17 सितम्बर : जन्मदिवस पर विशेष :-
17 सितम्बर का दिन भारत के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के जन्मदिवस के रूप में जाना जाता है। सार्वजनिक जीवन में लंबे समय से सक्रिय नरेन्द्र मोदी का राजनीतिक सफर संगठनात्मक दायित्वों से होते हुए गुजरात के मुख्यमंत्री और फिर देश के प्रधानमंत्री पद तक पहुंचा। उनके जन्मदिवस के अवसर पर देशभर में विभिन्न सामाजिक, सेवा और जनकल्याण से जुड़े कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। उनके समर्थक इसे सेवा और जनसरोकार से जुड़े कार्यों के अवसर के रूप में मनाते हैं।
नरेन्द्र मोदी का जन्म 17 सितम्बर 1950 को गुजरात के वडनगर में हुआ। प्रारंभिक जीवन से ही वे सामाजिक और संगठनात्मक गतिविधियों से जुड़े रहे। बाद में भारतीय जनता पार्टी के संगठन में विभिन्न जिम्मेदारियां निभाते हुए उन्होंने गुजरात की राजनीति में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। वर्ष 2001 में वे गुजरात के मुख्यमंत्री बने और वर्ष 2014 तक इस पद पर रहे। इसके बाद वर्ष 2014 में उन्होंने भारत के प्रधानमंत्री पद की जिम्मेदारी संभाली। वर्ष 2019 में हुए लोकसभा चुनाव के बाद उन्होंने दूसरी बार प्रधानमंत्री पद की शपथ ली और वर्ष 2024 के लोकसभा चुनाव के बाद तीसरी बार प्रधानमंत्री पद की शपथ ग्रहण की।
प्रधानमंत्री के रूप में उनके कार्यकाल में केंद्र सरकार की नीतियों में डिजिटल तकनीक, बुनियादी ढांचे, वित्तीय समावेशन, प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण, स्वच्छता, आवास, ग्रामीण विकास और ऊर्जा जैसे क्षेत्रों पर विशेष जोर देखने को मिला। जनधन योजना के माध्यम से बैंकिंग व्यवस्था से अधिक लोगों को जोड़ने, डिजिटल भुगतान को बढ़ावा देने और सरकारी योजनाओं का लाभ सीधे लाभार्थियों तक पहुंचाने की दिशा में कई पहल की गईं। आधार, मोबाइल और बैंक खातों के माध्यम से सरकारी सेवाओं और भुगतान की व्यवस्था को मजबूत करने का प्रयास भी इसी व्यापक डिजिटल ढांचे का हिस्सा रहा।
स्वच्छ भारत मिशन ने देश में स्वच्छता को लेकर जनभागीदारी और जागरूकता को व्यापक स्तर पर चर्चा का विषय बनाया। खुले में शौच की समस्या को कम करने, शौचालय निर्माण और स्वच्छता के प्रति व्यवहार में बदलाव के लिए अभियान चलाया गया। इसी प्रकार प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत पात्र परिवारों को पक्के आवास उपलब्ध कराने का लक्ष्य रखा गया। उज्ज्वला योजना के माध्यम से गरीब परिवारों की महिलाओं को एलपीजी कनेक्शन उपलब्ध कराने की पहल की गई, जबकि आयुष्मान भारत के तहत पात्र परिवारों को स्वास्थ्य सुरक्षा उपलब्ध कराने की व्यवस्था विकसित की गई।
आर्थिक क्षेत्र में मेक इन इंडिया, स्टार्टअप इंडिया, आत्मनिर्भर भारत और उत्पादन से जुड़ी प्रोत्साहन योजनाओं के माध्यम से विनिर्माण और उद्यमिता को बढ़ावा देने की नीतियां सामने आईं। कोविड-19 महामारी के दौरान भारत ने बड़े पैमाने पर टीकाकरण अभियान संचालित किया। महामारी के बाद अर्थव्यवस्था को गति देने तथा विभिन्न क्षेत्रों में उत्पादन और निवेश बढ़ाने के लिए भी केंद्र सरकार की ओर से कई नीतिगत कदम उठाए गए।
