बलिदान दिवस पर गूंजा ‘बागी बलिया’, शहीदों के परिजनों का हुआ सम्मान


*बलिदान दिवस पर याद आया 1942 का बागी बलिया, मंत्री बोले- देशभक्ति की प्रेरणा देता है इतिहास*

*शहीदों के बलिदान को नमन, ‘जय हो-जय हो बागी बलिया’ पर झूमे बलियावासी*

*‘1942 में अंग्रेजी हुकूमत को उखाड़ फेंका था बलिया ने’ : दयाशंकर सिंह*

*रंगोली से लेकर गीतों तक दिखा बलिया का शौर्य, कलाकार हुए सम्मानित*

*बलिदान दिवस पर देशभक्ति के रंग में रंगा गंगा बहुद्देशीय सभागार*


बलिया। बलिया बलिदान दिवस के अवसर पर बुधवार को गंगा बहुद्देशीय सभागार में भव्य कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ परिवहन मंत्री दयाशंकर सिंह एवं अल्पसंख्यक कल्याण राज्यमंत्री दानिश आजाद अंसारी ने मां सरस्वती एवं राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के चित्र पर माल्यार्पण कर किया। इसके बाद उपस्थित लोगों ने सामूहिक रूप से राष्ट्रगीत ‘वंदे मातरम्’ का गायन किया। कार्यक्रम के दौरान बलिया के 13 शहीदों की पत्नियों तथा 25 स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों के परिवारों को अंगवस्त्र, स्मृति चिह्न एवं मिठाई भेंट कर सम्मानित किया गया। इसके साथ ही एनसीसी कैडेटों और रंगोली बनाने वाले कलाकारों को भी स्मृति चिह्न देकर सम्मानित किया गया। परिवहन मंत्री दयाशंकर सिंह ने रंगोली बनाने वाले कलाकारों को प्रोत्साहन स्वरूप पांच-पांच हजार रुपये की पुरस्कार राशि प्रदान की।


समारोह में राजकीय बालिका इंटर कॉलेज और महर्षि बालिका विद्यालय की छात्राओं सहित कलाकार प्रवण कान्हा जी ने सांस्कृतिक प्रस्तुतियां दीं। ‘जहां दादरी में दिखती है दुनिया की हर दुनिया, जय हो-जय हो बागी बलिया’ जैसे गीतों पर कलाकारों की प्रस्तुति ने कार्यक्रम में मौजूद लोगों में जोश भर दिया। उपस्थित बलियावासी गीत और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों पर झूम उठे। इस अवसर पर बलिया बलिदान दिवस से संबंधित वीडियो का भी प्रदर्शन किया गया, जिसके माध्यम से जिले के स्वतंत्रता आंदोलन और बलिदान की गौरवशाली गाथा को याद किया गया। कार्यक्रम में शहीदों के बलिदान और स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों के योगदान को नमन करते हुए नई पीढ़ी को उनके आदर्शों से प्रेरणा लेने का संदेश दिया गया।


परिवहन मंत्री ने कहा कि 19 अगस्त का दिन पूरे देश के साथ-साथ बलिया के लिए विशेष गौरव का दिन है। उन्होंने कहा कि देश को 1947 में आजादी मिली, लेकिन बलिया को वर्ष 1942 में ही अंग्रेजी हुकूमत से स्वतंत्र होकर देश में सबसे पहले आजाद होने का गौरव प्राप्त हुआ था। परिवहन मंत्री ने कहा कि वर्ष 1942 के भारत छोड़ो आंदोलन के दौरान चित्तू पांडेय के नेतृत्व में बलिया के क्रांतिकारियों ने अंग्रेजी शासन को उखाड़ फेंका था। करीब 14 दिनों तक बलिया स्वतंत्र रहा और इसके बाद ब्रिटिश हुकूमत को दोबारा बलिया पर अधिकार करने के लिए भारी मशक्कत करनी पड़ी। उन्होंने कहा कि 1942 में देश के कुछ ही स्थानों पर अंग्रेजी शासन के खिलाफ ऐसी सफलता मिली थी। महाराष्ट्र का सतारा, बंगाल का मिदनापुर और उत्तर प्रदेश का बलिया इसके प्रमुख उदाहरण रहे।


