभा का सफर

रामगोविंद चौधरी पहली बार वर्ष 1977 में चिलकहर विधानसभा क्षेत्र से विधायक निर्वाचित होकर विधानसभा पहुंचे। इसके बाद 1980, 1985, 1989 और 1991 में भी उन्होंने चिलकहर से विधानसभा का प्रतिनिधित्व किया। बाद के वर्षों में उन्होंने बांसडीह विधानसभा क्षेत्र को अपनी राजनीतिक कर्मभूमि बनाया। बांसडीह से भी उन्होंने कई बार विधानसभा चुनाव जीता और क्षेत्र की राजनीति में अपनी मजबूत पकड़ बनाए रखी।

मुलायम और अखिलेश सरकार में रहे मंत्री

रामगोविंद चौधरी ने समाजवादी राजनीति में रहते हुए मुलायम सिंह यादव और अखिलेश यादव की सरकारों में महत्वपूर्ण मंत्री पदों की जिम्मेदारी संभाली। अखिलेश यादव के नेतृत्व वाली सरकार में उनके पास बेसिक शिक्षा तथा बाल विकास एवं पुष्टाहार जैसे महत्वपूर्ण विभागों की जिम्मेदारी रही। मंत्री के रूप में उन्होंने प्रदेश की राजनीति में अपनी अलग पहचान बनाई।

2017 में बने नेता प्रतिपक्ष

वर्ष 2017 का विधानसभा चुनाव उनके राजनीतिक जीवन का महत्वपूर्ण पड़ाव रहा। बांसडीह से विधायक निर्वाचित होने के बाद उन्हें उत्तर प्रदेश विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष की जिम्मेदारी सौंपी गई। नेता प्रतिपक्ष के रूप में उन्होंने विधानसभा में विपक्ष की आवाज को मजबूती से उठाया तथा विभिन्न जनहित के मुद्दों पर सरकार को घेरा।

समाजवादी आंदोलन से रहा गहरा जुड़ाव

रामगोविंद चौधरी का राजनीतिक जीवन समाजवादी विचारधारा और आंदोलन की राजनीति से गहराई से जुड़ा रहा। उन्होंने छात्र राजनीति से सक्रिय राजनीतिक जीवन की शुरुआत की और समाजवादी आंदोलन के वरिष्ठ नेताओं के साथ काम करते हुए अपनी राजनीतिक पहचान बनाई। लंबे राजनीतिक अनुभव और संगठन में सक्रिय भूमिका के कारण वह समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेताओं में शुमार रहे।

अखिलेश यादव ने जताया शोक

सपा प्रमुख एवं उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने रामगोविंद चौधरी के निधन पर गहरा शोक व्यक्त किया। उन्होंने सोशल मीडिया पोस्ट में उन्हें समाजवादी पार्टी का वरिष्ठ नेता और पूर्व नेता प्रतिपक्ष बताते हुए निधन को अत्यंत दुखद बताया। अखिलेश यादव ने शोकाकुल परिजनों को यह अपार दुख सहन करने की शक्ति मिलने की कामना की।

रामगोविंद चौधरी के निधन से बलिया की राजनीति में एक लंबे दौर का अंत हुआ है। छात्र राजनीति से लेकर आठ बार विधायक, मंत्री और विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष तक का उनका राजनीतिक सफर रहा। उनके निधन से समाजवादी पार्टी के साथ ही बलिया के राजनीतिक एवं सामाजिक क्षेत्र में शोक की लहर है।