मौके पर 20.97 करोड़ रुपये की वसूली, न्यायमूर्ति डॉ. गौतम चौधरी ने किया लोक अदालत का उद्घाटन
बलिया। राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण, नई दिल्ली एवं उत्तर प्रदेश राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण, लखनऊ के निर्देशानुसार जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, बलिया के तत्वावधान में शनिवार को जनपद न्यायालय परिसर में राष्ट्रीय लोक अदालत का आयोजन किया गया। लोक अदालत का उद्घाटन माननीय उच्च न्यायालय, इलाहाबाद के प्रशासनिक न्यायमूर्ति एवं बलिया के प्रशासनिक न्यायमूर्ति (सेशन डिवीजन) डॉ. गौतम चौधरी ने दीप प्रज्ज्वलित कर तथा मां सरस्वती के चित्र पर माल्यार्पण कर किया। राष्ट्रीय लोक अदालत में दीवानी, फौजदारी, राजस्व, पारिवारिक, मोटर दुर्घटना, बैंक, विद्युत, उपभोक्ता एवं दूरसंचार सहित विभिन्न प्रकार के कुल 68,656 वादों का निस्तारण किया गया। इन मामलों में कुल 27 करोड़ 04 लाख 41 हजार 642 रुपये की समझौता धनराशि तय हुई, जबकि मौके पर ही 20 करोड़ 97 लाख 27 हजार 574 रुपये की धनराशि वसूल की गई।
उद्घाटन समारोह में जनपद न्यायाधीश बलिया अनिल कुमार झा, प्रधान न्यायाधीश परिवार न्यायालय अश्वनी कुमार दूबे, पीठासीन अधिकारी मोटर दुर्घटना दावा अधिकरण संजीव कुमार तिवारी, नोडल अधिकारी लोक अदालत एवं विशेष न्यायाधीश (पाक्सो एक्ट) प्रथम कान्त, जिलाधिकारी मंगला प्रसाद सिंह, पुलिस अधीक्षक डॉ. ओमवीर सिंह, क्रिमिनल बार एसोसिएशन के अध्यक्ष देवेंद्र कुमार मिश्र तथा सिविल बार एसोसिएशन के अध्यक्ष जितेंद्र बहादुर सिंह सहित न्यायिक अधिकारी, अधिवक्ता, बैंक प्रबंधक, कर्मचारी, पीएलवी एवं वादकारी मौजूद रहे। कार्यक्रम का संचालन नोडल अधिकारी लोक अदालत प्रथम कान्त एवं जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के सचिव चन्द्र प्रकाश तिवारी ने किया।
इस अवसर पर न्यायमूर्ति डॉ. गौतम चौधरी ने लोक अदालत के महत्व पर प्रकाश डालते हुए विवादों का सुलह-समझौते के माध्यम से त्वरित एवं सरल निस्तारण कराने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि मध्यस्थता विवादों के समाधान का प्रभावी माध्यम है और इससे पक्षकारों को समय एवं धन की बचत के साथ न्याय प्राप्त होता है। उन्होंने न्यायिक अधिकारियों को समय का सदुपयोग करते हुए लोक अदालत को सफल बनाने के लिए प्रेरित किया।
जनपद न्यायाधीश अनिल कुमार झा ने न्यायिक अधिकारियों से न्याय को सरल, सुलभ एवं मानवीय बनाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि न्याय व्यवस्था का उद्देश्य केवल विवादों का निस्तारण करना ही नहीं, बल्कि उसके माध्यम से सामाजिक उत्थान को भी गति देना है। उन्होंने आम नागरिक के जीवन में लोक अदालत के सकारात्मक प्रभाव पर विस्तार से प्रकाश डाला।
राष्ट्रीय लोक अदालत में जनपद न्यायालय के विभिन्न न्यायालयों द्वारा बड़ी संख्या में फौजदारी एवं सिविल मामलों का निस्तारण किया गया। जनपद न्यायाधीश अनिल कुमार झा की अदालत में एनआई एक्ट की धारा 138 का एक वाद 1.90 लाख रुपये की समझौता राशि के साथ निस्तारित हुआ। इसके अलावा एक फौजदारी व पांच अन्य वादों का भी निस्तारण किया गया। अपर जनपद न्यायाधीश कोर्ट संख्या-1 द्वारा पांच फौजदारी वाद, विशेष न्यायाधीश पाक्सो एक्ट प्रथम कान्त द्वारा 19 फौजदारी वाद तथा विशेष न्यायाधीश एससी-एसटी एक्ट द्वारा एक फौजदारी वाद का निस्तारण किया गया। विशेष न्यायाधीश ईसी एक्ट की अदालत में विद्युत अधिनियम से संबंधित 172 वादों का निस्तारण हुआ।
मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट शैलेश पाण्डेय की अदालत में 92 फौजदारी वाद तथा 429 चालान वादों का निस्तारण किया गया। सिविल जज सीनियर डिवीजन गार्गी शर्मा की अदालत में 161 फौजदारी, 17 चालान एवं 19 सिविल वाद निस्तारित हुए तथा 1 करोड़ 22 लाख 19 हजार 963.44 रुपये का उत्तराधिकार प्रमाण पत्र जारी किया गया। अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम नवनीत कश्यप की अदालत में 237 फौजदारी और 110 चालान वादों का निस्तारण हुआ। सिविल जज सीनियर डिवीजन एफटीसी पंकज कुमार पाण्डेय की अदालत में 260 फौजदारी, 63 चालान, एक सिविल एवं एक सक्सेशन वाद निस्तारित हुआ। सिविल जज जूनियर डिवीजन पूर्वी सृष्टि त्रिपाठी की अदालत में आठ चालान, आठ सिविल तथा 21 सक्सेशन वादों का निस्तारण किया गया और 17 लाख 28 हजार 225 रुपये का उत्तराधिकार प्रमाण पत्र जारी हुआ।
न्यायिक मजिस्ट्रेट द्वितीय प्रियंका यादव की अदालत में 154 फौजदारी, पांच चालान तथा दो एनआई एक्ट के वाद निस्तारित हुए। सिविल जज जूनियर डिवीजन एफटीसी-तृतीय विवस्वान प्रकाश की अदालत में 211 फौजदारी, 17 चालान एवं दो वैवाहिक वादों का निस्तारण हुआ। सिविल जज जूनियर डिवीजन एफटीसी-प्रथम सुरभि सिंह की अदालत में 63 फौजदारी, 20 सिविल, आठ चालान तथा पांच सक्सेशन वाद निस्तारित हुए और 1 लाख 37 हजार 436 रुपये का उत्तराधिकार प्रमाण पत्र जारी किया गया। ग्राम न्यायालय बेल्थरारोड के न्यायाधिकारी उर्फी आजमी ने 31 फौजदारी वादों का निस्तारण किया, जबकि विशेष न्यायिक मजिस्ट्रेट अशोक उपाध्याय की अदालत में तीन फौजदारी वाद निस्तारित हुए। न्यायालयों द्वारा कुल 2,166 वादों का निस्तारण, 5,37,960 रुपये अर्थदंड तथा 1,40,85,624.44 रुपये के उत्तराधिकार प्रमाण पत्र जारी किए गए। न्यायालयों में समझौता धनराशि के रूप में 3.10 लाख रुपये का निस्तारण हुआ।
परिवार न्यायालय में प्रधान न्यायाधीश अश्वनी कुमार दूबे द्वारा 13 वैवाहिक वाद तथा अतिरिक्त प्रधान न्यायाधीश कमलापति द्वारा 41 वैवाहिक वादों का निस्तारण किया गया। मोटर दुर्घटना दावा अधिकरण के पीठासीन अधिकारी संजीव कुमार तिवारी ने 25 मामलों का निस्तारण करते हुए पीड़ित पक्षों को 1 करोड़ 43 लाख 20 हजार रुपये प्रतिकर दिलाया।
राजस्व विभाग द्वारा सर्वाधिक 31,329 वादों का निस्तारण किया गया। उपभोक्ता फोरम में आठ वाद निस्तारित हुए तथा 2 लाख 72 हजार 202 रुपये प्रतिकर की धनराशि तय की गई। बैंकों द्वारा प्री-लिटिगेशन स्तर के 934 वादों का निस्तारण करते हुए कुल 6 करोड़ 45 लाख 4 हजार 206 रुपये की समझौता धनराशि तय की गई तथा मौके पर 3 करोड़ 22 लाख 77 हजार 614 रुपये की नकद वसूली की गई। दूरसंचार विभाग द्वारा 10 प्री-लिटिगेशन वाद निस्तारित करते हुए 58,610 रुपये की समझौता राशि तय की गई और मौके पर 21 हजार रुपये की वसूली हुई।
विद्युत विभाग द्वारा 34,130 वादों का निस्तारण किया गया, जिनमें कुल 17 करोड़ 68 लाख 91 हजार रुपये की समझौता धनराशि तय की गई। इस प्रकार राष्ट्रीय लोक अदालत में विभिन्न न्यायालयों, राजस्व विभाग, बैंक, विद्युत, दूरसंचार एवं अन्य विभागों के लंबित एवं प्री-लिटिगेशन मामलों का व्यापक स्तर पर निस्तारण कर लोगों को त्वरित, सस्ता एवं सुलभ न्याय उपलब्ध कराया गया। लोक अदालत के माध्यम से बड़ी संख्या में मामलों के निस्तारण से जहां पक्षकारों को लंबे समय तक चलने वाली कानूनी प्रक्रिया से राहत मिली, वहीं आपसी सहमति और समझौते के माध्यम से विवादों के स्थायी समाधान की दिशा में भी महत्वपूर्ण पहल हुई।


