25 सितंबर : अनंत चतुर्दशी एवं गणेश विसर्जन पर विशेष :-
भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी तिथि को मनाया जाने वाला अनंत चतुर्दशी का पर्व भारतीय सनातन परंपरा में श्रद्धा, आस्था और आध्यात्मिक विश्वास का महत्वपूर्ण पर्व है। इसी दिन भगवान गणेश की पूजा-अर्चना के बाद श्रद्धापूर्वक उनका विसर्जन भी किया जाता है। गणेशोत्सव के दिनों में घरों और सार्वजनिक पंडालों में विराजमान विघ्नहर्ता भगवान गणेश को भक्त भक्ति और उल्लास के साथ विदाई देते हैं। मान्यता है कि भगवान गणेश अपने भक्तों के जीवन से विघ्न-बाधाओं को दूर कर सुख, समृद्धि और मंगल का आशीर्वाद प्रदान करते हैं।
अनंत चतुर्दशी का धार्मिक महत्व
अनंत चतुर्दशी भगवान विष्णु के अनंत स्वरूप की आराधना का पर्व है। इस दिन श्रद्धालु भगवान अनंत की पूजा करते हैं और अनंत सूत्र धारण करते हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार अनंत भगवान की उपासना करने से जीवन में स्थिरता, सुख-शांति और समृद्धि आती है तथा परिवार पर ईश्वर की कृपा बनी रहती है। अनंत सूत्र में चौदह गांठें लगाई जाती हैं, जिन्हें भगवान विष्णु के विभिन्न स्वरूपों और जीवन में धर्म, संयम तथा आस्था के प्रतीक के रूप में देखा जाता है।
विघ्नहर्ता को भावपूर्ण विदाई
गणेश चतुर्थी से शुरू हुआ गणेशोत्सव अनंत चतुर्दशी के दिन गणपति विसर्जन के साथ संपन्न होता है। भक्त भगवान गणेश की प्रतिमा को फूलों से सजाकर, पूजा-अर्चना कर और आरती उतारकर विसर्जन यात्रा निकालते हैं। इस दौरान वातावरण ‘गणपति बप्पा मोरया, अगले बरस तू जल्दी आ’ के जयघोष से गूंज उठता है। भक्तों के लिए विसर्जन केवल प्रतिमा को जल में प्रवाहित करने की परंपरा नहीं, बल्कि भगवान गणेश के प्रति अपनी श्रद्धा अर्पित करने और अगले वर्ष पुनः उनके आगमन की कामना करने का भावनात्मक अवसर है।
मिट्टी की प्रतिमा और पर्यावरण संरक्षण का संदेश
गणेश विसर्जन हमें प्रकृति के साथ संतुलन बनाए रखने का संदेश भी देता है। श्रद्धालुओं को चाहिए कि वे मिट्टी से बनी तथा प्राकृतिक रंगों से तैयार गणेश प्रतिमाओं का प्रयोग करें और प्रशासन द्वारा निर्धारित स्थानों पर ही विसर्जन करें। जल स्रोतों को प्रदूषण से बचाना भी हमारी सामूहिक जिम्मेदारी है। पूजा सामग्री को भी निर्धारित स्थान पर ही विसर्जित या संग्रहित करना चाहिए। इस प्रकार आस्था और पर्यावरण संरक्षण दोनों को साथ लेकर पर्व की पवित्रता बनाए रखी जा सकती है।
अनंत भगवान से सुख-समृद्धि की कामना
अनंत चतुर्दशी के अवसर पर श्रद्धालु भगवान विष्णु के अनंत स्वरूप का स्मरण कर परिवार की सुख-शांति, आरोग्य और समृद्धि की प्रार्थना करते हैं। यह पर्व मनुष्य को यह संदेश देता है कि जीवन में विपरीत परिस्थितियां चाहे जितनी भी हों, श्रद्धा, धैर्य, संयम और सत्कर्म का मार्ग कभी नहीं छोड़ना चाहिए। ईश्वर के प्रति विश्वास और अपने कर्मों के प्रति निष्ठा ही जीवन को सार्थक बनाती है।
भक्ति, सद्भाव और मंगल का पर्व
अनंत चतुर्दशी केवल धार्मिक अनुष्ठानों का दिन नहीं, बल्कि सामाजिक सद्भाव और पारिवारिक एकता का भी अवसर है। गणेशोत्सव के दौरान लोग सामूहिक रूप से पूजा-अर्चना करते हैं, एक-दूसरे को शुभकामनाएं देते हैं और समाज में भाईचारे की भावना को मजबूत करते हैं। गणपति विसर्जन के समय उमड़ने वाली श्रद्धा और उत्साह भारतीय संस्कृति की जीवंत परंपरा का परिचय देता है।
इस पावन अवसर पर यही मंगलकामना है कि भगवान गणेश और अनंत भगवान की कृपा से प्रत्येक परिवार में सुख, शांति, समृद्धि और मंगल बना रहे। विघ्नहर्ता सभी के जीवन से संकट और बाधाएं दूर करें तथा सभी को सद्बुद्धि, शक्ति और सफलता प्रदान करें। गणपति बप्पा मोरया, अगले बरस तू जल्दी आ।
पंडित विजेंद्र शर्मा ✍️बलिया (उ.प्र.)