बुनियादी ढांचे के क्षेत्र में राजमार्गों, रेलवे, हवाई अड्डों, बंदरगाहों और शहरी परिवहन परियोजनाओं के विस्तार पर जोर दिया गया। वंदे भारत जैसी नई ट्रेन सेवाओं, रेलवे के विद्युतीकरण और स्टेशनों के पुनर्विकास की योजनाओं ने रेल क्षेत्र में आधुनिकीकरण की दिशा को गति दी। डिजिटल इंडिया के विस्तार के साथ यूपीआई और डिजिटल भुगतान व्यवस्था ने आम नागरिकों, छोटे कारोबारियों और उद्यमियों के लिए लेन-देन के नए अवसर पैदा किए।
कृषि क्षेत्र में प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि सहित विभिन्न योजनाओं के माध्यम से किसानों को आर्थिक सहायता, सिंचाई, कृषि अवसंरचना और बाजार से संबंधित व्यवस्थाओं को मजबूत करने पर जोर दिया गया। ग्रामीण क्षेत्रों में सड़क, बिजली, आवास, पेयजल और डिजिटल कनेक्टिविटी जैसी सुविधाओं के विस्तार को भी विकास की व्यापक नीति से जोड़ा गया।
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत की कूटनीतिक गतिविधियों में भी प्रधानमंत्री मोदी के कार्यकाल में अनेक महत्वपूर्ण घटनाएं हुईं। भारत ने जी-20 की अध्यक्षता के दौरान वैश्विक मंच पर विकासशील देशों से जुड़े मुद्दों को प्रमुखता से उठाया। भारत की विदेश नीति में पड़ोसी देशों के साथ संबंधों, प्रमुख वैश्विक शक्तियों के साथ रणनीतिक साझेदारी तथा वैश्विक दक्षिण के देशों के साथ सहयोग को महत्व दिया गया।
प्रधानमंत्री के सार्वजनिक जीवन में तकनीक और जनभागीदारी का विशेष स्थान रहा है। सोशल मीडिया, डिजिटल प्लेटफॉर्म और प्रत्यक्ष संवाद के माध्यम से सरकार की योजनाओं एवं कार्यक्रमों को जनता तक पहुंचाने की शैली ने भारतीय राजनीति और सार्वजनिक संचार के तौर-तरीकों को भी प्रभावित किया है। 'मन की बात' जैसे कार्यक्रमों के माध्यम से उन्होंने विभिन्न सामाजिक विषयों, उपलब्धियों और नागरिक भागीदारी से जुड़े मुद्दों पर संवाद किया।
नरेन्द्र मोदी के राजनीतिक जीवन को लेकर देश में समर्थन के साथ-साथ विभिन्न नीतियों और निर्णयों पर राजनीतिक दलों, विशेषज्ञों और नागरिक समूहों की अलग-अलग राय भी रही है। लोकतांत्रिक व्यवस्था में सरकार के कार्यों, नीतियों और उनके प्रभाव पर सार्वजनिक बहस भारतीय राजनीतिक प्रक्रिया का महत्वपूर्ण हिस्सा है। यही बहस सरकार की उपलब्धियों, चुनौतियों और भविष्य की प्राथमिकताओं को समझने का आधार भी बनती है।
17 सितम्बर को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के जन्मदिवस का अवसर उनके अब तक के सार्वजनिक जीवन, प्रशासनिक अनुभव और देश की नीतिगत दिशा में उनकी भूमिका को देखने का अवसर प्रदान करता है। एक संगठनात्मक कार्यकर्ता से लेकर राज्य के मुख्यमंत्री और फिर देश के प्रधानमंत्री तक की उनकी यात्रा भारतीय लोकतांत्रिक राजनीति के एक महत्वपूर्ण अध्याय के रूप में दर्ज है। जन्मदिवस के अवसर पर उनके समर्थकों द्वारा सेवा, जनसंपर्क और सामाजिक गतिविधियों के कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं, जबकि राजनीतिक और सार्वजनिक विमर्श में उनके कार्यकाल की नीतियों एवं निर्णयों पर चर्चा जारी रहती है।
जन्मदिवस के इस अवसर पर देश के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को शुभकामनाएं प्रेषित की जाती हैं और राष्ट्र के विकास, लोकतांत्रिक मूल्यों तथा जनकल्याण के लिए निरंतर कार्य करने की भावना को स्मरण किया जाता है।
परिवर्तन चक्र समाचार सेवा ✍️