उन्होंने कहा कि बलिया के क्रांतिकारियों ने जेलों में बंद स्वतंत्रता सेनानियों को मुक्त कराया। चित्तू पांडेय ने बलिया के प्रथम जिलाधिकारी के रूप में 14 दिनों तक स्वतंत्र बलिया का संचालन किया, जबकि महानंद मिश्र ने पुलिस अधीक्षक की जिम्मेदारी संभाली। उन्होंने कहा कि इन क्रांतिकारियों और स्वतंत्रता सेनानियों का साहस आज भी नई पीढ़ी को देशभक्ति की प्रेरणा देता है। उन्होंने कहा कि वर्ष 2022 में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बलिया बलिदान दिवस के अवसर पर स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों के परिजनों को सम्मानित किया था। उन्होंने कहा कि बलिया की ऐतिहासिक भूमिका को सम्मान देने और नई पीढ़ी को इससे परिचित कराने के लिए 19 अगस्त को बलिया बलिदान दिवस के रूप में मनाया जाता है। उन्होंने स्वतंत्रता संग्राम के व्यापक इतिहास का उल्लेख करते हुए कहा कि 1857 के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम में मंगल पांडेय और बाबू कुंवर सिंह जैसे वीरों ने अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ संघर्ष की चिंगारी को पूरे देश में फैलाने का काम किया। वर्षों के संघर्ष और असंख्य बलिदानों के बाद देश को स्वतंत्रता मिली। परिवहन मंत्री ने कहा कि जब-जब देश के सामने कोई चुनौती आई, बलिया ने उसे स्वीकार किया और अपने साहस का परिचय दिया। बलिया के स्वतंत्रता सेनानियों का संघर्ष और देश के लिए उनका बलिदान आने वाली पीढ़ियों को हमेशा प्रेरित करता रहेगा। उन्होंने बलिया के वीर सपूतों और स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए उनके योगदान को देश के इतिहास की अमूल्य धरोहर बताया।


बलिया बलिदान दिवस पर राज्य मंत्री दानिश आजाद अंसारी ने बलिया के गौरवशाली इतिहास और स्वतंत्रता संग्राम में जिले की भूमिका को याद करते हुए कहा कि दुनिया के किसी भी कोने में जाएं और कोई पूछे कि आप कहां से हैं, तो गर्व से कहते हैं—‘बागी बलिया’ से हैं। उन्होंने कहा कि वर्ष 1857 की क्रांति के बाद बलिया ने देश को संघर्ष और क्रांति की एक अलग राह दिखाने का काम किया। इसी परंपरा को आगे बढ़ाते हुए स्वतंत्रता सेनानियों और शहीदों ने अपना सर्वस्व न्योछावर किया। उनके बलिदान और संघर्ष का परिणाम रहा कि वर्ष 1942 में बलिया ने अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ विद्रोह कर आजादी का गौरव हासिल किया। साथ ही बलिया को आजादी आसानी से नहीं मिली। इसके लिए बड़ी संख्या में स्वतंत्रता सेनानियों ने संघर्ष किया और कई वीरों ने अपने प्राणों की आहुति दी। उन्होंने कहा कि बलिया के इस गौरवशाली इतिहास को आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाना हम सभी की जिम्मेदारी है।


उन्होंने कहा कि बलिया की ऐतिहासिक पहचान को बनाए रखने के साथ ही जिले को विकास के पथ पर आगे ले जाना भी जरूरी है। उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार बलिया के विकास के लिए पूरी ईमानदारी और जिम्मेदारी के साथ काम कर रही है। सरकार का प्रयास है कि जिले में बेहतर शिक्षा व्यवस्था, विकास के नए अवसर और बुनियादी सुविधाओं को मजबूत किया जाए। उन्होंने कहा कि बलिया का इतिहास केवल जिले की पहचान नहीं, बल्कि पूरे प्रदेश और देश के लिए प्रेरणा का स्रोत है। शहीदों और स्वतंत्रता सेनानियों के त्याग को याद करते हुए हमें उनके सपनों के भारत के निर्माण में अपनी भूमिका निभानी चाहिए। कार्यक्रम का समापन जन गण मन अधिनायक जय भारत भाग्य विधाता गायन के साथ हुआ। 


इस कार्यक्रम में जिलाधिकारी मंगला प्रसाद सिंह, पुलिस अधीक्षक ओमवीर सिंह, जिलाध्यक्ष संजय मिश्रा, सिटी मजिस्ट्रेट आसाराम वर्मा, सीआरओ गुलशन जी, एडीएम अनिल कुमार, सीडीओ आलोक कुमार एवं अन्य अधिकारीगण उपस्थित रहे।